जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा अभियान चलाया है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और जब्ती की कार्रवाई की गई है। इस बड़े पैमाने पर चले एंटी-ड्रग्स ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने कुल 1,711 किलोग्राम नशीले पदार्थों को अपनी गिरफ्त में लिया है। पुलिस प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए घाटी के विभिन्न इलाकों में सुनियोजित तरीके से छापे मारे गए और तलाशी अभियान संचालित किए गए।
अवैध संपत्तियों और वित्तीय नेटवर्क पर करारा प्रहार
ड्रग्स के अवैध कारोबार से खड़ी की गई काली कमाई पर भी पुलिस ने कड़ा प्रहार किया है। इस ऑपरेशन के सिलसिले में 1.10 करोड़ रुपये की नकदी सीधे तौर पर बरामद की गई है। इसके अलावा, गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े कुल 567 बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें 1.71 करोड़ रुपये की राशि जमा थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मादक पदार्थों की इस अवैध बिक्री से आने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क के भूमिगत कार्यकर्ताओं यानी अंडरग्राउंड वर्कर्स की फंडिंग के लिए किया जा रहा था। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सरगना, चाहे वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय हों या फिर सीमा पार से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हों, इस गंदे मुनाफे का इस्तेमाल समाज विरोधी ताकतों को पोषित करने में करते थे।
फसलों का विनाश और संपत्ति जब्ती
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए कश्मीर घाटी के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 2,116 स्थानों पर उगाई जा रही अवैध फसलों को नेस्तनाबूद कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 2,111 कनाल भूमि पर फैली नशीली फसलों को पूरी तरह से नष्ट किया गया है। मादक पदार्थों के अवैध नेटवर्क को तोड़ने के इस अभियान के तहत कुल 1,941 लोगों को पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया है। साथ ही, अपराधियों द्वारा गैरकानूनी तरीके से अर्जित की गई 154 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति को भी जब्त किया गया है। इस सिलसिले में कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 1,500 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले श्रीनगर शहर में भी मादक पदार्थों के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया गया था, जिसमें कुल 8 लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली थी।
साइबर धोखाधड़ी पर कड़ा प्रहार
मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही मुहिम के साथ-साथ पुलिस ने साइबर अपराधों के मामलों में भी एक बड़ी सफलता हासिल की है। हाल के महीनों में साइबर ठगी से जुड़ी अनगिनत शिकायतों की गहन जांच के बाद 54 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का पता लगाया गया है। इस रडार पर आए मामलों में से लगभग 13 से 14 प्रतिशत रकम को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया गया है, जिसमें से 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे तौर पर ठगी के शिकार हुए पीड़ितों के खातों में वापस लौटाई जा चुकी है। इस सिलसिले में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तक 93 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए संदिग्ध खाते भी शामिल हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अक्सर स्थानीय युवाओं और विदेशी संपर्कों का जाल बुनकर बुजुर्गों और समाज के कमजोर वर्गों को अपना आसान निशाना बना रहे हैं।
सार्वजनिक अपील और सुरक्षा का भरोसा
प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नशीले पदार्थों और साइबर अपराध के इस दलदल से मुकाबला करने के लिए आम नागरिकों और विशेषकर युवाओं को आगे आना होगा। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि गुप्त सूचना देने वाले मुखबिरों की पहचान को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा न हो। जो भी व्यक्ति इस समस्या से निपटने में मदद करना चाहता है, वह बिना किसी संकोच के पुलिस स्टेशन या नजदीकी रिहैबिलिटेशन सेंटर से संपर्क कर सकता है, जहां उनकी गोपनीयता और सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाएगी। इसके अलावा, जो लोग पहले से ही नशे की लत के शिकार हैं, उन्हें यह सलाह दी गई है कि वे चुपचाप अपनी तकलीफ सहने के बजाय चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र की मदद लें क्योंकि युवा ही समाज का भविष्य तय करते हैं। साथ ही, युवाओं को 'म्यूल बैंक अकाउंट' जैसे वित्तीय जाल बिछाने वाले संगठित गिरोहों का हिस्सा बनने से भी आगाह किया गया है।



















