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क्रिप्टो पर RBI की सख्त रुख: जेन Z बना निवेशकों का सबसे बड़ा वर्ग, निवेश का भविष्य क्या?पड़ताल
2 घंटे पहले· 3

क्रिप्टो पर RBI की सख्त रुख: जेन Z बना निवेशकों का सबसे बड़ा वर्ग, निवेश का भविष्य क्या?

भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहा है, जबकि देश में जेन Z निवेशक मिलेनियल्स को पीछे छोड़कर सबसे आगे निकल गए हैं।

रविकाश गुप्तारविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने क्रिप्टोकरेंसी पर एक कठोर नीति की पैरवी करते हुए फिर से प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया है। सरकारी दस्तावेजों के आधार पर मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह रुख लंबे समय से जारी है। आरबीआई ने सबसे पहले 2013 में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े वित्तीय, कानूनी और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की थी। साल 2026 में यह बहस एक बार फिर उस समय प्रासंगिक हो गई है जब क्रिप्टो के इस्तेमाल में तेजी देखी जा रही है। कॉइनस्विच की साल 2025 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब जेन Z निवेशक मिलेनियल्स को पछाड़कर क्रिप्टो के सबसे बड़े निवेशक समूह के रूप में उभरे हैं।

क्रिप्टोकरेंसी आखिर है क्या और कैसे काम करती है?

क्रिप्टोकरेंसी की कार्यप्रणाली काफी हद तक रुपये या डॉलर जैसी मुद्रा के समान है, लेकिन इसका सबसे बड़ा अंतर यह है कि यह पूरी तरह से डिजिटल है। इसे न तो छुआ जा सकता है और न ही भौतिक रूप से जमा किया जा सकता है। यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है और लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करती है, इसलिए इसे क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है। बाजार में मुख्य रूप से दो तरह की क्रिप्टो होती हैं, जिन्हें पब्लिक और प्राइवेट कहा जाता है। ये करेंसी माइनिंग नामक प्रक्रिया के जरिए बनाई जाती हैं। यह एक प्रकार की वर्चुअल माइनिंग है, जिसमें प्रतिभागी जटिल डिजिटल पहेलियों को सुलझाकर क्रिप्टो रिवॉर्ड हासिल करते हैं। इन पहेलियों को हल करने के लिए विशेष एल्गोरिदम (प्रोग्रामिंग कोड) और भारी कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है। सैद्धांतिक रूप से कोई भी क्रिप्टोकरेंसी बना सकता है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह बेहद कठिन और संसाधनों से भरपूर प्रक्रिया है।

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प्राइवेट बनाम पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी

एक प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी वह डिजिटल मुद्रा है जिसके लेनदेन का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होता। इसका अर्थ है कि सामान्य उपयोगकर्ता आसानी से इसके लेनदेन या संबंधित गतिविधियों को ट्रैक या सत्यापित नहीं कर सकते हैं। इसके विपरीत, पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी के रिकॉर्ड एक सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर मौजूद होते हैं, जिसे कोई भी देख सकता है। यह पारदर्शिता इसे अधिक विश्वसनीय बनाती है। हालांकि, भविष्य में सरकार आने वाले बिल में 'प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी' को किस तरह परिभाषित करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यह भी संभव है कि सरकार सभी प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी को प्राइवेट की श्रेणी में डाल दे। वर्तमान में भारत में लगभग 3 करोड़ 90 लाख क्रिप्टो ट्रेडर हैं। आयकर विभाग के अनुमान के अनुसार, मई के अंत तक इनके पास लगभग 20,000 करोड़ रुपये (लगभग 2.1 बिलियन डॉलर) की डिजिटल संपत्ति जमा थी।

RBI की चिंताएं और प्रतिबंध का तर्क

रिजर्व बैंक ने बार-बार लोगों को क्रिप्टोकरेंसी के जोखिमों से आगाह किया है। आरबीआई का मानना है कि यदि बैंक क्रिप्टो संपत्तियों से जुड़ते हैं, तो बाजार में आने वाली कोई भी समस्या देश की वित्तीय प्रणाली को डगमगा सकती है। वर्तमान में भारतीय बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन करने से कानूनी रूप से पूरी तरह नहीं रोका गया है, लेकिन आरबीआई की चेतावनियों के चलते ज्यादातर बड़े बैंक इनसे दूरी बनाए हुए हैं। आरबीआई का साफ कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी को भारत की विनियमित वित्तीय प्रणाली के बाहर ही रहना चाहिए। इसके अलावा, स्टेबलकॉइन्स को लेकर भी आरबीआई चिंतित है, जो अमेरिकी डॉलर जैसी संपत्तियों से जुड़े होते हैं। केंद्रीय बैंक को डर है कि विदेशी मुद्रा समर्थित स्टेबलकॉइन्स से भारत का अपनी मौद्रिक प्रणाली पर नियंत्रण कमजोर हो सकता है। आरबीआई के मुताबिक, स्टेबलकॉइन्स के कारण क्रिप्टो मुनाफे को ट्रैक करना और उन पर कर लगाना मुश्किल हो सकता है, जबकि अभी भारत में क्रिप्टो लाभ पर 30 प्रतिशत टैक्स लागू है। क्रिप्टोकरेंसी विशेषज्ञ हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि आरबीआई ने बार-बार सरकार को सूचित किया है कि वह क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं देता है और इसे लेकर सहज नहीं है।

क्या पूर्ण प्रतिबंध संभव है?

