अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि व्यापक आर्थिक चुनौतियों और बदलती लिक्विडिटी के बीच भी अमेरिकी लेबर मार्केट में मजबूती बनी हुई है। यूएस लेबर विभाग द्वारा गुरुवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में नए बेरोजगारी क्लेम (Initial Jobless Claims) घटकर 206K (2,06,000) रह गए हैं। यह आंकड़ा बाजार के शुरुआती अनुमान 210K से कम है और पिछले सप्ताह के संशोधित आंकड़े 212K (जिसे पहले 209K बताया गया था) से भी नीचे आ गया है। हालांकि, नए क्लेम में गिरावट से नौकरियों की सुरक्षा का संकेत मिलता है, लेकिन जारी रहने वाले बेरोजगारी क्लेम (Continuing Jobless Claims) बढ़कर 1.799M (17.99 लाख) हो गए हैं, जबकि 4-सप्ताह का मूविंग एवरेज पिछले सप्ताह के संशोधित आंकड़ों के मुकाबले 4.250K बढ़ गया है।
अमेरिकन लेबर मार्केट डेटा और बेरोजगारी क्लेम का पूरा विश्लेषण
साप्ताहिक बेरोजगारी क्लेम रिपोर्ट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने का बेहद महत्वपूर्ण पैमाना मानी जाती है। इससे यह तुरंत पता चलता है कि कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी किस रफ्तार से कर रही हैं। शुरुआती क्लेम का गिरकर 206K पर आना दिखाता है कि अमेरिकी कंपनियां ऊंची ब्याज दरों के बावजूद कर्मचारियों को निकालने से बच रही हैं। हालांकि, लंबे समय से भत्ता पा रहे लोगों का आंकड़ा बढ़ना यह दर्शाता है कि जो लोग एक बार अपनी नौकरी गंवा चुके हैं, उन्हें नई नौकरी मिलने में थोड़ा ज्यादा वक्त लग रहा है।
इसी तरह, 4-सप्ताह का मूविंग एवरेज 4.250K बढ़कर आया है। अर्थशास्त्री इस 4-सप्ताह के औसत का इस्तेमाल साप्ताहिक उतार-चढ़ाव को दूर करके सही ट्रेंड को समझने के लिए करते हैं। शुरुआती क्लेम में कमी और 4-सप्ताह के औसत में हल्की बढ़ोतरी का यह मिला-जुला रूप बताता है कि लेबर मार्केट में छंटनी तो सीमित है, लेकिन नई भर्तियों की रफ्तार भी बहुत तेज नहीं है।
यूएस ट्रेजरी के कर्ज बायबैक फैसले से बाजार में तरलता का नया उछाल
एक तरफ जहां लेबर मार्केट के आंकड़ों पर चर्चा हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ यूएस ट्रेजरी (अमेरिकी वित्त विभाग) के एक बड़े नीतिगत फैसले ने वैश्विक वित्तीय बाजारों का रुख बदल दिया। बुधवार को 12:32 GMT पर ट्रेजरी ने अपने तय शेड्यूल से अलग हटकर सरकारी बॉन्ड बायबैक योजना को दोगुना करने का ऐलान किया। इस नए फैसले के तहत अमेरिकी सरकार 10-साल से 20-साल और 20-साल से 30-साल की मैच्योरिटी वाले लंबी अवधि के बॉन्ड की बायबैक सीमा को प्रति ऑपरेशन $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन (4 अरब डॉलर) करने जा रही है।
ट्रेजरी की यह नई लिक्विडिटी सहायता योजना 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक चलेगी। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि पतझड़ के इस मौसम में बॉन्ड बायबैक का दायरा दोगुना करने से द्वितीयक बॉन्ड बाजार की तरलता (लिक्विडिटी) में सुधार होगा और बॉन्ड यील्ड के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इस अचानक हुई घोषणा ने बॉन्ड मार्केट में शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति पैदा कर दी, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम भरे संपत्तियों के प्रति निवेशकों का उत्साह बढ़ गया।
करेंसी मार्केट का रुख और डॉलर इंडेक्स (DXY) पर बना दबाव
लेबर आंकड़ों और ट्रेजरी के लिक्विडिटी कदम के बाद विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तीखा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) गुरुवार को तीन महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक डॉलर इंडेक्स 98.80 के स्तर पर है, जो इसके पिछले बंद स्तर 98.83 से 0.03 प्रतिशत नीचे है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 29 के स्तर पर है जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है, जबकि MACD संकेतक -0.39 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है।
