जुलाई महीने की शुरुआत के साथ ही मानसून ने अपनी दस्तक दे दी है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। हालांकि, सुहाने मौसम के साथ-साथ इस बदलाव ने लोगों के स्वास्थ्य के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। इन दिनों मौसमी बुखार और फंगल संक्रमण के मामलों के साथ-साथ बाल झड़ने यानी हेयर फॉल की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस समस्या से केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी समान रूप से परेशान हैं और वे बड़ी संख्या में उपचार के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इस मौसम में बालों की सेहत का ख्याल रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अस्पताल की OPD में मरीजों की बढ़ती संख्या
अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में स्थित आयुर्वेदिक OPD में इन दिनों बालों की समस्या लेकर पहुंचने वाले मरीजों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। आंकड़ों की बात करें तो अस्पताल की इस ओपीडी में रोजाना लगभग 10 से 12 मरीज केवल बालों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के इलाज और डॉक्टरी सलाह के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में अचानक आए इस बदलाव और हवा में अत्यधिक नमी के कारण सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिससे मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
मानसून में बाल कमजोर होने का असली कारण
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान वातावरण में आर्द्रता यानी नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह नमी सिर की त्वचा पर फंगल संक्रमण को पनपने के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करती है। यदि इस संक्रमण का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है। जड़ों के कमजोर होने के कारण बाल असमय और बहुत तेजी से टूटने लगते हैं, जो बाद में गंभीर हेयर फॉल का रूप ले लेता है।
अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने इस समस्या के मुख्य कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गर्मी के आखिरी दिनों में अक्सर सिर की त्वचा पर एक सूखी और खुरदरी परत बनने लगती है। ज्यादातर लोग इस शुरुआती रूखेपन और हल्की खुजली को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही अनदेखी आगे चलकर भारी पड़ती है, क्योंकि यह परत बालों की जड़ों को अंदर से कमजोर कर देती है और बरसात शुरू होते ही बाल तेजी से गिरने लगते हैं।
खानपान में बदलाव है सबसे जरूरी
डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि हेयर फॉल की समस्या को केवल बाहरी तौर पर तेल लगाकर पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए खानपान और दैनिक जीवनशैली में सुधार करना बेहद आवश्यक है। इस मौसम में लोगों को मैदा, बेसन, अत्यधिक खट्टी चीजें, तीखे-चटपटे खाद्य पदार्थ और बहुत ज्यादा चावल खाने से परहेज करना चाहिए। ये चीजें शरीर में दोषों को असंतुलित कर सकती हैं जिससे बालों को नुकसान पहुंचता है।
इसकी जगह, भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे मौसमी फल और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार शामिल करना चाहिए। यह पौष्टिक आहार बालों की जड़ों को अंदरूनी पोषण प्रदान करता है और उन्हें मजबूत बनाता है। जब तक शरीर को भीतर से सही पोषण नहीं मिलेगा, तब तक बाहरी उपचार भी पूरी तरह असरदार नहीं होंगे।
छिपी हुई बीमारियों का भी हो सकता है संकेत
इसके अलावा, लगातार हो रहे हेयर फॉल को केवल एक मौसमी समस्या मानकर टालना सही नहीं है। डॉ. जितेंद्र वर्मा के अनुसार, अत्यधिक बाल झड़ना शरीर के भीतर पल रही किसी दूसरी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। शरीर में Vitamin-E की कमी, थायराइड की समस्या या फिर गंभीर कुपोषण भी बालों के झड़ने की मुख्य वजह हो सकते हैं। इसलिए, बिना किसी डॉक्टरी जांच के खुद से कोई दवा लेने या केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
आयुर्वेद में उपलब्ध प्रभावी उपचार
आयुर्वेद में इस समस्या के इलाज के लिए मरीज की स्थिति की पूरी जांच की जाती है और फिर समस्या की जड़ पर काम किया जाता है। डॉ. वर्मा ने बताया कि भृंगराज, त्रिफला, आंवला, अश्वगंधा और चमेली जैसी प्राकृतिक औषधियों से तैयार किए गए तेल बालों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी होते हैं। इसके साथ ही, तिल का तेल और नारियल का तेल भी सिर की त्वचा को गहराई से पोषण देने में मदद करते हैं।
कुछ विशेष और पुराने मामलों में आयुर्वेदिक नस्य चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। इस थेरेपी के तहत औषधीय तेल की बूंदें मरीज की नाक के माध्यम से दी जाती हैं, जिससे दवा के औषधीय गुण सीधे सिर के हिस्सों तक पहुंचते हैं और बहुत ही कम समय में बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।
मात्र 5 रुपये में सरकारी अस्पताल में इलाज
डॉ. वर्मा ने लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण सलाह दी कि वे फ्रिज का बहुत अधिक ठंडा पानी पीने से बचें और इसकी जगह घड़े यानी मटके के प्राकृतिक रूप से ठंडे जल का सेवन करें। यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है जो अप्रत्यक्ष रूप से बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
उन्होंने बताया कि अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक OPD में मरीजों के लिए बेहद सस्ती और सुलभ सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां मात्र 5 रुपये की मामूली पर्ची कटवाकर मरीज अपने बालों की जांच करा सकते हैं, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं और साथ ही आवश्यक आयुर्वेदिक दवाएं भी मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं। समय पर इलाज, सही खानपान और नियमित देखभाल से मानसून के इस मौसम में भी बालों को पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है।











