फेस्टिव सीजन में नई कार का सपना देखने वाले हर किसी का बजट इतना नहीं होता कि वह शोरूम से एकदम नई गाड़ी उठा सके. रांची में ऐसे कई शोरूम मौजूद हैं जहां महज एक-दो महीने पुरानी कारें बेहतरीन कंडीशन में और जेब के मुताबिक दाम पर मिल जाती हैं. इन गाड़ियों को खरीदने से पहले ग्राहक टेस्ट ड्राइव भी कर सकते हैं, यानी बिना जोखिम के सौदा तय होता है. इससे कम बजट में भी घर पर नई जैसी गाड़ी लाने का सपना पूरा हो जाता है.
कांके रोड पर एक लाख से तीन लाख तक की रेंज
कांके रोड पर राम मंदिर के पास स्थित प्रेमचंद मोटर्स में एक लाख रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक की रेंज में सेकंड हैंड कारें उपलब्ध हैं. यहां टाटा मोटर्स से लेकर महिंद्रा तक के अलग-अलग मॉडल खड़े मिलते हैं. शोरूम के मैनेजर सुधीर बताते हैं कि कई बार ग्राहक महज 10 दिन पुरानी कार लेकर आते हैं क्योंकि वे कुछ किलोमीटर चलाने के बाद ही कोई दूसरी गाड़ी लेने का मन बना लेते हैं या उनका इरादा बदल जाता है. ऐसे मामलों में वे अपनी लगभग नई कार यहीं बेच देते हैं. सुधीर के मुताबिक फिलहाल उनके पास एक ऐसी कार भी मौजूद है जो महज एक महीने पुरानी है और बिल्कुल फाइन कंडीशन में है. यानी खरीदार को यहां लगभग नई गाड़ी भी काफी कम दाम में मिल जाती है.
पोद्दार मोटर्स में महज 50,000 रुपये से शुरुआत
प्रेमचंद मोटर्स से आगे बढ़ने पर पोद्दार मोटर्स है, जहां बाहर ही सेल का बड़ा बोर्ड लगा दिखता है. यहां ग्राहकों को महज 50,000 रुपये में भी कार मिल सकती है. जो लोग सिर्फ एक या दो साल के लिए अस्थायी तौर पर गाड़ी चाहते हैं, उनके लिए यह विकल्प सबसे मुफीद माना जाता है. मैनेजर रवि पोद्दार बताते हैं कि रांची में हाल ही में शिफ्ट हुए कई लोग एक-दो साल के इस्तेमाल के बाद कार बेचने की सोच के साथ यहां आते हैं. उनके लिए यहां एक लाख रुपये तक की रेंज में टाटा समेत कई बड़े ब्रांड की गाड़ियां मौजूद हैं, जिससे शुरुआती खर्च बहुत कम हो जाता है.
रांची कार बाजार में हर बजट की गाड़ी, मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू भी शामिल
तीसरा बड़ा ठिकाना है रांची कार बाजार, जहां मैनेजर अमित के मुताबिक 50,000 रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की सेकंड हैंड कारें मिल जाती हैं. ग्राहक को जिस भी बजट और मॉडल की गाड़ी चाहिए, वह यहां उपलब्ध हो जाती है. मर्सिडीज लेनी हो तो वह 25 लाख रुपये में मिल जाती है, वहीं बीएमडब्ल्यू के लिए 20 लाख रुपये चुकाने होते हैं. अमित का कहना है कि ग्राहक बस अपना बजट बता दे, उसी हिसाब से गाड़ी दिखा दी जाती है, चाहे वह छोटी हैचबैक हो या लग्जरी सेडान.
फेस्टिव सीजन में क्यों बढ़ जाती है डिमांड
दिवाली और धनतेरस जैसे मौकों पर नई गाड़ी खरीदना शुभ माना जाता है, इसलिए हर साल फेस्टिव सीजन में शोरूमों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है. लेकिन बजट की सीमा के चलते कई परिवार नई कार का सपना टाल देते हैं. रांची के इन तीनों शोरूम जैसे विकल्प ऐसे ग्राहकों के लिए राहत की तरह हैं, जो कम बजट में भी फेस्टिव सीजन में घर पर गाड़ी लाना चाहते हैं. टेस्ट ड्राइव की सुविधा और अलग-अलग बजट रेंज होने की वजह से खरीदार बिना जल्दबाजी के अपनी पसंद की गाड़ी चुन सकते हैं.



















