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कर्नाटक के चामराजनगर जंगल में तीन ग्रामीणों की मौत के बाद वनकर्मियों पर एफआईआर दर्ज, परिजनों ने एनकाउंटर के दावों को नकाराकर्नाटक
16 अग॰ 2026, 11:24 am (2 घंटे पहले)· 3

कर्नाटक के चामराजनगर जंगल में तीन ग्रामीणों की मौत के बाद वनकर्मियों पर एफआईआर दर्ज, परिजनों ने एनकाउंटर के दावों को नकारा

कर्नाटक के चामराजनगर जिले में 15 अगस्त की सुबह वन विभाग की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत के बाद हनूर पुलिस ने वन अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। वन विभाग ने मृतकों को शिकारी बताया है, जबकि परिजनों का कहना है कि वे केवल अपनी खोई हुई गायें ढूंढने जंगल गए थे।

कर्नाटक के चामराजनगर जिले में संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर तीन स्थानीय निवासियों की गोली लगने से हुई मौत के मामले में पुलिस ने वन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। यह घटना शनिवार, 15 अगस्त की तड़के मरियमंगला वन क्षेत्र में घटी, जो हनूर वन रेंज के अंतर्गत आता है। घटना के बाद मारे गए एक व्यक्ति की पत्नी द्वारा दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर हनूर पुलिस स्टेशन ने संबंधित वनकर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

परिजनों और वन विभाग के दावों में भारी विरोधाभास

इस घातक मुठभेड़ के बाद स्थानीय ग्रामीणों और वन प्रशासन के बीच भारी तनाव पैदा हो गया है। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि ये लोग अवैध रूप से संरक्षित वन क्षेत्र में दाखिल हुए शिकारी थे, जो वन्यजीवों का शिकार करने के उद्देश्य से आए थे। दूसरी तरफ, मरियमंगला गांव के निवासियों और मृतकों के परिजनों ने वन विभाग के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि मारे गए लोग निहत्थे किसान और दिहाड़ी मजदूर थे, जो केवल चरने के बाद वापस न लौटने वाली अपनी मवेशियों को खोजने जंगल में गए थे। इस घटना से कुछ ही दिन पहले एक कांग्रेस विधायक द्वारा शिकार से जुड़ा बयान दिए जाने पर भी काफी विवाद हुआ था, जिससे क्षेत्र में पहले से ही माहौल गरमाया हुआ था।

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14 अगस्त की शाम से शुरू हुआ घटनाक्रम

मारे गए 50 वर्षीय एंथनी सामी की पत्नी मैरी द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पूरा घटनाक्रम बृहस्पतिवार, 14 अगस्त की शाम से शुरू हुआ था। शाम करीब 6:30 बजे एंथनी सामी अपने साथियों 35 वर्षीय सुबास्टिन डेविड कुमार, 43 वर्षीय जॉन रोज पीटर और अपने एक रिश्तेदार जोसेफ महिमादास के साथ जंगल की ओर निकले थे। ये सभी लोग अपनी उन दो गायों को ढूंढ रहे थे जो दिन में चरने गई थीं लेकिन शाम तक घर वापस नहीं लौटी थीं। जंगल में कई घंटों तक मवेशियों की तलाश करने के बाद जब वे उन्हें नहीं ढूंढ पाए, तो 15 अगस्त की रात करीब 2 बजे उन्होंने जंगल के अंदर लगभग चार किलोमीटर दूर एक बड़े पत्थर के पास रुककर विश्राम करने का फैसला किया।

चश्मदीद ने बताई देर रात हुई गोलीबारी की आपबीती

मुठभेड़ के दौरान अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहे जोसेफ महिमादास ने इस पूरी घटना की जानकारी एंथनी की पत्नी मैरी और गांव वालों को दी। महिमादास के अनुसार, 15 अगस्त की तड़के रात 3 बजे से सुबह 5 बजे के बीच वन विभाग के कर्मचारी उस स्थान पर पहुंचे जहां वे सभी सो रहे थे। महिमादास का आरोप है कि वनकर्मियों ने बिना किसी चेतावनी या उकसावे के सोते हुए लोगों पर अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलीबारी से ठीक पहले कुछ आहट सुनकर जागे महिमादास अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की तरफ भाग निकले और गांव पहुंचकर लोगों को सतर्क किया। हालांकि, गोलीबारी की इस घटना में एंथनी सामी, सुबास्टिन डेविड कुमार और जॉन रोज पीटर की मौके पर ही गोली लगने से मौत हो गई।

भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज और आगे की जांच

मृतक एंथनी सामी की पत्नी मैरी की शिकायत मिलने के तुरंत बाद हनूर पुलिस ने हनूर रेंज के वन अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम घटना की सही परिस्थितियों का पता लगाने, मौके से साक्ष्य जुटाने और वन विभाग तथा ग्रामीणों के परस्पर विरोधी दावों की सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रही है।

सवाल-जवाब

कर्नाटक के चामराजनगर में क्या घटना हुई?
चामराजनगर के मरियमंगला वन क्षेत्र में 15 अगस्त की तड़के वन विभाग की गोलीबारी में तीन स्थानीय ग्रामीणों की मौत हो गई, जिसके बाद वन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
गोलीबारी में किन लोगों की जान गई?
घटना में 50 वर्षीय एंथनी सामी, 35 वर्षीय सुबास्टिन डेविड कुमार और 43 वर्षीय जॉन रोज पीटर की मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग और मृतकों के परिजनों के दावों में क्या अंतर है?
वन विभाग का दावा है कि ये लोग अवैध शिकार के लिए संरक्षित क्षेत्र में घुसे थे, जबकि परिजनों का कहना है कि वे अपनी खोई हुई दो गायों को तलाशने जंगल गए निहत्थे किसान थे।
पुलिस ने इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई की है?
मृतक की पत्नी मैरी की शिकायत पर हनूर पुलिस ने वन अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
मुठभेड़ के समय जंगल में कुल कितने लोग मौजूद थे?
जंगल में चार लोग मौजूद थे, जिनमें से तीन की गोलीबारी में मौत हो गई और चौथे सदस्य जोसेफ महिमादास अंधेरे में भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

यह मामला वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत मिलने वाले बल प्रयोग के अधिकारों और मानवाधिकारों के बीच के संघर्ष को उजागर करता है। बीएनएस की धारा 103(1) के तहत एफआईआर दर्ज होना यह दिखाता है कि जांच एजेंसी वन विभाग के 'एनकाउंटर' के दावे को शुरुआती स्तर पर संदिग्ध मान रही है। आगे की न्यायिक जांच में यह तय होगा कि क्या यह कार्रवाई आत्मरक्षा में थी या कानून का दुरुपयोग। इस मामले में स्वतंत्र फॉरेंसिक और बैलिस्टिक रिपोर्ट ही सच सामने लाएगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·47 मिनट पहले

यह घटना वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच के तनाव को रेखांकित करती है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह अनिवार्य हो गया है कि प्रशासन संरक्षित क्षेत्रों में गश्त और सुरक्षा के दौरान बल प्रयोग के नियमों की पारदर्शी समीक्षा करे। यदि स्वतंत्र फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच में प्रक्रियागत खामियां साबित होती हैं, तो इससे वन प्रशासन की कार्यशैली में बड़े सुधार लाने का दबाव बढ़ेगा और राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा तूल पकड़ सकता है।

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