चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतामेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधराजस्थान में बदला मौसम का मिजाज, अर्नब तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से झमाझम बारिशअलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रत1 नवंबर से चमक जाएगी इन 6 राशियों की किस्मत, मंगल, सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बरसाएंगे विशेष कृपाकर्नाटक में बस यात्रा जल्द हो सकती है महंगी, 4 नवंबर को हो सकता है किराए में बढ़ोतरी का ऐलानऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामनेहमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिसपश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर वापस भेजा जाएगा, शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुखअमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षता
भरतपुर में सावन के मौके पर गुड़ वाले घेवर की भारी मांग, चीनी की जगह देसी चाशनी से बदला जायकाखानपान
27 अग॰ 2026, 11:53 pm (63 दिन पहले)· 4

भरतपुर में सावन के मौके पर गुड़ वाले घेवर की भारी मांग, चीनी की जगह देसी चाशनी से बदला जायका

सावन का महीना शुरू होते ही भरतपुर के बाजारों में गुड़ से बने खास घेवर की मांग तेजी से बढ़ी है। रिफाइंड चीनी के बजाय गुड़ की चाशनी से तैयार यह पारंपरिक मिठाई अपनी सोंधी खुशबू और अलग जायके के कारण लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही बाजारों में मिठाइयों की रौनक बढ़ गई है, और इस बार राजस्थान के भरतपुर जिले में घेवर का एक अनोखा रूप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। त्योहारों के इस मौसम में घेवर की मांग हर तरफ देखी जा रही है, लेकिन भरतपुर के बाजारों में चीनी के बजाय गुड़ से तैयार किया गया विशेष घेवर सबसे ज्यादा चर्चा में है। पारंपरिक स्वाद में एक नया प्रयोग करते हुए तैयार की गई यह मिठाई अपनी खास मिठास और सोंधेपन की वजह से स्थानीय खरीदारों और मिठाई प्रेमियों की पहली पसंद बनती जा रही है।

पारंपरिक तैयारी और गुड़ की चाशनी का अनूठा तरीका

भरतपुर में हलवाइयों और कारीगरों द्वारा इस विशेष गुड़ वाले घेवर को बनाने के लिए एक खास प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बुनियादी स्तर पर इसे तैयार करने की विधि पारंपरिक घेवर जैसी ही रखी गई है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण मैदा और शुद्ध घी का मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है। कारीगर पहले मैदा और घी के घोल को तेज आंच पर तलकर पारंपरिक जालीदार घेवर का ढांचा तैयार करते हैं। असली बदलाव इसके बाद की प्रक्रिया में आता है, जहाँ आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली चीनी की रिफाइंड चाशनी की जगह पिघले हुए गुड़ की चाशनी का उपयोग किया जाता है।

ये भी पढ़ें

घेवर के अच्छी तरह सिक कर तैयार हो जाने के बाद, कारीगर उस पर गुड़ से बनी गाढ़ी और सुगंधित चाशनी को समान रूप से डालते हैं। गुड़ की यह चाशनी घेवर की हर परत और जाली के भीतर तक समा जाती है, जिससे इसमें गुड़ का प्राकृतिक स्वाद और सोंधापन आ जाता है। चाशनी डालने के बाद इसे आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जो देखने में भी काफी लुभावना लगता है। हलवाइयों के अनुसार, गुड़ की खास महक और इसका अनोखा स्वाद ही इस घेवर को सामान्य चीनी वाले घेवर से पूरी तरह अलग और खास पहचान दिलाता है।

सावन में घेवर का पारंपरिक और धार्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति और सावन के महीने में घेवर का एक गहरा धार्मिक और सामाजिक महत्व माना जाता है। इस पूरे महीने में रिश्तेदारों, बेटियों और परिचितों के घर मिठाई के रूप में घेवर भेजने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर भी घेवर की खपत काफी बढ़ जाती है। मांग में इस भारी बढ़ोतरी को देखते हुए भरतपुर के मिष्ठान विक्रेताओं ने ग्राहकों के लिए कई तरह की नई वैरायटी बाजार में उतारी हैं, जिनमें गुड़ वाला घेवर सबसे ज्यादा लोकप्रिय साबित हो रहा है।

स्वाद के साथ सेहत का विकल्प और जरूरी सावधानियां

गुड़ को आमतौर पर सफेद चीनी की तुलना में कम रिफाइंड और अधिक प्राकृतिक विकल्प माना जाता है। इसमें कुछ आवश्यक खनिज तत्व भी पाए जाते हैं, जिसके कारण लोग इसे चीनी से बेहतर विकल्प के रूप में देखते हैं। इसी वजह से जो लोग कम रिफाइंड मीठा पसंद करते हैं, उनके लिए यह गुड़ वाला घेवर एक नया और बढ़िया विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खाद्य जानकारों का मानना है कि गुड़ से बना होने के बावजूद घेवर एक भारी और कैलोरी से भरपूर मिठाई ही है। इसलिए स्वाद और परंपरा का आनंद लेते हुए इसे सीमित मात्रा में खाना ही सेहत के लिहाज से सही रहता है। फिलहाल, भरतपुर का यह खास गुड़ घेवर स्वाद, सेहत के प्रति जागरूकता और सावन की परंपराओं का एक बेहतरीन संगम पेश कर रहा है।

सवाल-जवाब

भरतपुर के इस नए घेवर में चीनी की जगह क्या इस्तेमाल किया जा रहा है?
इस घेवर में सामान्य चीनी की रिफाइंड चाशनी की जगह पिघले हुए गुड़ की चाशनी का उपयोग किया जा रहा है।
गुड़ वाला घेवर बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक घेवर से कैसे अलग है?
बेस घेवर को मैदा और घी से पारंपरिक तरीके से ही बनाया जाता है, लेकिन बाद में उस पर चीनी की चाशनी के बजाय गुड़ से बनी गाढ़ी चाशनी डाली जाती है।
सावन के महीने में घेवर की मांग क्यों बढ़ जाती है?
सावन के दौरान घेवर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, और लोग इसे रक्षाबंधन व तीज जैसे त्योहारों पर रिश्तेदारों को भेजने तथा खुद खाने के लिए खरीदते हैं।
क्या गुड़ वाला घेवर स्वास्थ्य के लिए चीनी वाले घेवर से बेहतर है?
गुड़ कम रिफाइंड होता है और इसमें कुछ खनिज तत्व होते हैं, लेकिन चूंकि यह एक भारी मिठाई है, इसलिए इसे भी सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp