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श्रीनगर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बोले सीएम उमर अब्दुल्ला, भारत में विलय का फैसला ऐतिहासिक और सही थाजम्मू-कश्मीर
15 अग॰ 2026, 7:27 pm (84 दिन पहले)· 3

श्रीनगर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बोले सीएम उमर अब्दुल्ला, भारत में विलय का फैसला ऐतिहासिक और सही था

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बदहाल हालात का जिक्र करते हुए 80 साल पहले भारतीय संघ में शामिल होने के निर्णय को पूरी तरह सही ठहराया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर श्रीनगर में आयोजित समारोह में ध्वजारोहण करने के उपरांत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं राजनीतिक वक्तव्य दिया। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पार मौजूद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की दयनीय स्थिति पर गहरा दुख जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ दशक पूर्व हमारे पूर्वज नेताओं ने भारतीय संघ के साथ रहने का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया था, वह समय की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरा है। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने सीमा पार के वर्तमान माहौल, 2019 के संवैधानिक बदलावों, देश की लोकतांत्रिक नींव तथा संघीय ढांचे की मजबूती पर विस्तार से अपनी राय रखी।

आठ दशक पुराने ऐतिहासिक निर्णय पर पुनर्विचार और प्रतिबद्धता

नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के सामाजिक व आर्थिक हालात की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने अतीत के फैसलों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि आज जब वे सीमा पार के क्षेत्रों की बदहाली और प्रशासनिक संकट को देखते हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट अनुभव होता है कि 80 वर्ष पहले हमारे अग्रणी नेताओं द्वारा लिया गया निर्णय बिल्कुल उचित था। उस दौर में जब स्थानीय लोगों ने हमलावर खबरदार की हुंकार भरी थी, तब उनके द्वारा दिए गए बलिदान तर्कसंगत और सामयिक थे। नियंत्रण रेखा के उस पार रह रहे जम्मू-कश्मीर के निवासियों की मौजूदा पीड़ा को देखकर हर भारतीय नागरिक के मन में गहरा दुख होता है।

वर्ष 2019 के संवैधानिक घटनाक्रम और पीओके का संदर्भ

वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने तथा राज्य के पुनर्गठन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए उमर अब्दुल्ला ने अपनी बात रखी। उनका मानना था कि यदि उस समय परिस्थितियां अचानक नहीं बदली गई होतीं, तो सीमा पार के नागरिक स्वयं भारत का हिस्सा बनने के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने लगते। उन्होंने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में उस क्षेत्र के लोगों के लिए आज भी स्थान आरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियंत्रण रेखा के पार रहने वाले नागरिक हमारे अपने हैं और कोई भी उन्हें बाहरी नहीं मानता। यह उम्मीद हमेशा कायम है कि एक दिन वहां के प्रतिनिधि आकर इन आरक्षित सीटों को संभालेंगे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

लोकतंत्र एवं संघवाद की रक्षा को बताया सर्वोपरि कर्तव्य

अपने भाषण के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने देश की आंतरिक संवैधानिक शक्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष की वास्तविक सामर्थ्य उसके जीवंत लोकतंत्र और मजबूत संघवाद में निहित है। प्रत्येक नागरिक और सरकार का यह प्राथमिक दायित्व बनता है कि वे हर परिस्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखें और उन्हें सशक्त बनाएं। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए संघीय व्यवस्था की रक्षा करना एक ऐसा राष्ट्रीय कर्तव्य है, जिससे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटा जा सकता।

श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक संदेश

स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम तथा ऐतिहासिक लाल चौक के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम अमल में लाए गए थे। राजनीतिक विश्लेषक उमर अब्दुल्ला के इस वक्तव्य को सीमा पार पाकिस्तान के लिए एक सख्त रणनीतिक संदेश मान रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इस संबोधन के माध्यम से जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश में तब्दील करने के मोदी सरकार के फैसले के प्रति अपना विरोध भी दर्ज कराया गया है।

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सवाल-जवाब

सीएम उमर अब्दुल्ला ने ध्वजारोहण कहां किया?
मुख्य समारोह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच ध्वजारोहण किया गया।
उमर अब्दुल्ला ने 80 साल पुराने फैसले के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सीमा पार के हालात देखकर यह स्पष्ट होता है कि 80 साल पहले भारतीय संघ के साथ रहने का पूर्वजों का फैसला पूरी तरह सही था।
पीओके की आरक्षित सीटों पर मुख्यमंत्री का क्या दृष्टिकोण था?
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उन सीटों को आरक्षित रखा गया है और वहां के निवासी हमारे अपने हैं, जो उम्मीद है कि एक दिन उन सीटों पर बैठेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार देश की सबसे बड़ी ताकतें क्या हैं?
उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को देश की दो सबसे बड़ी ताकतें बताया और उनकी रक्षा को हर नागरिक का कर्तव्य कहा।
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