बरसात का मौसम शुरू होते ही कृषि क्षेत्रों में कई प्रकार की कीट समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें व्हाइट ग्रब का प्रकोप इन दिनों किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। यह हानिकारक कीट सीधे पौधों की भूमिगत जड़ों पर हमला करता है और उन्हें अंदर से चट कर जाता है। परिणाम यह होता है कि हरे-भरे पौधे बिना किसी स्पष्ट बाहरी कारण के धीरे-धीरे मुरझाने और सूखने लगते हैं। यदि समय रहते इस समस्या की सटीक पहचान न की जाए तो खेत की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है और किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए बोकारो की उप परियोजना निदेशक सविता जोजो ने इस खतरनाक कीट की पहचान करने के तरीकों, फसल पर पड़ने वाले इसके दुष्परिणामों और इसके नियंत्रण के लिए जरूरी उपायों पर विस्तृत जानकारी साझा की है ताकि किसानों को समय पर सतर्क किया जा सके।
बरसात में क्यों बढ़ता है व्हाइट ग्रब का प्रकोप
सविता जोजो के अनुसार, मानसून और बरसात के दिनों में मिट्टी के भीतर नमी की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जो व्हाइट ग्रब के पनपने और फैलने के लिए बेहद अनुकूल स्थिति पैदा करती है। इस कीट के लार्वा भूमि के अंदर ही रहते हैं और चुपचाप टमाटर तथा मिर्च जैसे पौधों की जड़ों को कुतर-कुतर कर खाते रहते हैं। इससे पौधों का जमीनी संपर्क कमजोर हो जाता है और उन्हें पोषक तत्व मिलना बंद हो जाते हैं। पौधे क्रमशः अपनी जान गंवाने लगते हैं और सूखने लगते हैं। अधिकांश मामलों में किसान इस बात से अनजान रहते हैं कि पौधे क्यों मुरझा रहे हैं और वे इसे किसी सामान्य बीमारी या पोषण की कमी समझ लेते हैं। जब तक किसान कीट की वास्तविक उपस्थिति को समझ पाते हैं, तब तक फसल का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका होता है, जिससे रिकवरी करना बेहद कठिन हो जाता है।
व्हाइट ग्रब कीट की पहचान और शुरुआती लक्षण
इस कीट को इसके विशिष्ट शारीरिक बनावट और रंगों के आधार पर बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है। व्हाइट ग्रब का शरीर पूरी तरह से सफेद रंग का होता है, जबकि इसके मुंह का हिस्सा हल्के लाल या काले रंग का दिखाई देता है। यदि खेत में निराई-गुड़ाई के दौरान जड़ों के आसपास ऐसा कीट नजर आए तो किसानों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। टमाटर और मिर्च की फसलों में अचानक पौधे मुरझाने लगें तो मिट्टी की जांच अवश्य करनी चाहिए। इस कीट की रोकथाम की प्रक्रिया में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम खेत की उचित जुताई करना माना जाता है। बरसात का मौसम पूरी तरह शुरू होने से ठीक पहले खेत की गहरी जुताई कर देने से मिट्टी की परतों के भीतर छिपे हुए कीटों के अंडे और उनके लार्वा धूप लगने से अपने आप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा गहरी जुताई से ये छिपे हुए कीट मिट्टी की ऊपरी सतह पर आ जाते हैं, जिन्हें कौए और अन्य पक्षी खा जाते हैं, जिससे खेत में इनकी संख्या शुरुआती चरण में ही काफी हद तक नियंत्रित हो जाती है।
जैविक खाद और ट्रैप तकनीक से करें नियंत्रण
जुताई के पारंपरिक तरीकों के अलावा किसान रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय जैविक विकल्पों का भी सहारा ले सकते हैं। व्हाइट ग्रब के जैविक नियंत्रण के लिए मिट्टी में नीम खली या अन्य नीम आधारित जैविक खादों का उपयोग करना बेहद असरदार साबित होता है। इसके साथ ही इस कीट का जीवन चक्र केवल मिट्टी तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसके वयस्क कीट यानी बीटल मिट्टी से बाहर निकलकर हवा में उड़ते हैं और पौधों की पत्तियों पर बैठकर अंडे देते हैं। वयस्क कीटों की इस सक्रिय अवस्था में इनकी संख्या पर लगाम लगाना अत्यंत आवश्यक होता है। इस उद्देश्य के लिए किसान खेतों में फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप का उपयोग कर सकते हैं। इन विशेष ट्रैप की रोशनी और गंध से आकर्षित होकर वयस्क कीट इनमें फंस जाते हैं, जिससे वे खेतों में व्यापक स्तर पर अंडे देने में असफल हो जाते हैं।
सावधानी बरतना और कृषि विशेषज्ञों की सलाह
खेतों में काम करते समय किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। यदि खड़ी फसल के दौरान पौधे अचानक बिना किसी स्पष्ट वजह के मुरझाने या सूखने लगें, तो इसे कभी भी सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस स्थिति में तुरंत किसी नजदीकी कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करके उनकी सलाह लेनी चाहिए और फसल की वास्तविक स्थिति के अनुसार उचित जैविक या रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। समय पर उठाए गए ऐसे कदम किसानों की मेहनत और फसल दोनों को भारी तबाही से सुरक्षित बचा सकते हैं।



















