जम्मू शहर से मात्र 12 किलोमीटर दूर स्थित खेरी इलाके में हाल ही में जमीन खिसकने और धंसने की वजह से भीषण तबाही मच गई है। तेज बारिश के बाद शुरू हुए इस सिलसिले ने पूरे गांव के लोगों को गहरे डर और दहशत के साए में ला दिया है। जमीन धंसने की इस प्राकृतिक आपदा से 8 से अधिक मकान पूरी तरह से या आंशिक रूप से प्रभावित हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई लोगों के घर ताश के पत्तों की तरह ढहकर मलबे का ढेर बन गए हैं, जबकि कुछ मकान जमीन खिसकने के बाद खतरनाक तरीके से हवा में लटके नजर आ रहे हैं। इस संकट ने दर्जनों लोगों को बेघर कर दिया है और पूरा गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो चुका है।
खेरी गांव में तबाही और जमींदोज होते मकान
खेरी गांव में जमीन धंसने का घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि स्थानीय लोगों को अपने मकानों से सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। बारिश के पानी के कारण पहाड़ों के नीचे की जमीन लगातार खिसकती चली गई और देखते ही देखते कई परिवारों की जीवन भर की कमाई मलबे में बदल गई। मौके पर देखा जाए तो दो घर पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं और मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से एक मकान जमीन के खिसकने के कारण लगभग 18 से 20 फुट गहराई में समा गया है। इसके अलावा दो अन्य मकान जमीन खिसकने के चलते आधी हवा में लटके दिखाई दे रहे हैं, जो कभी भी नीचे गिर सकते हैं। कई अन्य मकानों की दीवारों और नींव में बड़ी-बड़ी गहरी दरारें आ चुकी हैं। ग्रामीण इस बात से बेहद भयभीत हैं कि यदि क्षेत्र में दोबारा बारिश हुई, तो उनके बचे हुए घर भी पूरी तरह जमीन में समा जाएंगे।
राहत टेंटों में बढ़ा सांप और बिच्छुओं का खतरा
बेघर हुए परिवारों को तत्काल आश्रय देने के लिए प्रशासन की ओर से खेरी में फिलहाल तीन राहत टेंट उपलब्ध करवाए गए हैं। हालांकि, इन अस्थाई टेंटों में जीवन बिताना ग्रामीणों के लिए एक नई मुसीबत बन गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि टेंटों के आसपास झाड़ियों और मलबे के कारण सांपों तथा बिच्छुओं का खतरा हर समय बना रहता है। यह जहरीले जीव अक्सर टेंटों के भीतर घुस जाते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रात के समय ग्रामीणों को डर के मारे नींद नहीं आती, क्योंकि उन्हें हर पल सांप या बिच्छू के काटने का भय सताता रहता है। बारिश की तबाही के बाद अब इस नए खतरे ने लोगों का जीना और मुश्किल कर दिया है।
भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण टीम भी कारण तलाशने में नाकाम
खेरी में लगातार धंस रही जमीन की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। इसके तहत जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) यानी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की एक विशेषज्ञ टीम ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। भूवैज्ञानिकों की टीम ने जमीनी स्तर पर व्यापक छानबीन की और मिट्टी तथा चट्टानों के नमूनों का अध्ययन किया। हालांकि, काफी मशक्कत और तकनीकी जांच के बावजूद टीम इस बात का स्पष्ट कारण नहीं खोज सकी कि यहां जमीन लगातार क्यों खिसक रही और धंस रही है। भूवैज्ञानिकों की स्पष्ट रिपोर्ट न आने से प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि बिना कारण जाने इस भूधंसाव को रोकना संभव नहीं दिख रहा है।
2025 के वादे और 2026 की नई तबाही
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब खेरी गांव ने इस तरह की प्राकृतिक त्रासदी का सामना किया है। इससे पहले साल 2025 में भी भारी बारिश और बाढ़ के कारण इस इलाके में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों का सर्वे किया था और उन्हें हर संभव मदद तथा सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास का भरोसा दिलाया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कागजी कार्रवाई और आश्वासन के अलावा उन्हें कोई वास्तविक मदद नहीं मिली। इसके बाद साल 2026 की बारिश ने बचे-खुचे मकानों और बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह तबाह कर दिया। मेहनत से जोड़े गए पैसों से बनाए गए पक्के मकान आज मिट्टी में मिल चुके हैं।
बुनियादी सुविधाओं का संकट और अनिश्चित भविष्य
आपदा के बाद से ही खेरी गांव में बुनियादी ढांचे की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। पूरे इलाके में पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइनें टूट जाने से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है। इसके साथ ही बिजली के खंभे और तार गिर जाने की वजह से पूरे क्षेत्र में बिजली गुल है। स्थानीय निवासी मोहम्मद आसिफ ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पास न तो पीने का पानी है, न बिजली है और न ही रहने के लिए सुरक्षित छत बची है। उन्होंने बताया कि एक साल पहले आई बाढ़ के बाद भी अधिकारियों ने सिर्फ उनके नाम लिखे थे और लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस सहायता राशि या राहत नहीं मिली। आज जब सब कुछ खत्म हो चुका है, तो ग्रामीण केवल सरकार से स्थायी पुनर्वास और सुरक्षित आशियाने की गुहार लगा रहे हैं।



















