इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में डेटिंग ऐप्स पर साथी की तलाश करना कई बार अप्रत्याशित फजीहत का सबब बन जाता है। किसी अजनबी से हुई निजी बातचीत, अजीबोगरीब बायो या किसी की खामियों को सोशल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल करके हंसी का पात्र बनाना इन दिनों एक आम चलन बन चुका है। इसी सार्वजनिक बदनामी और डिजिटल प्राइवेसी के हनन को रोकने के लिए लोकप्रिय डेटिंग ऐप हिंज ने भारत में स्क्रीनशॉट पर रोक लगाने का प्रायोगिक परीक्षण शुरू किया है। इस नए सुरक्षा फीचर के तहत प्लेटफॉर्म उन सभी पेजों पर स्क्रीनशॉट लेने की सुविधा को ब्लॉक कर रहा है, जहां यूजर की पहचान उजागर करने वाली निजी जानकारियां मौजूद होती हैं।
वायरल कंटेंट और सार्वजनिक फजीहत की अंधी दौड़
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक और एक्स पर अजीब प्रोफाइल प्रॉम्प्ट्स, अटपटी पिकअप लाइन्स और बातचीत के स्क्रीनशॉट साझा करके फॉलोअर्स बटोरने वाले कई अकाउंट्स सक्रिय हैं। डेटिंग कोच चाड फ्रैंकलिन, जो इंटरनेट पर @DefundSimping नाम से सामग्री साझा करते हैं और टिकटॉक पर जिनके 5,12,000 फॉलोअर्स हैं, अपने काम के लिए कई बार क्लाइंट्स की बातचीत सार्वजनिक करते हैं। चाड फ्रैंकलिन अपने परामर्श के लिए लोगों से 5,000 डॉलर से अधिक की फीस लेते हैं। उनका मुख्य फोकस उन पुरुषों की मदद करना है जो ब्रेकअप या तलाक के बाद के दौर से गुजर रहे हैं, ताकि वे महिलाओं को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देने या सिर पर चढ़ाने के अपने व्यवहार को बदल सकें।
बीते सितंबर के दौरान चाड फ्रैंकलिन ने एक निजी बातचीत का स्क्रीनशॉट साझा किया था जिसमें एक महिला ने उबर कैब का खर्च उठाने में असमर्थता जताई थी, जिस पर उन्होंने गरीब महिलाओं को डेट न करने की सलाह लिखी थी। उसी महीने में उन्होंने हिंज ऐप पर अपने एक क्लाइंट की सफल बातचीत का वीडियो भी अपलोड किया था, जिसमें मार्गरीटा ड्रिंक्स के साथ फ्लर्ट करने की बात कही गई थी। उस वीडियो क्लिप में चाड फ्रैंकलिन ने कहा था कि पुरुष इसी तरह की बातचीत तलाशते हैं जहां पुरुष नेतृत्व करें और महिलाएं पीछे चलें। 30 वर्षीय चाड फ्रैंकलिन मानते हैं कि साल 2026 में ऑनलाइन रहने का मतलब ही यह है कि कोई भी व्यक्ति अनचाहे तौर पर किसी दिन इंटरनेट का मुख्य पात्र बन सकता है। उनका कहना है कि हर ऐप यूजर जानता है कि वह किसी के लिए हंसी का जरिया बन सकता है, हालांकि कोई भी ऐसी जिल्लत का हकदार नहीं होता।
भारत में हिंज का नया प्राइवेसी कदम
हिंज ने भारत में अपनी प्राइवेसी नीति को कड़ा करते हुए उन पेजों पर स्क्रीनशॉट लेने की क्षमता को ब्लॉक करना शुरू किया है जिनमें व्यक्तिगत पहचान जुड़ी होती है। इनमें डिस्कवर, लाइक्स यू और स्टैंडआउट्स जैसे प्रमुख सेक्शन शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले एक्टिव यूजर्स की संख्या वर्तमान में 30 मिलियन यानी 3 करोड़ तक पहुंच चुकी है। कंपनी का उद्देश्य इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए सिंगल यूजर्स के बीच भरोसा कायम करना और ऐप के साथ उनके जुड़ाव को सुरक्षित बनाना है।
हालांकि राया और ग्राइंडर जैसे कुछ अन्य डेटिंग ऐप्स में पहले से स्क्रीनशॉट प्रोटेक्शन की सुविधा मौजूद है, लेकिन हिंज के लिए यह पहला मौका है जब उसने ऐसा कदम उठाया है। भारत में मिलने वाले नतीजों और फीडबैक के आधार पर ही कंपनी यह तय करेगी कि इस फीचर को दूसरे देशों में लागू किया जाए या नहीं। फिलहाल हिंज की अमेरिका या अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस रोक को हरी झंडी देने की कोई योजना नहीं है। कंपनी के प्रतिनिधि का कहना है कि यह सुरक्षा उपाय कमेंट फिल्टर और 'डिड दिस बॉदर यू?' जैसे टूल्स की तरह ही यूजर्स को अपनी निजी जानकारियों के साझा होने पर नियंत्रण देने का प्रयास है।
सोशल मीडिया पर राहत और नैतिक बहस
