नवरात्रि 2026 के पावन उत्सव की तैयारियां देशभर में उत्साह के साथ शुरू हो चुकी हैं। गुजरात के प्रमुख शहर अहमदाबाद से लेकर भारत के कोने-कोने में डांडिया और गरबा के आयोजन की गूंज सुनाई देने लगी है। जब भी इस उत्सव के लिए पारंपरिक गुजराती परिधान यानी बारीक कशीदाकारी और शीशों के काम वाली चनिया चोली की बात होती है, तब उपयुक्त गहनों के बिना वह संपूर्ण नहीं लगती। इस साल के फैशन रुझान में सिर्फ दिखावटी या अत्यधिक वजनी आभूषणों की जगह ऐसे गहनों को प्रमुखता दी जा रही है जो न केवल दिखने में बेहद खूबसूरत हों, बल्कि नाचते समय पहनने में भी पूरी तरह आरामदायक रहें। पारंपरिक लोक कला से प्रेरित डिजाइनों से लेकर आधुनिक हल्के पैटर्न तक, सही इयररिंग्स का चयन आपके पूरे रूप-रंग को गरबा के मैदान पर बेहद मोहक और विशिष्ट बना देता है। अपनी चनिया चोली के सौंदर्य में निखार लाने के लिए इस फेस्टिव सीजन के सात सबसे लोकप्रिय और मांग वाले इयररिंग डिजाइनों की जानकारी यहां दी जा रही है।
बाहुबली हेयर चेन से सजे ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर अंब्रेला झुमके
झुमके हमेशा से ही गुजराती और राजस्थानी लोक परिधानों की सबसे पहली और अमिट पहचान रहे हैं। इस साल के फैशन में बड़े आकार वाले छतरीनुमा यानी अंब्रेला-शेप ऑक्सीडाइज्ड झुमके सबसे आगे हैं, जिनके साथ कई परतों वाली लंबी बाहुबली हेयर चेन जुड़ी होती हैं। इन चेनों को सीधे बालों में पिन की सहायता से सुरक्षित कर दिया जाता है। इस व्यवस्था से झुमकों का सारा भारी वजन केवल कान के छेदों पर केंद्रित रहने के बजाय सिर और बालों के बड़े हिस्से में समान रूप से बंट जाता है। इसका सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि कान खिंचने, दर्द होने या कटने का कोई डर नहीं रहता। डांडिया और रास-गरबा की तेज धुनों पर रातभर झूमते हुए भी यह आभूषण अपनी जगह पर टिका रहता है और पारंपरिक चनिया चोली के साथ एक राजसी रूप प्रदान करता है।
मीनाकारी कारीगरी वाली क्लासिक ड्यूल-टोन चांदबालियां
गरबा उत्सव के दौरान यदि आप सौम्य, नफासत भरा और सुरुचिपूर्ण अंदाज पाना चाहती हैं, तो अर्धचंद्राकार स्वरूप वाली चांदबालियां सबसे सटीक चुनाव साबित होती हैं। यह खास शैली गहरे या चौड़े गले वाले ब्लाउज और भारी धागों की कढ़ाई वाली चनिया चोली के साथ सबसे अधिक खिलती है। मौजूदा समय में ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर के साथ सुनहरी चमक का दोहरा संगम यानी ड्यूल-टोन डिजाइन बेहद पसंद किया जा रहा है। इसमें चटख नीले, गहरे लाल, मोरपंखी और पीले रंगों की बारीक मीनाकारी का काम किया जाता है। रंगों और धातुओं का यह संतुलित मेल किसी भी पारंपरिक पोशाक को आम भीड़ से अलग एक अत्यंत परिष्कृत और कुलीन पहचान देता है।
कान फूल शैली वाले पूरे कान को ढंकने वाले स्टेटमेंट इयर कफ्स
