जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान को उस वक्त एक बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाकर 13 देश-विरोधी तत्वों को दबोच लिया। इनमें 5 ऐसे हाइब्रिड आतंकी भी शामिल हैं, जिनका नाम पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों की किसी भी वॉन्टेड लिस्ट में दर्ज नहीं था। खुफिया एजेंसियों से मिले ठोस इनपुट के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और CRPF की संयुक्त टीमों ने पिछले 90 घंटों के दौरान शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और बारामूला जिले के सोपोर इलाके में यह कार्रवाई की। इस दौरान आतंकियों के कब्जे से एक AK राइफल, मैगजीन, 10 हैंड ग्रेनेड, 100 से अधिक कारतूस, पिस्तौल, 1 IED और देश-विरोधी पोस्टर व दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इस समय पूरी घाटी में रेड अलर्ट जैसी सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी नापाक साजिश को अंजाम देने से पहले ही नाकाम किया जा सके।
खुफिया जानकारी और 90 घंटे का सघन तलाशी अभियान
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की नींव खुफिया एजेंसियों द्वारा इंटरसेप्ट की गई उन जानकारियों पर टिकी थी, जिनमें घाटी के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ था। इनपुट्स से संकेत मिले थे कि सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं ने अपने स्थानीय गुर्गों को कश्मीर में टारगेट किलिंग और सुरक्षाबलों के ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों का निर्देश दिया था। इस जानकारी के सामने आते ही सुरक्षाबलों ने बिना समय गंवाए रणनीति बनाई और नियंत्रण रेखा (LoC) से लेकर शहरी इलाकों, ग्रामीण इलाकों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी का दायरा बढ़ा दिया।
पिछले 90 घंटों के दौरान सुरक्षाबलों ने चौबीसों घंटे चौकसी बरतते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की, अचानक तलाशी अभियान शुरू किए और जगह-जगह मोबाइल चेकिंग प्वाइंट स्थापित किए। इंटरसेप्ट की गई बातचीत से यह भी स्पष्ट हुआ कि आतंकी आका जानबूझकर ऐसे युवाओं का इस्तेमाल करना चाहते थे जिनका कोई आपराधिक या आतंकी बैकग्राउंड न हो। इस रणनीति के तहत कट्टरपंथी सोच से प्रभावित हाइब्रिड तत्वों को आगे किया जा रहा था ताकि हमले को अंजाम देने के बाद वे आसानी से कानून की गिरफ्त से बच सकें। हालांकि, सुरक्षाबलों की समय पर की गई समन्वित कार्रवाई ने इस बहुस्तरीय साजिश को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।
कौन होते हैं हाइब्रिड आतंकी और सुरक्षाबलों के लिए क्यों हैं बड़ी चुनौती?
घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के सामने आ रही चुनौतियों में हाइब्रिड आतंकियों का मॉडल बेहद संवेदनशील माना जाता है। हाइब्रिड आतंकी वास्तव में वे लोग होते हैं जो समाज में बिल्कुल सामान्य नागरिकों की तरह जीवन व्यतीत करते हैं। वे छात्र, दिहाड़ी मजदूर, दुकानदार या छोटे कर्मचारी हो सकते हैं और उनका नाम पुलिस या सुरक्षा बलों के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होता। इस वजह से शुरुआती स्तर पर उन पर शक करना लगभग नामुमकिन होता है।
ये लोग आतंकी आकाओं द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेले जाते हैं। इन्हें बहुत सीमित या रिमोट ट्रेनिंग दी जाती है। जब भी आकाओं से कोई विशिष्ट निर्देश मिलता है, तो ये किसी लक्षित व्यक्ति पर पिस्तौल से गोली चलाने या सुरक्षाबलों पर हैंड ग्रेनेड फेंकने जैसी वारदात को अंजाम देते हैं। हमला करने के तुरंत बाद ये अपने हथियार छुपा देते हैं या फेंक देते हैं और वापस सामान्य नागरिक जीवन में शामिल हो जाते हैं। फुल-टाइम आतंकियों की तुलना में इस प्रकार के 'लो-सिग्नेचर मॉडल' को ट्रैक करना और पहचानना बेहद कठिन होता है।
सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े ULC जैसे संगठन इन युवाओं का इस्तेमाल स्टैंडबाय मोड पर रखते हुए करते हैं। श्रीनगर के व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और मुख्य राजमार्गों पर चौकसी इसीलिए बढ़ाई गई है ताकि हाइब्रिड आतंकी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। गौरतलब है कि इससे पहले भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से चलाई जा रही आतंकी साजिशों की जांच के सिलसिले में 10 अलग-अलग स्थानों पर व्यापक छापेमारी की थी।
कुलगाम में 5 हाइब्रिड आतंकी गिरफ्तार: नामों और बरामदगी का ब्योरा
इस बहुआयामी अभियान के दौरान सबसे बड़ी सफलता दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में मिली। कुलगाम पुलिस, 9 राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की 18वीं बटालियन की एक संयुक्त टीम ने एक सटीक इनपुट के आधार पर घेराबंदी की और 5 हाइब्रिड आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सभी आरोपी कम उम्र के युवा हैं और उनका कोई पुराना पुलिस रिकॉर्ड नहीं था।
सुरक्षाबलों द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए हाइब्रिड आतंकियों की पहचान इस प्रकार हुई है
- फरहान अहमद वानी: उम्र 22 वर्ष
- सोहैब अहमद पाला: उम्र 20 वर्ष
- सलमान अब्बास लोन: उम्र 20 वर्ष
- निदाश अहमद रेशी: उम्र 22 वर्ष
