शेयर बाजार में महज एक साल के भीतर 130 से 1300 फीसदी तक का भारी रिटर्न देने वाली कंपनियों की हकीकत बेहद हैरान करने वाली है। जिन शेयरों की कीमत कुछ महीनों पहले 8 से 10 रुपये के बीच थी, वे अचानक 100 रुपये के पार पहुंच गए। इन कंपनियों के कामकाज की पड़ताल करने पर पता चला कि बाजार में तेजी से दौड़ रहे इन शेयरों के पीछे का आधार बेहद कमजोर है। इनमें से कई कंपनियों के दफ्तर कागजों पर ही मौजूद हैं, जबकि हकीकत में वहां वीरान जमीन या छोटी दुकानें चल रही हैं।
सप्तक केमिकल: दफ्तर की जगह बंद पड़ी फोटोकॉपी की दुकान
सप्तक केमिकल वह नाम है जिसने एक साल में निवेशकों के पैसे को 1300 गुना करने का दावा किया। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस डाकोर के मोहन चैंबर कॉम्प्लेक्स में है। जब वहां जाकर देखा गया, तो पता चला कि वहां कोई दफ्तर या फैक्ट्री नहीं है, बल्कि वहां 'चामुंडा जेरॉक्स' नाम की एक दुकान है, जो कि बंद पड़ी थी। दुकान के मालिक जिग्नेश भवसार के अनुसार, वहां कोई काम नहीं होता था और सरकारी जांच के डर से उन्होंने जगह खाली करवा ली थी। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी उत्पादन के कंपनी कैसे 1300 फीसदी का रिटर्न दे रही है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घटकर महज 12.5 फीसदी रह गई है, जबकि बाकी शेयर आम निवेशकों के पास हैं।
उमिया ट्यूब्स: फैक्ट्री की जगह पर उगी हैं झाड़ियां
साबरकांठा जिले के तालोद के पास तोरणिया गांव में उमिया ट्यूब्स का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट रजिस्टर्ड है। मौके पर पहुंचने पर वहां किसी भारी मशीनरी वाली फैक्ट्री के बजाय बंजर जमीन और कंटीली झाड़ियां दिखाई दीं। गांधीनगर के सेक्टर-11 में स्थित कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस का शटर भी ताला बंद था और वहां का एक हिस्सा किसी और को किराये पर दे दिया गया था। ढाई साल के भीतर प्रमोटर्स ने अपनी 46 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है और अब उनके पास केवल 4 फीसदी शेयर बचे हैं। ऐसे में 175 फीसदी का रिटर्न कैसे मिल रहा है, यह बड़ा सवाल है।
संगीनीता केमिकल्स: प्लांट बंद, दफ्तर में चुप्पी
गांधीनगर के छत्राल जीआईडीसी में स्थित संगीनीता केमिकल्स का प्लांट पिछले तीन महीनों से पूरी तरह बंद है। वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने पुष्टि की कि परिसर में कोई काम नहीं हो रहा है। इसके दफ्तर में भी कर्मचारी सवालों का जवाब देने के बजाय टालमटोल करते दिखे। कंपनी की तिमाही बिक्री में 29.36 फीसदी की गिरावट आई है और प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी 60 फीसदी से गिरकर 25 फीसदी रह गई है, इसके बावजूद शेयर लगातार ऊपर चढ़ रहा है।
एवीआई पॉलीमर्स: मकड़ी के जाले और बंद दरवाजे
अहमदाबाद के पॉश इलाके वस्त्रपुर के नालंदा कॉम्प्लेक्स में एवीआई पॉलीमर्स का दफ्तर रजिस्टर्ड है, जहां गेट पर मकड़ी के जाले लगे थे। पता चला कि कंपनी काफी समय पहले ही बंद हो चुकी है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी अब केवल 1 फीसदी बची है, लेकिन रिकॉर्ड में कंपनी का तिमाही लाभ 1283.78 फीसदी दिखाया गया है।
केस्टोरा एग्री: एक ही पते पर दो कंपनियों का बोर्ड
अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्थित निर्माण कॉम्प्लेक्स में केस्टोरा एग्री का ऑफिस है, जहां बाहर एक दूसरी कंपनी का बोर्ड लगा हुआ है। दफ्तर हमेशा बंद रहता है। कंपनी की तिमाही सेल्स वेरिएशन शून्य है, यानी कोई व्यापार नहीं हो रहा है, फिर भी शेयर का भाव लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी 26 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी है।
गुरुकृपा जेम्स: कामकाज तो है, लेकिन रिटर्न का तर्क क्या?
सूची में शामिल गुरुकृपा जेम्स एकमात्र कंपनी है जिसका दफ्तर चालू हालत में मिला, हालांकि अब इसे भक्ति ज्वेल्स के नाम से जाना जाता है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 40 फीसदी से गिरकर 9.76 फीसदी हो गई है और कंपनी के तिमाही मुनाफे में 84.66 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। फिर भी शेयर ने एक साल में 209.32 फीसदी का रिटर्न दिया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
आमतौर पर प्रमोटर्स अच्छी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, लेकिन यहां मामला उल्टा है। इन माइक्रो-कैप कंपनियों में ऑपरेटर्स का प्रभाव ज्यादा दिखता है। जो निवेशक 100 फीसदी से अधिक रिटर्न देखकर पैसा लगाते हैं, वे अक्सर 'डंपिंग' का शिकार हो जाते हैं। जब ऑपरेटर अपने शेयर ऊंचे दाम पर बेचकर निकल जाते हैं, तो आम निवेशकों का पैसा फंस जाता है। सेबी को भी इस असामान्य उछाल के बारे में सूचित किया गया है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।