कान में बिना अतिरिक्त छेद करवाए अगर आप एक निडर, साहसिक और पारंपरिक रूप पाना चाहती हैं, तो पारंपरिक 'कान फूल' की बनावट वाले स्टेटमेंट इयर कफ्स इस मौसम की अनिवार्य पसंद हैं। यह डिजाइन कान की बाहरी सतह को पूरी तरह घेरकर सजा देता है। इनमें मोर के पंख, खिले हुए कमल अथवा बेल-बूटियों और पत्तियों के बारीक नमूने गढ़े होते हैं। बालों की एकतरफा चोटी अथवा सजे हुए जूड़े के साथ पहने जाने पर ये इयर कफ्स चेहरे की रूपरेखा को एक आकर्षक और नुकीला रूप प्रदान करते हैं। यह उन युवतियों के लिए आदर्श है जो रूढ़ियों से हटकर कुछ अलग पहनना चाहती हैं।
कौड़ी, पोम-पोम और फैब्रिक से तैयार बोहेमियन डैंगलर्स
कबीलाई अथवा बोहेमियन फैशन के शौकीन युवाओं के लिए हाथ से तैयार कपड़े और समुद्री सीपियों वाले डैंगलर्स सबसे उपयुक्त समाधान हैं। इनमें पारंपरिक बांधनी और पटोला वस्त्रों के रंग-बिरंगे कतरनों, मुलायम पोम-पोम, लटकनों और सफेद कौड़ियों का कलात्मक उपयोग किया जाता है। किसी भी भारी धातु का इस्तेमाल न होने के कारण इनका वजन बेहद कम होता है। भारी आभूषणों के कारण होने वाली शारीरिक थकान से पूरी तरह मुक्त रहकर आप गरबा के घेरे में बिना रुके लगातार नृत्य का आनंद ले सकती हैं। यह डिजाइन चनिया चोली में एक जीवंत, चुलबुला और रंगीन पहलू जोड़ता है।
कांच की कारीगरी वाले ज्यामितीय ड्रॉप इयररिंग्स
पारंपरिक गुजराती परिधान की आत्मा वहां की सदियों पुरानी शीशे और दर्पण की कारीगरी में बसती है। इसी विरासत को आधुनिक रूप देते हुए ज्यामितीय आकृतियों वाले ड्रॉप इयररिंग्स चलन में हैं। इनमें गोल, चौकोर, त्रिकोण और सितारे जैसी आकृतियों में असली कांच जड़े होते हैं, जिनके किनारों पर महीन चांदी के मोती लगे रहते हैं। जब आप गरबा के मैदान में चक्करदार घूमर और फेरे लेती हैं, तो पंडाल और मंच की रोशनी इन छोटे शीशों पर पड़कर चारों तरफ चमकती है। यह जगमगाहट नृत्य करते समय आपको पूरे उत्सव का मुख्य आकर्षण बना देती है।
देवी-देवताओं की आकृतियों वाले दक्षिण भारतीय टेंपल ज्वेलरी झुमके
उत्तर और पश्चिम के गुजराती उत्सवों में दक्षिण भारतीय मंदिर शैली के आभूषणों का यह अनूठा संगम काफी सराहा जा रहा है। माता रानी, विघ्नहर्ता गणेश अथवा कमल के पुष्पों की बारीक नक्काशी से सजे ये झुमके नवरात्रि के भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण में पूरी तरह समा जाते हैं। यदि आपकी चनिया चोली में गोटा-पत्ती का किनारा या भारी जरी का काम मौजूद है, तो सुनहरी चमक वाले ये टेंपल झुमके उस परिधान के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। यह शैली परंपरा और भक्तिभाव का एक बहुत ही संतुलित रूप प्रस्तुत करती है।
मोतियों और चांदी के घुंघरू वाले मिनिमलिस्ट डैंगलर्स
यदि आप अधिक तड़क-भड़क, भारीपन और चमक-दमक से बचते हुए सादगीपूर्ण रूप अपनाना चाहती हैं, तो यह न्यूनतम शैली आपके लिए ही गढ़ी गई है। सूक्ष्म सफेद मोतियों और छोटी-छोटी चांदी की घंटियों यानी घुंघरुओं से बने ये डैंगलर्स बेहद शांत और सौम्य दिखते हैं। जब आप डांडिया के कदम आगे बढ़ाती हैं, तो इन घुंघरुओं की धीमी छन-छन गरबा के संगीत और ताल के साथ स्वाभाविक रूप से घुलमिल जाती है। यह उन लोगों को बहुत भाता है जो भारी श्रृंगार के बिना भी एक सहज और गरिमामयी पहचान कायम रखना पसंद करते हैं।

















