छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में हाल ही में आई भयंकर बाढ़ के कारण हजारों किसानों की धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। फसल के भारी नुकसान के बाद से अन्नदाता लगातार प्रशासनिक मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसानों ने बड़ा कदम उठाते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
हजारों ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरे किसान
इस विरोध प्रदर्शन में करीब 10,000 किसान 200 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ शामिल हुए, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई। किसानों की मुख्य मांग है कि बाढ़ के कारण नष्ट हुई धान की फसल के एवज में उन्हें प्रति एकड़ 65,100 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, बाढ़ की वजह से जिन लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाए और सभी प्रभावित किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए।
प्रशासन पर अनदेखी का गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर इससे पहले भी तीन बार प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन सरकार और स्थानीय प्रशासन ने उनकी सुधि नहीं ली। किसानों ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनकी सभी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
किसानों ने सुनाई अपनी बर्बादी की दास्तान
बस्तर ब्लॉक के मेरलेंगा निवासी फगुनु कश्यप ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने तीन एकड़ जमीन पर धान की खेती की थी, जिस पर लगभग 35,000 रुपये की लागत आई थी। लगातार एक सप्ताह तक बाढ़ के पानी में डूबे रहने के कारण उनकी पूरी फसल सड़ गई और नष्ट हो गई। वहीं, उसरी गांव के रहने वाले रथी राम कश्यप ने बताया कि उनके पास छह एकड़ में धान की फसल थी, जो पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। खेतों में पांच प्रतिशत भी धान सुरक्षित नहीं बचा है और जो थोड़ा बहुत हाथ लग रहा है, वह भी पूरी तरह सड़ चुका है।
भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन के रमेश गोयल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इंद्रावती नदी में आई बाढ़ की वजह से किसानों की शत-प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन लगातार किसानों की अनदेखी कर रहा है, जिसके चलते अल्टीमेटम अवधि पूरी होने के बाद आज 10,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।



















