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नकली काली मिर्च की मिलावट से बिगड़ सकती है सेहत, घर पर ऐसे करें असली की पहचानजीवनशैली
9 अक्तू॰ 2026, 4:00 pm (2 घंटे पहले)· 0

नकली काली मिर्च की मिलावट से बिगड़ सकती है सेहत, घर पर ऐसे करें असली की पहचान

सूप, सलाद और गरम मसाले में इस्तेमाल होने वाली महंगी काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज और रासायनिक रंग मिलाए जा रहे हैं, जिन्हें आसान घरेलू तरीकों से परखा जा सकता है।

भारतीय खानपान और पारंपरिक घरेलू नुस्खों में काली मिर्च एक बेहद जरूरी मसाला मानी जाती है। तीखे स्वाद और खास सुगंध की वजह से इसे मसालों का राजा भी कहा जाता है। चाहे सर्दियों में गर्मागर्म सूप तैयार करना हो, सलाद पर हल्का तीखापन लाना हो, गाढ़ी ग्रेवी पकानी हो या फिर रसोई का खास गरम मसाला बनाना हो, काली मिर्च के बिना बात अधूरी रहती है। देश के भीतर इसकी सबसे ज्यादा पैदावार केरल में होती है, जबकि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा जैसे राज्यों में भी इसकी व्यापक खेती की जाती है। इन राज्यों के खेतों से निकलकर यह मसाला पहले प्रमुख थोक मंडियों में पहुंचता है और वहां से खुदरा दुकानों के जरिए आम परिवारों की रसोई का हिस्सा बनता है।

मुनाफे के चक्कर में मिलावट का बढ़ता खेल

बाजार में उपलब्ध अन्य आम मसालों की तुलना में काली मिर्च की कीमत अधिक होती है। इसी ऊंचे दाम का बेजा फायदा उठाने के लिए कुछ कारोबारी इसमें भारी मिलावट करने लगे हैं। काली मिर्च में सबसे आम मिलावट पपीते के सूखे बीजों की होती है, क्योंकि सूखने के बाद पपीते के दाने पहली नजर में बिल्कुल असली काली मिर्च जैसे ही नजर आते हैं। इसके अतिरिक्त कई बार पूरी तरह नकली दाने तैयार करने के लिए कृत्रिम रंगों, सस्ते अनाजों, विभिन्न बीजों के छिलकों, रिफाइंड तेल, मैदा और गोंद का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। इन रसायनों और सस्ती चीजों की मदद से ऐसे दाने गढ़े जाते हैं जिन्हें बिना जांचे पहचानना सामान्य खरीदार के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जो मसाला आपकी कड़ाही या चाय में जा रहा है, उसकी शुद्धता पर गहरा सवाल खड़ा होता है।

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सेहत के लिए कितनी घातक है मिलावटी काली मिर्च

पारंपरिक तौर पर असली काली मिर्च को स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है और सर्दी, जुकाम या खांसी से राहत पाने के घरेलू उपायों में इसका काढ़ा या चूर्ण बरसों से काम आता रहा है। दूसरी ओर, यदि आपके भोजन में नकली या मिलावटी दाने शामिल हो रहे हैं, तो यह फायदे के बजाय गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा सकता है। पपीते के सूखे बीज और जहरीले कृत्रिम रंगों की वजह से फूड पॉइजनिंग, पेट में भारी गैस, बदहजमी और गंभीर अपच की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा कई लोगों को इनसे त्वचा या सांस की एलर्जी, लगातार जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और पेट में तेज मरोड़ व दर्द का सामना करना पड़ सकता है।