- फैजल अकबर: उम्र 30 वर्ष
इन पांचों आरोपियों के पास से सुरक्षाबलों ने चार 9mm पिस्तौल, चार पिस्तौल मैगजीन, 22 राउंड जिंदा कारतूस और 2 हैंड ग्रेनेड बरामद किए। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इन पांचों को किसी बड़े लक्षित हमले को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया था। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां इनसे गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और हथियारों के स्रोत का पता लगाया जा सके।
शोपियां में दो अलग-अलग नाकों पर बड़ी कामयाबी: 6 सहयोगी दबोचे गए
दक्षिण कश्मीर के ही शोपियां जिले में सुरक्षाबलों ने दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कुल 6 आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पहली कार्रवाई शोपियां पुलिस की एक गश्ती टीम द्वारा की गई, जिसने एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को रोका। मोटरसाइकिल पर कुलगाम के रहने वाले तीन युवक सवार थे।
जब उनकी तलाशी ली गई तो उनके पास से 2 जिंदा हैंड ग्रेनेड और आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े भड़काऊ देश-विरोधी पोस्टर बरामद हुए। पकड़े गए तीनों आरोपियों की पहचान जुनैद मुजफ्फर डार, आमिर यूसुफ और जुनैद बशीर डार के रूप में की गई है। ये सभी कुलगाम जिले के निवासी हैं और शोपियां क्षेत्र में किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने की फिराक में थे।
इसके तुरंत बाद, शोपियां जिले में स्थापित एक अन्य विशेष जांच चौकी पर शोपियां पुलिस, 34 राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की 178वीं बटालियन की संयुक्त टीम ने तीन अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। ये तीनों अनंतनाग जिले के रहने वाले हैं और इनकी पहचान हारिस मंजूर, आशिक हुसैन और आरिफ अहमद कुमार के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 1 हैंड ग्रेनेड, 2 AK-47 मैगजीन, 20 राउंड जिंदा कारतूस, आपत्तिजनक पोस्टर और मोबाइल फोन जब्त किए गए। पुलिस इन मोबाइलों के कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की भी फॉरेंसिक जांच कर रही है।
पुलवामा के जंगलों से बाहर निकले संदिग्ध: पिस्तौल और ग्रेनेड बरामद
सुरक्षाबलों को एक और महत्वपूर्ण सफलता पुलवामा जिले में मिली। खुफिया इनपुट मिला था कि कुछ संदिग्ध तत्व जंगल के रास्ते से मैदानी इलाके में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद पुलवामा पुलिस, 44 राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की 183वीं बटालियन ने इलाके की घेराबंदी की और कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) चलाया।
ऑपरेशन के दौरान जवानों ने जंगल के किनारे से संदिग्ध परिस्थितियों में बाहर आ रहे दो व्यक्तियों को घेराबंदी कर रोक लिया। पूछताछ और तलाशी लेने पर उनके पास से एक पिस्तौल, पिस्तौल के 12 जिंदा कारतूस और 1 हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लतीफ अहमद दीदार और एजाज अहमद बाजाद के रूप में हुई है। अधिकारियों का मानना है कि ये दोनों किसी गुप्त ठिकाने से हथियार लेकर निकल रहे थे और इनका इस्तेमाल किसी नए हमले में किया जाना था।
सोपोर (बारामूला) में हथियारों और युद्ध सामग्री का बड़ा जखीरा मिला
दक्षिण कश्मीर के अलावा उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर क्षेत्र में भी सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी। भारतीय सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त दल ने पक्की जानकारी मिलने के बाद सोपोर के एक चिन्हित इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।
इस सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकी ठिकाने से हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। जब्त किए गए सामान में एक AK-सीरीज की राइफल, तीन मैगजीन, 4 हैंड ग्रेनेड, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और युद्ध में इस्तेमाल होने वाली अन्य सैन्य सामग्रियां शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि सोपोर में हुई इस बरामदगी से उत्तरी कश्मीर में आतंकियों द्वारा की जा रही किसी बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।
घाटी में आतंकवाद के खात्मे के लिए निरंतर जारी रहेगी कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए सभी 13 व्यक्तियों और बरामद हथियारों के तार आपस में कहां जुड़ते हैं, इसकी व्यापक जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि सीमा पार से इन समूहों को कौन नियंत्रित कर रहा था और किस प्रकार वित्तीय व लॉजिस्टिक्स सहायता पहुंचाई जा रही थी।
अधिकारियों ने बताया कि यह 90 घंटे का अभियान कोई अलग-थलग कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह घाटी में आतंकियों के नेटवर्क, उनके छिपने के ठिकानों, हथियारों के भंडारों और स्थानीय समर्थन तंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे एक निरंतर और व्यापक अभियान का हिस्सा है। आने वाले दिनों में भी नियंत्रण रेखा से लेकर अंदरूनी इलाकों और हाईवे पर कड़ा पहरा जारी रहेगा और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी।




















