डोनाल्ड ट्रंप को खत्म करने के लिए ईरान ने एक नई योजना तैयार की है। यह खुफिया जानकारी इजरायल द्वारा अमेरिका को साझा किए जाने की बात सामने आई है। इस दावे के सामने आने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपना रुख काफी सख्त कर लिया है और वहां के नेताओं को 'गंदा' और 'दुष्ट' करार दिया है। 7-8 जुलाई की रात को अमेरिका ने ईरान में 80 से अधिक स्थानों पर हवाई हमले किए थे।
क्या ईरान वाकई कोई साजिश रच रहा है?
9 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इजरायल ने अमेरिका को डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कथित ईरानी साजिश के बारे में आगाह किया था। बाद में अन्य अंतरराष्ट्रीय खबरों के अनुसार यह खुफिया इनपुट उसी सप्ताह की शुरुआत में साझा किए गए थे। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों के पास डोनाल्ड ट्रंप के लिए संभावित खतरों की जानकारी पहले से मौजूद थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इजरायल की चेतावनी एक विशिष्ट ईरानी साजिश से जुड़ी थी।
हवाई हमलों का आधार क्या है?
इस खुफिया जानकारी और अमेरिका द्वारा किए गए ताजा हमलों के बीच कोई सीधा संबंध आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं है, लेकिन तीन बड़ी घटनाएं ध्यान खींचती हैं। 7 जुलाई को तुर्की में रहते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि ईरान के साथ शांति प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है और उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कटु शब्दों में संबोधित किया। जबकि इससे पहले वे उन्हें 'बुद्धिमान' वार्ताकार कहा करते थे। डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं दावा किया कि वे ईरानी हत्यारों की सूची में सबसे ऊपर हैं। 8 जुलाई को अमेरिकी सेना ने ईरान में 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें खत्म करने की कोशिश हो रही है और उनका नाम हर लिस्ट में है। 9 जुलाई को उन्होंने दोहराया कि वे हत्या की सूची में शीर्ष पर हैं। इसी दिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की।
इजरायल की क्या भूमिका है?
पिछले दो वर्षों में ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हर बड़े हमले से पहले इजरायल ने वाशिंगटन के साथ खुफिया जानकारी साझा की है। जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला किया, तो इजरायल ने डोनाल्ड ट्रंप को आश्वस्त किया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। 11 फरवरी को बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई थी, जहां नेतन्याहू ने एक घंटे के प्रेजेंटेशन के जरिए ईरान पर हमले के फायदे गिनाए थे। शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप अनिच्छुक थे, लेकिन अंततः वे इस सैन्य विकल्प पर सहमत हुए।
युद्ध की भारी आर्थिक कीमत
आलोचकों का कहना है कि इजरायल के मार्गदर्शन पर चलने के कारण अमेरिका को सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, केवल पहले छह दिनों में अमेरिका ने 11.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 97,000 करोड़ रुपये) खर्च किए और युद्ध का कुल खर्च 10 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं। पेंटागन के रिकॉर्ड में 42 विमानों का नुकसान दर्ज है, जिसमें चार F-15E लड़ाकू जेट और 30 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा कतर में स्थित FP132 रडार प्रणाली और THAAD व पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को भी नुकसान हुआ है। इन हालातों के बीच जनवरी में 52% से शुरू हुई डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 10 जुलाई तक 39% पर आ गई है।
खतरों का लंबा इतिहास
ईरान द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के प्रति धमकी कोई नई बात नहीं है, खासकर 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ये घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं। जनवरी 2022 में अयातुल्ला अली खामेनेई की वेबसाइट पर ट्रंप को निशाना बनाने वाला एक वीडियो दिखाया गया था। 13 जुलाई 2024 को पेंसिल्वेनिया में एक रैली के दौरान थॉमस मैथ्यू क्रुक्स ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे वे बाल-बाल बचे। इसके बाद आसिफ मर्चेंट की गिरफ्तारी और नवंबर 2024 में फरहाद शाकेरी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करना इस कड़ी के ही हिस्से माने जाते हैं। जून 2025 में ईरानी मौलवियों द्वारा फतवा जारी करना और जुलाई 2025 में 'ब्लड पैक्ट' जैसे अभियानों ने इस तनाव को और बढ़ाया है, हालांकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सरकारी स्तर पर खुद को इन अभियानों से दूर रखा है।