किसी भी सरकार का अधिकार केवल अपने देश की सीमाओं तक सीमित होता है, जबकि इंटरनेट की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। ऑनलाइन गतिविधियों और सर्वर की लोकेशन का पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता है। साथ ही, क्रिप्टो का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी महत्व है, इसलिए पूर्ण प्रतिबंध लगाना एक जटिल कार्य है। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्रिप्टोकरेंसी किसी सरकार या बैंक के नियंत्रण में नहीं होती। इसके अलावा, कई क्रिप्टो एक्सचेंज भारत में पंजीकृत नहीं हैं, जिससे स्थानीय कानूनों का प्रभाव उन पर सीमित हो सकता है। यदि सरकार कानून लाती भी है, तो निवेशक अन्य तरीकों से व्यापार जारी रख सकते हैं।

जेन Z का दबदबा और बाजार की स्थिति

क्रिप्टोकरेंसी की ओर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। 18 से 25 वर्ष की आयु वाले जेन Z निवेशक पहली बार मिलेनियल्स से आगे निकल गए हैं। कॉइनस्विच के अनुसार, कुल क्रिप्टो निवेशकों में जेन Z की हिस्सेदारी 37.6 प्रतिशत है, जबकि मिलेनियल्स 37.3 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह आंकड़े 2.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के डेटा पर आधारित हैं। कॉइनस्विच के उपाध्यक्ष बालाजी श्रीहरि का मानना है कि यह भारतीय क्रिप्टो बाजार के परिपक्व होने का संकेत है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो का चलन अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के निवेशक भी बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। साल 2026 में भी यह ट्रेंड जारी रहा। क्रिप्टो एक्सचेंज Pi42 के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में जेन Z का क्रिप्टो निवेश साल-दर-साल 63 प्रतिशत बढ़ा है। दिलचस्प बात यह है कि यह वृद्धि बिटकॉइन की कीमतों में भारी गिरावट के बीच हुई है। Pi42 के सीईओ अविनाश शेखर कहते हैं कि यह युवा निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। औसत ट्रेड साइज 2024 में 1,051 डॉलर से बढ़कर 2025 में लगभग 1,960 डॉलर तक पहुंच गया है। हालाँकि, यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब नियामक माहौल सख्त होता जा रहा है। जुलाई में आरबीआई ने फिर से वित्तीय स्थिरता का हवाला देते हुए प्रतिबंध का समर्थन किया, जबकि सरकार क्रिप्टो मुनाफे पर 30 प्रतिशत टैक्स वसूल रही है। कॉइनगेको के अनुसार, दुनिया के 18 देशों में बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध या आंशिक पाबंदियां लगी हुई हैं। अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, चीन, मिस्र, कुवैत, नेपाल, उत्तर मैसेडोनिया और ट्यूनीशिया जैसे देशों में पूर्ण प्रतिबंध लागू है।

इसका आप पर असर

भारत में: यदि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है, तो भारत में मौजूद 3 करोड़ 90 लाख निवेशकों की डिजिटल संपत्तियों पर कानूनी संकट आ सकता है।

निवेशकों के लिए: क्रिप्टो बाजार में निवेश करने वाले जेन Z और मिलेनियल्स को 30% टैक्स और सख्त नियामक अनिश्चितताओं के कारण भविष्य में अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने में कठिनाई हो सकती है।

सवाल-जवाब

जेन Z निवेशक और मिलेनियल्स में से भारत में कौन सा समूह बड़ा है?
कॉइनस्विच की रिपोर्ट के अनुसार, जेन Z निवेशक अब कुल निवेशकों का 37.6% हिस्सा हैं, जिससे वे मिलेनियल्स (37.3%) को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा समूह बन गए हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध क्यों चाहता है?
आरबीआई का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा करती है और यदि बैंक इससे जुड़ते हैं, तो बाजार की अस्थिरता का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्या भारत में अभी क्रिप्टो पर कोई टैक्स लगता है?
हां, भारत में क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले लाभ पर वर्तमान में 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है।
दुनिया के कितने देशों में क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध है?
कॉइनगेको के आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, चीन, मिस्र, कुवैत, नेपाल, उत्तर मैसेडोनिया और ट्यूनीशिया सहित नौ देशों में क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध है।
रविकाश गुप्ता
लेखक के बारे मेंरविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताभारत समाचार, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार, क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट न्यूज़, स्टार्टअप, आर्थिक रुझान, डिजिटल एसेट्स, निवेश अंतर्दृष्टि

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत की ख़बरों, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार और क्रिप्टोकरेंसी को कवर करते हैं। वे आर्थिक रुझानों, क्रिप्टो घटनाक्रमों और दुनियाभर की बड़ी बाज़ार-हलचल वाली घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं।

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत-केंद्रित रिपोर्टिंग और बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार व क्रिप्टोकरेंसी की वैश्विक कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, आर्थिक घटनाक्रम, कॉर्पोरेट मामले, शेयर बाज़ार, ब्लॉकचेन नवाचार और आधुनिक वित्तीय तंत्र को आकार देने वाले डिजिटल एसेट रुझान कवर करते हैं। स्पष्टता, विश्लेषण और समय पर रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ रविकाश वैश्विक आर्थिक बदलावों, उभरती तकनीकों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और बदलते क्रिप्टो परिदृश्य की अंतर्दृष्टि देते हैं। उनका काम व्यापक आर्थिक रुझानों को वास्तविक बाज़ार असर से जोड़ता है और पाठकों को पारंपरिक वित्त व डिजिटल एसेट्स की तेज़ी से बदलती दुनिया — दोनों समझने में मदद करता है।

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