भारत में स्क्रीनशॉट की सुविधा बंद होने की खबर सामने आते ही इंटरनेट पर जोरदार चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। लेखक ट्रेस डीन ने एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों ने डेटिंग ऐप पर मौजूद रहने को एक तरह की चौतरफा निगरानी और अपनी व्यक्तिगत क्रूरता दिखाने की खिड़की में तब्दील कर दिया है। उन्होंने इसे ऑनलाइन डेटिंग के इतिहास में वर्षों बाद हुआ पहला नैतिक सुधार करार दिया।
वहीं एक्स यूजर @randy_mossad ने लिखा कि लीक हुई चैट के जरिए प्यार तलाश रहे किसी सीधे-सादे इंसान के अपमानित होने से बेहतर है कि दस लाख धोखेबाज बिना सजा के छूट जाएं। फ्लोरिडा की कंटेंट क्रिएटर कियारा, जिन्होंने पहले ऐसे पुरुषों को बेनकाब करने के लिए स्क्रीनशॉट पोस्ट किए थे जो अपनी प्रोफाइल में अत्यधिक अश्लील या असम्मानजनक थे, उन्होंने भी इस बदलाव का समर्थन किया। कियारा का कहना है कि वर्तमान में पुरुषों के प्रति नफरत का माहौल इस कदर बढ़ गया है कि कई महिलाएं सिर्फ इसलिए पुरुषों की प्रोफाइल सार्वजनिक कर रही हैं क्योंकि वे उन्हें पसंद नहीं आईं, जो कि सरासर गलत और नीचतापूर्ण व्यवहार है।
प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच गहराता टकराव
स्क्रीनशॉट लेने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से सुरक्षा को लेकर भी कुछ चिंताएं उभरती हैं। कंप्यूटर मीडिएटेड कम्युनिकेशन के जर्नल में प्रकाशित 2025 के एक अध्ययन के अनुसार, स्क्रीनशॉट प्राइवेसी में अशांति पैदा करते हैं क्योंकि ये संदेश पाने वाले को मूल प्रेषक की सहमति या जानकारी के बिना बातचीत को हमेशा के लिए सहेजने और बांटने की छूट देते हैं। यह फीचर आपसी नियंत्रण की सीमा को खत्म कर देता है और संदर्भ को मिटा देता है।
इसके विपरीत, कई महिलाओं के लिए प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट लेना संभावित साथी की जांच-परख के लिए जरूरी सुरक्षा कवच रहा है। संचार शोधकर्ता लिजी ली बताती हैं कि प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच हमेशा एक तनाव रहता है। स्क्रीनशॉट के जरिए अनुचित व्यवहार का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है या किसी अजनबी से मिलने से पहले दोस्तों की राय ली जा सकती है। 'आर वी डेटिंग द सेम गाय?' जैसे ऑनलाइन समुदाय भी महिलाओं द्वारा अपनी सुरक्षा चिंताओं को साझा करने के लिए स्क्रीनशॉट के इस्तेमाल से ही खड़े हुए हैं। हालांकि, हिंज ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं की रिपोर्ट करने के लिए यूजर्स अपने मैच के साथ चैट का स्क्रीनशॉट लेना जारी रख सकेंगे, जिससे महिलाओं को उत्पीड़न की स्थिति में रिपोर्ट करने की सुविधा मिलती रहेगी। हिंज के सामुदायिक दिशा-निर्देशों में उत्पीड़न, बदमाशी और डराने-धमकाने पर पूरी तरह रोक है।
दूसरों के डेटा पर अधिकार की मानसिकता
सिराक्यूज यूनिवर्सिटी में प्राइवेसी और उभरती तकनीकों पर शोध करने वाली सहायक प्रोफेसर एलेक्सिस इंगबर का मानना है कि एक दर्शक के तौर पर यह साफ दिखता है कि स्क्रीनशॉट शेयर करना प्राइवेसी का उल्लंघन है और कोई भी नहीं चाहेगा कि उसके साथ ऐसा हो। लेकिन इस असुविधा के बावजूद लोगों ने ऐसा व्यवहार बंद नहीं किया है। डेटिंग प्रोफाइल का मजाक उड़ाना दरअसल दूसरों के निजी डेटा पर अनधिकृत हक जताने की व्यापक मानसिकता को दर्शाता है।
दूसरी ओर, चाड फ्रैंकलिन का मानना है कि यूजर्स को सोशल मीडिया पर उपहास का विषय बनने से बचाना डेटिंग ऐप्स का काम नहीं है। उनके अनुसार, अगर कोई ड्रैगन की मांद में कदम रखता है तो ड्रैगन के काटने का खतरा हमेशा बना रहता है। हालांकि, अपने 20 मौजूदा क्लाइंट्स के साथ काम करते हुए वह स्क्रीनशॉट में हर नाम, चेहरे और आंख को छिपाने का प्रयास करते हैं ताकि लोग सार्वजनिक हमले के शिकार न हों। फ्रैंकलिन का कहना है कि अगर कोई खुद की पहचान उजागर होने से पूरी तरह बचना चाहता है, तो उसे डेटिंग ऐप्स पर जाना ही नहीं चाहिए। इसके बजाय डॉग पार्क या फार्मर्स मार्केट जाकर पुराने पारंपरिक तरीके से बातचीत शुरू करनी चाहिए।


















