यूक्रेन के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष को 4 साल, 4 महीने और 18 दिन बीत चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को जब रूस ने हमला शुरू किया था, तब अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि यूक्रेन 24 घंटे के भीतर घुटने टेक देगा। हालांकि, आज स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है और रूस खुद को कमजोर और जर्जर महसूस कर रहा है।
पुतिन का कबूलनामा
व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार खुले तौर पर माना है कि उनका देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है। यह बयान उस समय आया है जब रूस के भीतर कई मोर्चों पर चुनौतियां बढ़ गई हैं। रूसी प्रशासन पर अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा दबाव है।
क्रीमिया की स्थिति और रसद का संकट
रूस के कब्जे वाले क्रीमिया पर यूक्रेनी सेना का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया घटनाओं में वहां ईंधन की भारी कमी देखी गई है, जिसके चलते पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रीमिया पर रूस का नियंत्रण कमजोर होता है, तो यह युद्ध के परिणाम के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। क्रीमिया तक जाने वाले रसद के पुलों और रास्तों को बाधित करना यूक्रेनी रणनीति का बड़ा हिस्सा रहा है।
युद्ध का बदलता स्वरूप
रूस न केवल यूक्रेन के मोर्चे पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपने प्रभाव में गिरावट देख रहा है। माली जैसे क्षेत्रों में भी रूस की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है। रूसी अर्थव्यवस्था और सैन्य संसाधन युद्ध के बढ़ते खर्च के कारण भारी दबाव में हैं। जहां यूक्रेन अब आक्रामक रुख अपनाते हुए क्रीमिया को पुनः प्राप्त करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, वहीं क्रेमलिन के सामने खुद को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।











