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रेबीज के खतरे से थर्राया राजौरी का कोटरंका, 7 लोगों को काटा तो 8 पंचायतों के स्कूल पड़े ठप, सुरक्षा में CRPF उतरीजम्मू-कश्मीर
16 अग॰ 2026, 7:27 am (1 घंटे पहले)· 2

रेबीज के खतरे से थर्राया राजौरी का कोटरंका, 7 लोगों को काटा तो 8 पंचायतों के स्कूल पड़े ठप, सुरक्षा में CRPF उतरी

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आवारा और संदिग्ध रेबीज संक्रमित कुत्तों के हमले में सात लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन ने आठ पंचायतों में एक दिन के लिए स्कूल बंद कर दिए हैं और सुरक्षा के लिए CRPF जवानों को तैनात किया है।

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिले राजौरी के कोटरंका इलाके में आवारा और संभावित रेबीज से ग्रसित कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हाल ही में इन आक्रामक कुत्तों ने इलाके के सात बेकसूर लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में जबरदस्त दहशत का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा और एहतियात के तौर पर आठ अलग-अलग पंचायतों के सभी शिक्षण संस्थानों को एक दिन के लिए पूरी तरह बंद करने का फरमान जारी किया गया। इसके साथ ही, आम लोगों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से प्रभावित इलाकों में CRPF के जवानों को भी तैनात कर दिया गया है।

आठ पंचायतों में शिक्षण संस्थान बंद और अभिभावकों को हिदायत

प्रशासनिक आदेश के तहत जिन आठ पंचायतों में स्कूलों को बंद रखा गया, उनमें जगलानू, मोहड़ा-ए, मोहड़ा-बी, हुब्बी, लारकूटी, कंडी अपर, कंडी लोअर और खड़यून शामिल हैं। यह पूरा क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी इलाके में फैला हुआ है, जहां लोग दूर-दराज के गांवों और बिखरी हुई बस्तियों में निवास करते हैं। ऐसे कठिन भौगोलिक माहौल में कुत्तों के अचानक हमले ने न केवल बच्चों बल्कि बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के मन में भी गहरा डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की ओर से अभिभावकों से विशेष अपील की गई है कि वे जब तक स्थिति नियंत्रण में न आ जाए, अपने मासूम बच्चों को बिना किसी अति-आवश्यक काम के घरों से बाहर न निकलने दें।

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सुरक्षा बलों की तैनाती पर उठे सवाल और प्रशासनिक कदम

हालांकि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए CRPF की टुकड़ियों को सड़कों पर उतारा है और स्कूलों में एक दिन की छुट्टी का ऐलान किया है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण इस कदम से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि महज एक दिन के लिए शैक्षणिक संस्थानों को ताला लगा देने से इस खौफनाक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। लोगों का सवाल है कि जब बच्चे एक दिन बाद दोबारा स्कूल लौटेंगे, तब क्या खतरा पूरी तरह टल जाएगा? इसके अलावा, जो आम नागरिक, व्यापारी और मजदूर खुले में काम कर रहे हैं, उनकी जानमाल की हिफाजत के लिए क्या बंदोबस्त किए गए हैं? स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि सुरक्षा बलों की मूल जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि आवारा कुत्तों से जनता की रखवाली करना।

देश के विभिन्न हिस्सों में आवारा और पालतू कुत्तों का बढ़ता आतंक

आवारा कुत्तों का आतंक केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों से भी हाल के दिनों में दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। कुछ ही समय पहले एक खौफनाक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें पांच से छह खूंखार आवारा कुत्तों का झुंड एक बेबस मासूम बच्चे को सड़क पर बुरी तरह नोचता दिख रहा था। इसी तरह केरल से आए एक वीडियो में एक असहाय बुजुर्ग महिला पर आवारा कुत्तों ने जानलेवा हमला कर दिया था। पालतू कुत्तों के मामले में भी लापरवाही का आलम यह है कि पंजाब के पटियाला में एक पालतू पिटबुल नस्ल के कुत्ते ने अपने ही पड़ोस में रहने वाले एक पति-पत्नी पर हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया, जिसमें गंभीर रूप से घायल महिला को ICU में भर्ती कराना पड़ा।