यूएस ट्रेजरी यील्ड में आए मामूली सुधार के बावजूद ग्रीनबैक (अमेरिकी डॉलर) अपनी बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहा। डॉलर इंडेक्स अपनी 52-सप्ताह की रेंज 95.55 से 101.80 के बीच कारोबार कर रहा है और अपने 20-दिवसीय EMA (99.87) तथा 50-दिवसीय EMA (100.09) से नीचे बना हुआ है। यूरोपियन ट्रेडिंग सेशन के दौरान पाउंड (GBP/USD) 1.3650 के करीब कारोबार करता दिखा, जो इसके मई महीने के उच्चतम स्तर के करीब है। दूसरी ओर, यूरो (EUR/USD) 1.1700 के नीचे स्थिर बना रहा। हालांकि यूरो की तेजी पर थोड़ा विराम लगा है, लेकिन अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के कारण गिरावट भी सीमित ही है।
कमोडिटीज और क्रिप्टोकरेंसी की चाल: बिटकॉइन में उछाल, गोल्ड में सुस्ती
अमेरिकी सरकार की ओर से बाजार में नकदी बढ़ाने के ऐलान का सबसे सकारात्मक असर डिजिटल एसेट्स पर देखा गया। गुरुवार को बिटकॉइन 72,000 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया। ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक की रकम दोगुना करने की घोषणा के बाद क्रिप्टो निवेशकों में भारी उत्साह देखा गया, जिससे बाजार की लिक्विडिटी में सुधार हुआ और मंदी के दांव लगाने वाले निवेशकों को अपने पोजीशन काटने पड़े।
इसके विपरीत, कीमती धातुओं में सुस्ती का माहौल रहा। यूरोपीय सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,500 प्रति औंस के स्तर से नीचे रहा। हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव से सोने को सहारा मिल रहा है, लेकिन निवेशकों का रुझान ट्रेजरी घोषणा के बाद जोखिम वाली संपत्तियों की तरफ शिफ्ट होने से सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।
लेबर मार्केट, वेज ग्रोथ और सेंट्रल बैंकों की मौद्रिक नीतियां
बेरोजगारी और रोजगार के यह आंकड़े केवल तात्कालिक बाजार चाल ही तय नहीं करते, बल्कि सेंट्रल बैंकों की भविष्य की ब्याज दर नीतियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूती में लेबर मार्केट की अहम भूमिका होती है। जब बेरोजगारी दर कम होती है और लोगों के पास रोजगार होता है, तो उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे देश की कुल जीडीपी वृद्धि को रफ्तार मिलती है। हालांकि, अत्यधिक मजबूत लेबर मार्केट में जब कर्मचारियों की किल्लत होती है, तो कंपनियों को ज्यादा वेतन देना पड़ता है।
वेतन वृद्धि (Wage Growth) का सीधा संबंध महंगाई से होता है। ऊर्जा या खाद्य पदार्थों की अस्थिर कीमतों की तुलना में वेतन में होने वाली बढ़ोतरी को आसानी से कम नहीं किया जा सकता, जिससे सेवाओं की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं। यही वजह है कि दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों पर निर्णय लेते समय वेतन वृद्धि के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के Mandates की तुलना
विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर लेबर मार्केट के आंकड़ों का मूल्यांकन करते हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) के पास दोहरी जिम्मेदारी (Dual Mandate) है: अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना। यही कारण है कि फेड अधिकारी बेरोजगारी क्लेम और वेतन आंकड़ों को बेहद गंभीरता से लेते हैं।
इसके विपरीत, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मुख्य जिम्मेदारी केवल महंगाई को नियंत्रित करना (Single Mandate) है। हालांकि, Mandate अलग-अलग होने के बावजूद दोनों ही संस्थान अर्थव्यवस्था की सेहत का अंदाजा लगाने और महंगाई के दबाव को मापने के लिए लेबर मार्केट की स्थिति को प्राथमिक संकेतक मानते हैं।



















