वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिला है, जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने लंबे समय से तय अपने कैलेंडर से हटकर एक अनपेक्षित घोषणा की। अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले सरकारी बांडों की पुनर्खरीद यानी बायबैक योजना को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इस अचानक उठाए गए कदम का मुख्य उद्देश्य बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाना और लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड पर बन रहे दबाव को सीमित करना है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार, सर्राफा बाजार और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर व्यापक हलचल देखी जा रही है।
ट्रेजरी की बायबैक योजना और नए नियम
बुधवार को भारतीय समयानुसार देर शाम 12:32 जीएमटी पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने औपचारिक रूप से जानकारी दी कि वह अपनी तरलता सहायता बायबैक गतिविधियों का विस्तार कर रहा है। इसके तहत 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्रों में खरीद की सीमा को बढ़ाया गया है। अब तक प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 अरब डॉलर मूल्य के बॉन्ड खरीदे जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि नियमित शेड्यूल से अलग हटकर लिया गया यह फैसला अमेरिकी वित्तीय अधिकारियों की उस मंशा को दर्शाता है जिसमें वे बॉन्ड यील्ड में आने वाले किसी भी बड़े उछाल को रोकने के लिए सतर्क हैं।
आईएनजी के विश्लेषक पाड्रिक गार्वे का दृष्टिकोण
वित्तीय संस्थान आईएनजी के वरिष्ठ विश्लेषक पाड्रिक गार्वे ने इस कदम का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा है कि ट्रेजरी का यह कदम लंबी अवधि की यील्ड में तेजी को पूरी तरह से पलटने के बजाय उसे धीमा या नियंत्रित करने का काम करेगा। उनके अनुसार, बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी ट्रेजरी इस बायबैक राशि को दोबारा भी दोगुना कर सकती है। गार्वे ने स्पष्ट किया कि हालांकि बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव एक प्रमुख कारक बना रहेगा, लेकिन अब उस पर एक मजबूत नियंत्रण स्थापित हो चुका है।
आईएनजी के अनुमान के मुताबिक, 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में जोखिम के कारण 4.75 प्रतिशत से 5 प्रतिशत के दायरे में जाने की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है। फिलहाल इसके 4.5 प्रतिशत से नीचे आने की संभावना काफी कम दिखाई देती है। हालांकि, इस फैसले से एक बात पूरी तरह साफ हो गई है कि यदि 10 वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को पार करने की कोशिश करती है या वैसा कोई गंभीर खतरा उत्पन्न होता है, तो अमेरिकी ट्रेजरी विभाग उसे रोकने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करेगा।
करेंसी मार्केट पर असर और अमेरिकी डॉलर में गिरावट
बॉन्ड बायबैक बढ़ाए जाने की खबर के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कमजोरी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर विरोधी रुझान मजबूत हुआ। यूरोपीय सत्र के दौरान गुरुवार को जीबीपी/यूएसडी जोड़ी मई महीने के अपने उच्चतम स्तर के करीब 1.3650 के आसपास कारोबार करती नजर आई। डॉलर में लगातार आ रही गिरावट ने ब्रिटिश पाउंड को मजबूती प्रदान की है।
दूसरी ओर, यूरो/यूएसडी जोड़ी भी दिन के शुरुआती कारोबार में तीन महीने के उच्चतम स्तर को छूने के बाद 1.1700 के स्तर के ठीक नीचे स्थिर बनी हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड की खरीद बढ़ाने के फैसले के बाद अमेरिकी डॉलर की मजबूती हासिल करने की क्षमता प्रभावित हुई है, जिसके चलते यूरो में भारी गिरावट की आशंका सीमित हो गई है।
बिटकॉइन 72,000 डॉलर के पास, सोने की कीमतों में स्थिरता
अमेरिकी सरकार द्वारा बाजार में तरलता बढ़ाने के इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर डिजिटल परिसंपत्ति बाजार पर पड़ा है। गुरुवार को बिटकॉइन की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 72,000 डॉलर के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। क्रिप्टो निवेशकों ने बॉन्ड बायबैक दोगुना करने के कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे समग्र बाजार में लिक्विडिटी की स्थिति में सुधार हुआ है। इस घटनाक्रम ने बाजार में शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति पैदा की, जिससे बिटकॉइन सहित अन्य क्रिप्टोकरेंसी में खरीदारी का नया माहौल बना।
वहीं दूसरी तरफ, कीमती धातुओं के बाजार में सोना मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान सोने का भाव 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहा। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, अमेरिकी डॉलर के तीन महीने के निचले स्तर की ओर खिसकने से सोने को निचले स्तरों पर सहारा मिल रहा है।



















