कर्नाटक में नियम कानून के सख्त क्रियान्वयन को लेकर दो अलग अलग मामले सामने आए हैं। राजधानी बेंगलुरु में विकास और संसदीय कार्य मंत्री कृष्णा बयरे गौडा के निर्देशों पर उनके ही एक उत्साही समर्थक के विरुद्ध अनधिकृत पोस्टर लगाने का केस दर्ज किया गया है। दूसरी ओर राज्य के बीदर जिले में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान देशभक्ति के नारे लगाने पर रोक लगाने के आरोप में एक इंटर कॉलेज के प्राचार्य पर पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसा है। दोनों ही मामलों में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर त्वरित कार्रवाई की गई है।
सार्वजनिक संपत्ति विरूपण पर मंत्री की अपने समर्थक पर सख्त कार्रवाई
बेंगलुरु शहर के विद्यारण्यपुरा इलाके में स्थित वार्ड नंबर 10 के अधिकार क्षेत्र में सार्वजनिक सड़कों और दीवारों पर अवैध रूप से कागजी पोस्टर चिपकाए जाने का मामला उजागर हुआ। दैनिक निरीक्षण अभियान के दौरान जीबीए अधिकारी गोविंदप्पा ने पाया कि बेंगलुरु उत्तर नगर निगम से किसी भी प्रकार की पूर्व मंजूरी लिए बिना मंत्री का प्रचार करने वाले पोस्टर सार्वजनिक दीवारों पर लगाए गए थे। इस कृत्य से न केवल शहरी सौंदर्य प्रभावित हुआ, बल्कि नगर निगम के सफाई कर्मचारियों पर भी अनावश्यक रूप से इन्हें हटाने का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री कृष्णा बयरे गौडा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अधिकारी गोविंदप्पा की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने मंत्री के प्रशंसक शिवकुमार को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। निकाय अधिकारियों का कहना है कि शहर में बिना पूर्व अनुमति पोस्टर चिपकाकर संपत्ति को गंदा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
चितगुप्पा के कॉलेज में देशभक्ति के नारे रोकने पर प्राचार्य पर मुकदमा
कर्नाटक के बीदर जिले अंतर्गत आने वाले चितगुप्पा कस्बे के एक इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान विवाद उत्पन्न हो गया। 15 अगस्त को आयोजित समारोह में राष्ट्रगान की समाप्ति के बाद जब विद्यार्थी परिसर से बाहर निकल रहे थे, तब कुछ छात्रों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के देशभक्ति के नारे लगाए। आरोप है कि संस्थान के प्राचार्य अब्दुल हकीम, जिनकी उम्र 39 वर्ष है, ने विद्यार्थियों को तत्काल रोक दिया और परिसर में दोबारा ऐसे नारे न लगाने की सख्त ताकीद दी।
शिकायत के अनुसार प्राचार्य ने इन नारों को एक विशिष्ट धार्मिक समुदाय से जोड़ते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर के भीतर ऐसे उद्घोष करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एक छात्र के पिता ने प्राचार्य के इस आचरण को धार्मिक आधार पर भेदभाव फैलाने और विद्यार्थियों के मध्य वैमनस्य पैदा करने वाला करार दिया। पिता की तहरीर के आधार पर 17 अगस्त को चितगुप्पा पुलिस थाने में मामला पंजीकृत किया गया।
पुलिस ने आरोपी प्राचार्य अब्दुल हकीम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज किया है। इसमें गलत तरीके से रोकने से जुड़ी धारा 126(2), शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित धारा 352 तथा सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धारा 353(2) शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



















