डोनाल्ड ट्रंप के अत्यंत करीबी सहयोगी और अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अचानक निधन ने वाशिंगटन से लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 11 जुलाई को यूक्रेन के दौरे से वापस लौटने के बाद, उसी रात उनकी तबीयत बिगड़ी और उनका देहांत हो गया। मरने से ठीक पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। 71 वर्षीय लिंडसे ग्राहम न केवल रूस और ईरान के कट्टर आलोचक थे, बल्कि उन्होंने भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की मांग भी मजबूती से रखी थी।
लिंडसे ग्राहम की मृत्यु का आधिकारिक कारण क्या है?
लिंडसे ग्राहम के कार्यालय के अनुसार, उनकी मौत 'संक्षिप्त और अचानक हुई बीमारी' के कारण हुई। हालांकि, 12 जुलाई को वॉशिंगटन डीसी मेडिकल एग्जामिनर कार्यालय ने प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी की, जिसमें मौत का कारण 'आर्टेरियोस्केलेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के कारण एओर्टिक डिसेक्शन' बताया गया है। सरल शब्दों में कहें तो, शरीर की सबसे बड़ी धमनी, यानी एओर्टा की आंतरिक परत में फटने से यह समस्या पैदा हुई। हृदय से शरीर के अन्य अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाने वाली इस मुख्य धमनी में समस्या होने से यह स्थिति बनी।
फिलहाल, उनका मृत्यु प्रमाण पत्र अभी जारी नहीं किया गया है। उनकी मौत के पीछे जहर दिए जाने की किसी भी संभावना की जांच के लिए टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को बताया कि मौत से कुछ घंटे पहले उनकी लिंडसे ग्राहम से बातचीत हुई थी, जिसमें उनकी आवाज सामान्य थी, लेकिन वे थोड़े थके हुए लग रहे थे।
ईरान और रूस का रुख
लिंडसे ग्राहम की मौत पर ईरान के मीडिया में जश्न जैसा माहौल है। मेहर न्यूज एजेंसी ने लिखा कि ग्राहम ईरान को नष्ट करने का अपना सपना अपने साथ कब्र में ले गए। ईरान के सरकारी चैनल आईआरआईएनएन (IRINN) ने उनके निधन पर बधाई संदेश तक प्रसारित किए। ग्राहम अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ईरान के कट्टर विरोधी रहे। 2015 में जब बराक ओबामा ने ईरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, तब ग्राहम ने इसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मांग की थी। 14 फरवरी 2026 को उन्होंने कहा था कि अयातुल्ला के जाने का समय आ गया है और उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से ईरान में शासन परिवर्तन को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बनाने का आग्रह किया था।
रूस के मामले में स्थिति अलग है। रूसी समाजशास्त्री इगोर ईडमैन ने दावा किया है कि रूसी खुफिया एजेंसियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यूक्रेन से लौटने के ठीक बाद यह मौत अत्यंत संदिग्ध है। ईडमैन के अनुसार, 10 जुलाई को कीव में लिंडसे ग्राहम ने यह खुलासा किया था कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए राजी कर लिया है। कीव यात्रा के दौरान 10 से 12 घंटे की ट्रेन यात्रा के दौरान जहर दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि पूर्व सीआईए अधिकारी माइकल सेलर्स का कहना है कि अभी हत्या का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, लेकिन जांच एजेंसियों को इस संभावना को खारिज नहीं करना चाहिए।
भारत के साथ तनावपूर्ण संबंध
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लिंडसे ग्राहम भारत के प्रति काफी मुखर हो गए थे, खासकर रूस से तेल खरीद को लेकर। 2009 में ही उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स में भारत और चीन जैसे देशों पर पर्यावरणीय मानकों को पूरा न करने के कारण सीमा कर लगाने की वकालत की थी। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद, उन्होंने अन्य अमेरिकी सांसदों के साथ मिलकर तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया था कि वे नरेंद्र मोदी से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने, प्रतिबंध हटाने और कश्मीर में बंद लोगों को रिहा करने के लिए कहें। जुलाई 2025 में उन्होंने भारत, चीन और ब्राजील को चेतावनी दी थी कि वे रूसी तेल खरीदना बंद करें, अन्यथा उनकी अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया जाएगा। उसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल आयात के कारण 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया था।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए कितना बड़ा झटका?
डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ग्राहम को सच्चा अमेरिकी देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा खलेगी। यह निधन डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक बाधा है, क्योंकि वे साउथ कैरोलिना से अपना पांचवां कार्यकाल शुरू करने की तैयारी में थे। अब रिपब्लिकन पार्टी को 11 अगस्त तक एक नया उम्मीदवार चुनना होगा। इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट में लिंडसे ग्राहम की सीट खाली होने से रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत और कम हो गया है। सीनेटर मिच मैककोनेल के बीमार होने के कारण डोनाल्ड ट्रंप की प्रभावी बहुमत और भी कमजोर हो गई है, जिससे अहम बिलों को पारित कराना कठिन हो गया है।











