नेपाल तथा भारत-चीन सीमा से सटे तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ और भयावह भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण सैकड़ों भारतीय नागरिक सीमावर्ती क्षेत्रों में फंस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नेपाल के अलग-अलग दुर्गम हिस्सों में फिलहाल लगभग 290 भारतीय नागरिकों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र में भी लगभग 200 भारतीय फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय दोनों पड़ोसी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों, स्थानीय प्रशासन और टूर ऑपरेटरों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है।
नेपाल में संपर्क से बाहर 290 भारतीयों का विवरण
नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों का पता लगाने के लिए भारतीय मिशन हर संभव कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, संपर्क से बाहर हुए 290 नागरिकों को मुख्य रूप से पांच अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है। अधिकारियों की प्राथमिक चुनौती इन सभी समूहों के सटीक स्थान की पुष्टि करना है ताकि राहत सामग्री पहुंचाई जा सके और उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।
इनमें पहला प्रमुख समूह बुनियादी ढांचा परियोजना से जुड़ा हुआ है। त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट में कुल 73 भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। राहत की बात यह है कि इस परियोजना के प्रमुख से भारतीय अधिकारियों का संपर्क लगातार बना हुआ है। वहां तैनात सभी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
इसके अलावा तमिलनाडु राज्य से नेपाल यात्रा पर गए दो अलग-अलग दल भी वर्तमान में संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इन दो समूहों में क्रमशः 37 और 49 नागरिक शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या 86 होती है। ये सभी नागरिक निजी ट्रैवल एजेंसियों 'सम्राट ट्रैवल्स' और 'फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स' के माध्यम से नेपाल की यात्रा पर निकले थे। स्थानीय स्तर पर इन दोनों ट्रैवल एजेंसियों के प्रतिनिधियों से संपर्क साधकर यात्रियों की अंतिम लोकेशन का पता लगाया जा रहा है।
पूर्वी और दक्षिणी राज्यों के अन्य समूह भी इस प्राकृतिक आपदा के चलते विभिन्न स्थानों पर अटके हुए हैं। पश्चिम बंगाल से गए 32 नागरिकों का एक दल 'सम्राट ट्रैवल्स' के जरिए रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में गया था, जिनसे बाढ़ के बाद से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार, देश के विभिन्न राज्यों के 61 नागरिकों का एक संयुक्त दल 'रिचा टूर्स' एजेंसी के माध्यम से क्योंग क्षेत्र की ओर गया था और वह भी पूरी तरह संपर्क से बाहर है। इसके साथ ही केरल राज्य से नेपाल पहुंचे 33 भारतीय नागरिकों से भी फिलहाल कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। इन सभी क्षेत्रों में संचार व्यवस्था ठप होने के कारण ट्रेसिंग कार्य में चुनौतियां आ रही हैं।
तिब्बत सीमा पर फंसे 200 भारतीयों की स्थिति और स्थान
नेपाल के साथ-साथ चीन सीमा से सटे तिब्बत के इलाकों में भी भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि चीन सीमा के पास मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों और रास्ते बंद होने के कारण उन्हें भारत वापस लाने के लिए तत्काल निकासी सहायता और राहत अभियानों की जरूरत है।
विदेश मंत्रालय ने तिब्बत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में फंसे नागरिकों की लोकेशन का विस्तृत ब्योरा जारी किया है। दारचेन नामक स्थान पर करीब 95 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जबकि जिलोन्ग शहर में 4 नागरिक फंसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त जुतुलफुक इलाके में लगभग 30 भारतीय नागरिकों का एक समूह मौजूद है, जो सागा क्षेत्र की तरफ आगे बढ़ रहा है। इसी मार्ग पर 60 से 70 अन्य नागरिकों का एक और दल भी सागा की ओर पैदल व अन्य माध्यमों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। इन सभी समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय की 24 घंटे निगरानी और निकासी योजना
आपदा के इस कठिन समय में फंसे हुए सभी नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय ने बहुस्तरीय समन्वय तंत्र सक्रिय कर दिया है। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय का नियंत्रण कक्ष नेपाल सरकार, वहां के स्थानीय नागरिक प्रशासन, संबंधित भारतीय राज्य सरकारों और टूर एजेंसियों के साथ 24 घंटे निर्बाध संपर्क बनाए हुए है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की सर्वोच्च प्राथमिकता संपर्क से बाहर चल रहे सभी 290 नागरिकों के सटीक लोकेशन को जल्द से जल्द ट्रैक करना है। स्थानीय बचाव दलों और हेलीकॉप्टर सेवाओं की मदद से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही मौसम में सुधार होता है और रास्ते साफ होते हैं, सभी फंसे हुए भारतीयों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया जाएगा।




















