अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित ऐतिहासिक मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आगामी 29 अगस्त को 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' नामक एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस विशाल आयोजन का मुख्य ध्येय दुनिया भर में बढ़ते वैचारिक मतभेदों, सामाजिक ध्रुवीकरण और सांस्कृतिक टकराव के दौर में विभिन्न समुदायों को एक साझा लोकतांत्रिक मंच पर लाकर संवाद स्थापित करना है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 'अमेरिकन हिंदूस फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' द्वारा किया जा रहा है, जिसमें 'हिंदू स्वयंसेवक संघ' (HSS) जैसी सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएं सहयोगी की भूमिका निभा रही हैं। गौरतलब है कि HSS के वैश्विक समन्वयक सौमित्र गोखले ने इससे पहले अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में वर्ष 2019 के दौरान बहुचर्चित 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का संयोजन किया था, जिसमें लगभग 50,000 लोगों की ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस बार न्यूयॉर्क में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। यद्यपि उनकी उपस्थिति को लेकर अमेरिका में सक्रिय कुछ सामाजिक और मानवाधिकार समूहों द्वारा विरोध जताया जा रहा है, लेकिन आयोजकों ने लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए विरोध दर्ज कराने वाले सभी पक्षों को भी खुले मंच पर आकर संवाद करने का निमंत्रण दिया है।
ग्लोबल संवाद और वसुधैव कुटुंबकम की मूल अवधारणा
विश्व स्तर पर गहराती राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक दूरियों के बीच यह आयोजन एक सकारात्मक पुल का निर्माण करने का प्रयास है। कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए 'अमेरिकन हिंदूस फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' के निदेशक सुदेश अग्रवाल और संस्था की प्रवक्ता प्रिया सामंत ने बताया कि वैश्विक स्तर पर तनाव और विभाजन की स्थितियां अभूतपूर्व रूप से बढ़ी हैं। ऐसी स्थिति में विभिन्न मान्यताओं, दर्शन और परंपराओं के अनुयायियों के लिए यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि वे आमने-सामने बैठकर संवाद करें और एक-दूसरे के दृष्टिकोण से सीखें। यह पूरा प्रयास भारत के प्राचीन दार्शनिक वाक्य 'वसुधैव कुटुंबकम' अर्थात 'समस्त संसार ही एक परिवार है' के आदर्श पर केंद्रित है। आयोजकों का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार किसी पारंपरिक परिवार के सदस्यों के बीच भिन्न विचार, मनमुटाव या असहमति हो सकती है, लेकिन उन भिन्नताओं के कारण परिवार का अस्तित्व या आपसी बंधन नष्ट नहीं होता, ठीक उसी प्रकार यह पूरी दुनिया भी एक वृहद मानव परिवार है। वैचारिक मतभेदों के बावजूद मानवीय मूल्यों और भ्रातृत्व को अक्षुण्ण रखा जा सकता है, और यह सम्मेलन इसी साझा मानवता को सशक्त मंच प्रदान करता है।
16 धर्मों की सहभागिता और 200 से अधिक संगठनों का पंजीकरण
आयोजक संगठन के नाम में 'अमेरिकन हिंदूस' शब्द जुड़े होने तथा मुख्य वक्ता के रूप में संघ प्रमुख को आमंत्रित किए जाने के कारण कुछ हलकों में यह धारणा बनी थी कि यह केवल हिंदू समुदाय का एक क्षेत्रीय कार्यक्रम है। हालांकि, आयोजकों ने इस अवधारणा को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' का स्वरूप किसी एक धर्म या जाति तक सीमित न होकर पूर्णतः समावेशी है। यह कार्यक्रम किसी भी पंथ, विचारधारा या पृष्ठभूमि के व्यक्तियों और संगठनों के लिए समान रूप से खुला है। इसके लिए अधिकृत वेबसाइट के जरिए खुला पंजीकरण शुरू किया गया था, जिसके माध्यम से अब तक विश्व भर के 200 से अधिक संगठनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस पंजीकरण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें 16 अलग-अलग धर्मों और धार्मिक धाराओं से जुड़े प्रतिनिधि संगठन शामिल हैं। यह व्यापक भागीदारी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यह मंच किसी संकीर्ण दायरे में बंधने के बजाय सार्वभौमिक भ्रातृत्व और अंतर-धार्मिक संवाद की वकालत करता है।
मुख्य अतिथि मोहन भागवत और शताब्दि-पुराने संगठन का अनुभव
RSS प्रमुख मोहन भागवत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के औचित्य को रेखांकित करते हुए सुदेश अग्रवाल और प्रिया सामंत ने कहा कि वे एक शताब्दी पुरानी विशाल सामाजिक संस्था के प्रमुख हैं। उनके पास जमीनी स्तर के सामुदायिक विकास, सामाजिक मुद्दों और व्यापक मानवीय सरोकारों का वृहद अनुभव है। आयोजन के दिन उनके मुख्य संबोधन में यही व्यापक दृष्टिकोण और जमीनी अनुभव मुख्य रूप से उभरकर सामने आएगा। आयोजकों का उद्देश्य इस कार्यक्रम को केवल अमेरिका या विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि दुनिया भर के अन्य सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक समूहों को भी इस संवाद प्रक्रिया से जोड़ना है। इसके साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के लिए यह भी एक सीखने का सुअवसर होगा कि एक शत-वर्षीय और विश्व के सबसे बड़े जन-संगठनों में से एक का संचालन किस कुशलता और अनुशासन के साथ किया जाता है।