हथेली की रगड़ और बनावट से करें शुद्धता की परख

असली काली मिर्च की सबसे पहली और पुख्ता पहचान उसकी प्राकृतिक सुगंध, कठोर बनावट और बाहरी आकार में छिपी होती है। खरीदारी करते समय या खाना पकाते वक्त यह जरूर देखें कि दानों में से तेज और तीखी महक आ रही है या नहीं। इसे जांचने का सबसे सरल तरीका यह है कि थोड़े से दाने हाथ में लेकर दोनों हथेलियों के बीच अच्छी तरह रगड़ें। रगड़ने के बाद अगर हथेलियों से कोई तेज महक नहीं आती या गंध नदारद रहती है, तो यह नकली होने का साफ संकेत हो सकता है। इसके विपरीत, असली काली मिर्च आकार में लगभग एक समान होती है, छूने पर बेहद सख्त और बाहर से झुर्रीदार महसूस होती है। इसका रंग गहरा काला होता है और चबाने पर मुंह में तुरंत तीखा स्वाद छोड़ती है।

पानी वाला सरल परीक्षण और खरीदारी की सावधानियां

रसोई में मौजूद काली मिर्च को जांचने का एक और अचूक तरीका वाटर टेस्ट यानी पानी का परीक्षण है। एक कांच के साफ गिलास में पानी भरें और उसमें मुट्ठी भर काली मिर्च के दाने डाल दें। कुछ ही पलों में आप देखेंगे कि कुछ दाने सीधे गिलास की तली में जाकर बैठ जाते हैं, जबकि कुछ दाने पानी की ऊपरी सतह पर तैरने लगते हैं। इस परीक्षण में जो बीज पानी के तल में नीचे बैठ जाते हैं, वही असली और ठोस काली मिर्च होते हैं। तैरने वाले दाने अक्सर पपीते के खोखले बीज, बीजों के छिलके या नकली सामग्री से बने होते हैं।

बाजार से काली मिर्च खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, स्रोत और पैकेजिंग पर खास ध्यान देना जरूरी है। जब भी पैकेटबंद मसाला खरीदें, उस पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर अवश्य जांचें। हमेशा जाने-माने ब्रांड और प्रतिष्ठित दुकानदारों से ही खरीदारी करें। टूटे-फूटे दानों को खरीदने से बचें और जिन दानों पर अप्राकृतिक चमक दिख रही हो, उन पर बिल्कुल भरोसा न करें क्योंकि उनमें तेल या पॉलिश लगी हो सकती है। अत्यधिक सस्ती दरों पर मिलने वाली काली मिर्च से भी हमेशा दूरी बनाए रखनी चाहिए।

सवाल-जवाब

भारत में सबसे ज्यादा काली मिर्च किस राज्य में पैदा होती है?
भारत में सबसे अधिक काली मिर्च का उत्पादन केरल में होता है। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा में भी इसकी खेती की जाती है।
काली मिर्च में आमतौर पर किस चीज की मिलावट की जाती है?
काली मिर्च में मुख्य रूप से पपीते के सूखे बीजों की मिलावट की जाती है। इसके अलावा कृत्रिम रंग, सस्ते अनाज, बीज के छिलके, मैदा, रिफाइंड तेल और गोंद से बने नकली दाने भी मिलाए जाते हैं।
पानी के जरिए असली और नकली काली मिर्च की पहचान कैसे की जाती है?
कांच के गिलास में पानी भरकर काली मिर्च डालने पर असली और ठोस दाने तली में बैठ जाते हैं। पपीते के खोखले बीज या नकली दाने पानी की सतह पर तैरते रहते हैं।
मिलावटी काली मिर्च खाने से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं?
नकली या मिलावटी काली मिर्च के सेवन से फूड पॉइजनिंग, बदहजमी, गैस, पेट दर्द, उल्टी, मतली, दस्त और त्वचा या सांस की एलर्जी हो सकती है।
हथेली पर रगड़कर शुद्धता की जांच कैसे होती है?
दानों को हथेलियों के बीच जोर से रगड़ने पर अगर कोई तेज और तीखी गंध नहीं आती है, तो संभावना है कि काली मिर्च नकली या बेअसर है।
काली मिर्च खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर अवश्य जांचें, टूटे-फूटे दानों से बचें और अत्यधिक चमकदार या बहुत सस्ते दामों पर मिलने वाली काली मिर्च न खरीदें।
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