स्थायी समाधान और रेबीज जांच अभियान की पुरजोर मांग

कोटरंका और आसपास की पंचायतों के निवासियों की स्पष्ट मांग है कि कागजी आदेशों और अस्थायी राहत के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य और नगर प्रशासन की टीमों को तुरंत एक विशेष अभियान चलाना चाहिए। इस अभियान के तहत इलाके में घूम रहे तमाम संदिग्ध आवारा कुत्तों को पकड़ा जाना चाहिए, उनकी पशु चिकित्सकों द्वारा रेबीज जांच की जानी चाहिए और संक्रमित पाए जाने वाले जानवरों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। जब तक कुत्तों को पकड़ने और उनका टीकाकरण करने की प्रभावी मुहिम शुरू नहीं होती, तब तक आठों पंचायतों के लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते रहेंगे।

सवाल-जवाब

राजौरी के कोटरंका में स्कूलों को क्यों बंद किया गया?
आवारा और संदिग्ध रेबीज संक्रमित कुत्तों के हमले में सात लोगों के घायल होने के बाद सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए प्रशासन ने आठ पंचायतों के स्कूलों को एक दिन के लिए बंद कर दिया।
किन आठ पंचायतों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए?
प्रशासन ने जगलानू, मोहड़ा-ए, मोहड़ा-बी, हुब्बी, लारकूटी, कंडी अपर, कंडी लोअर और खड़यून पंचायतों में स्कूल बंद रखने का आदेश दिया।
स्थानीय लोगों की प्रशासन से क्या प्रमुख मांगें हैं?
ग्रामीणों की मांग है कि केवल एक दिन स्कूल बंद करने के बजाय आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी रेबीज जांच करने और संक्रमित कुत्तों की पहचान कर ठोस कदम उठाए जाएं।
सुरक्षा के लिए क्षेत्र में किस बल को तैनात किया गया है?
स्थानीय नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों में CRPF के जवानों की तैनाती की गई है।
हाल ही में देश के अन्य हिस्सों से कुत्ते के हमले की कौन सी घटनाएं सामने आई थीं?
हाल ही में पांच-छह आवारा कुत्तों द्वारा मासूम बच्चे पर हमला, केरल में बुजुर्ग महिला पर हमला और पंजाब के पटियाला में पालतू पिटबुल द्वारा दंपति को नोचने की घटना सामने आई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

राजौरी के कोटरंका में आवारा कुत्तों के हमले के बाद आठ पंचायतों में स्कूल बंद करना और सीआरपीएफ की तैनाती यह दर्शाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय निकाय और नगर प्रशासन पशु नियंत्रण के मोर्चे पर पूरी तरह विफल हैं। महज एक दिन के शिक्षण संस्थान बंद करने और सुरक्षा बलों को सड़कों पर उतारने से रेबीज का खतरा टलने वाला नहीं है। यह प्रशासनिक लाचारी का स्पष्ट प्रमाण है, क्योंकि आवारा पशुओं के आतंक से निपटने के लिए वैज्ञानिक टीकाकरण और स्टरलाइजेशन जैसे स्थायी उपाय जरूरी हैं, न कि केवल कागजी फरमान या सुरक्षा बलों की गश्त।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 मिनट पहले

एक क्राइम रिपोर्टर के तौर पर मेरा मानना है कि आवारा कुत्तों के मामलों में स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस तरह की घटनाओं में यदि किसी की जान जाती है, तो कानूनी प्रावधानों के तहत संबंधित विभागों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। केवल स्कूलों की बंदी या सुरक्षा बलों की तैनाती से जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था की समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सख्त और जवाबदेह प्रशासनिक नीति की आवश्यकता है।

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