रक्षाबंधन का शुभ अवसर और भारतीय डायस्पोरा की भूमिका
आयोजन की तिथि के चयन के संदर्भ में सुदेश अग्रवाल और प्रिया सामंत ने बताया कि इसके लिए रक्षाबंधन के पावन पर्व की समयावधि को विशेष रूप से चुना गया है। रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आपसी सुरक्षा, सामाजिक समरसता और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है। इस अवसर पर मोहन भागवत वैश्विक शांति, सद्भाव और सार्वभौमिक बंधुत्व का संदेश देंगे। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने भारत के प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र और सामाजिक वर्ग से गहरा संवाद स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधियों तथा मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बौद्धिकों के साथ निरंतर चर्चा की है। सम्मेलन के दौरान विदेशों में निवास कर रहे भारतीय मूल के नागरिकों (डायस्पोरा) के सामने मौजूद समकालीन चुनौतियों पर भी विचार विमर्श किया जाएगा। यदि रक्षाबंधन और सामुदायिक सुरक्षा के इस संदर्भ में पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति पर सवाल उठाए जाते हैं, तो उस विषय पर भी मंच पर सकारात्मक चर्चा संभव है।
संस्था का गठन और अमेरिका में भ्रांतियों का निवारण
'अमेरिकन हिंदूस फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' के गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर बात करते हुए आयोजकों ने बताया कि अमेरिका में हिंदू समुदाय का इतिहास काफी पुराना रहा है और वहां की अर्थव्यवस्था, विज्ञान, शिक्षा तथा सामाजिक प्रगति में इस समुदाय का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बावजूद, अमेरिकी मुख्यधारा के मीडिया, शिक्षाविदों और सामान्य नागरिकों के बीच हिंदू धर्म, इसकी मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और पूर्वाग्रह विद्यमान रहे हैं। इन भ्रमों को समाप्त करने के लिए किसी मध्यस्थ के बिना सीधे संवाद की अत्यंत आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लंबे विचार-विमर्श और तैयारियों के बाद वर्ष 2025 में इस संस्था को औपचारिक रूप से स्थापित किया गया, ताकि अमेरिकी मीडिया, अकादमिक जगत और आम अमेरिकियों तक सटीक और प्रमाणिक जानकारी सीधे पहुंचाई जा सके।
विरोध प्रदर्शन, स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक स्वीकृतियां
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और इस कार्यक्रम को लेकर कुछ अमेरिकी तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। विरोध करने वाले प्रमुख समूहों में 'USCIRF' (अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग), 'सवेरा' और 'हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स' शामिल हैं। इसके अलावा न्यू यॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने भी इस यात्रा पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है। इन विरोधों पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोजकों ने कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद और विरोध करने की स्वतंत्रता हर नागरिक को हासिल है। यही लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस आयोजन को और अधिक अर्थपूर्ण बनाती है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि जो संगठन या व्यक्ति इस आयोजन के उद्देश्यों या मुख्य अतिथि के विचारों से सहमत नहीं हैं, उन्हें भी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कराना चाहिए और मंच पर आकर अपने विचार रखने चाहिए, क्योंकि यह एक निष्पक्ष और खुला मंच है।
USCIRF की भूमिका, सवेरा की रिपोर्ट और कानूनी अनुमतियां
विरोध कर रहे संगठनों की विधिक स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए आयोजकों ने बताया कि 'USCIRF' अमेरिकी संघीय सरकार की केवल एक परामर्शदात्री संस्था है, जो अपनी नीतियां या सिफारिशें प्रस्तुत कर सकती है, परंतु उसके पास कोई कार्यकारी शक्तियां या प्रशासनिक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होता। वहीं 'सवेरा' संगठन द्वारा जारी की गई विरोध रिपोर्ट और RSS के कथित एजेंडे से जुड़े सवालों पर आयोजकों ने कहा कि वे केवल अपनी संस्था और इस विशिष्ट आयोजन के संदर्भ में उत्तर देने के लिए अधिकृत हैं, जबकि RSS से संबंधित किसी भी सवाल के लिए सीधे संघ के अधिकृत प्रतिनिधियों से संपर्क किया जाना चाहिए। वहीं, न्यू यॉर्क में अनुमति प्राप्त करने के विषय पर उन्होंने बताया कि अमेरिका जैसे देश में सख्त नियमों के तहत किसी भी बड़े सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम के लिए औपचारिक अनुमतियां अनिवार्य होती हैं। यह एक निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम है जिसके लिए निर्धारित सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को विधिवत पूरा किया गया है, जिसके पश्चात ही मैडिसन स्क्वायर गार्डन में न्यूनतम 5,000 लोगों की क्षमता वाले इस ऐतिहासिक सम्मेलन की अनुमति मिली है। आयोजकों ने यह भी साफ किया कि वर्तमान में यह आयोजन केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में ही हो रहा है।



















