घर पर अपनी पसंद के अनुसार त्वचा की देखभाल से जुड़े उत्पाद तैयार करने का चलन लगातार बढ़ रहा है। बाजार में मिलने वाले ज्यादातर साबुन में विभिन्न रासायनिक यौगिक मिले होते हैं, जिनके बार-बार इस्तेमाल से संवेदनशील या रूखी त्वचा वाले लोगों को खिंचाव महसूस होने लगता है। ऐसे में प्राकृतिक और सौम्य विकल्प के रूप में घर पर बना साबुन एक बेहतरीन समाधान साबित हो सकता है। आमतौर पर पारंपरिक विधि से साबुन बनाते समय कास्टिक सोडा यानी लाई का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसे संभालते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी होती है क्योंकि यह त्वचा और आंखों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। हालांकि, तैयार ग्लिसरीन सोप बेस की मदद से बिना किसी जोखिम के घर पर ही ताजे एलोवेरा जेल से कोमल और असरदार साबुन बनाया जा सकता है।
साबुन बनाने के लिए जरूरी सामग्री और सही अनुपात
शुरुआती स्तर पर साबुन बनाने के लिए सबसे सुरक्षित और आसान तरीका मेल्ट-एंड-पोर ग्लिसरीन बेस का इस्तेमाल करना है। लगभग 500 ग्राम साबुन तैयार करने के लिए मुख्य रूप से 450 ग्राम पारदर्शी या प्राकृतिक ग्लिसरीन सोप बेस तथा 50 ग्राम ताजा एलोवेरा जेल की जरूरत होती है। इस अनुपात का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है, क्योंकि तरल जेल की मात्रा अधिक होने पर साबुन ठीक से जम नहीं पाता और अत्यधिक मुलायम रह जाता है। त्वचा को अतिरिक्त पोषण और नमी देने के लिए इस मिश्रण में थोड़ी मात्रा में शुद्ध नारियल तेल या विटामिन-E मिलाया जा सकता है। यदि साबुन में प्राकृतिक महक पसंद हो, तो लैवेंडर या टी-ट्री एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें डाली जा सकती हैं, हालांकि यह घटक पूरी तरह से वैकल्पिक है और इसके बिना भी साबुन पूरी तरह उपयोगी रहता है।
एलोवेरा जेल निकालने और बेस तैयार करने की विधि
इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ताजे एलोवेरा को सही तरीके से संसाधित करना है। पौधे से ताजा पत्ती काटने के बाद उसमें से पीले रंग का गाढ़ा द्रव निकलता है, जिसे पूरी तरह बाहर बह जाने देना चाहिए। यह पीला रस त्वचा पर जलन या एलर्जी पैदा कर सकता है। जब यह रस निकल जाए, तब पत्तियों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और छिलका हटाकर अंदर का पारदर्शी गूदा अलग कर लें। इस जेल को मिक्सी में अच्छी तरह ब्लेंड करें और फिर छलनी से छान लें, जिससे पत्ती के कोई रेशे या मोटे टुकड़े जेल में न रहें। इसके बाद 450 ग्राम ग्लिसरीन सोप बेस को चाकू से एक समान छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें ताकि वे जल्दी और समान रूप से पिघल सकें। साबुन बेस को कभी भी सीधे बर्तन में डालकर तेज आंच पर नहीं पकाना चाहिए, क्योंकि इससे बेस जल सकता है। इसके स्थान पर डबल बॉयलर तकनीक का उपयोग करें, जिसमें नीचे एक बर्तन में पानी उबाला जाता है और उसके ऊपर रखे दूसरे बर्तन में बेस को भाप की धीमी गर्मी से पिघलाया जाता है।
मिश्रण तैयार करने और सांचे में ढालने की प्रक्रिया
जब सोप बेस पूरी तरह पिघलकर तरल रूप ले ले, तो आंच तुरंत बंद कर दें और तरल को कुछ क्षणों के लिए हल्का ठंडा होने दें। बहुत ज्यादा गर्म बेस में कोई भी सक्रिय तत्व नहीं मिलाना चाहिए। अब इसमें पहले से तैयार 50 ग्राम छना हुआ एलोवेरा जेल डालें और चम्मच की सहायता से एकसार होने तक मिलाएं। यदि आप नारियल का तेल या विटामिन-E जोड़ना चाहते हैं, तो इसी चरण पर थोड़ी मात्रा में मिला दें। खुशबू के लिए चुनी गई एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें भी इसी समय डालकर मिलाई जा सकती हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्तियों को खुशबू वाले तेलों के इस्तेमाल से बचना चाहिए या बेहद सीमित मात्रा रखनी चाहिए। जब सभी सामग्रियां अच्छी तरह घुल-मिल जाएं, तो इस तरल मिश्रण को साफ सिलिकॉन मोल्ड में सावधानीपूर्वक उड़ेल दें। इस सांचे को किसी समतल और सुरक्षित स्थान पर लगभग 4 से 6 घंटे के लिए रख दें ताकि साबुन ठोस आकार ले सके। पूरी तरह जम जाने के बाद साबुन की टिकिया को मोल्ड से धीरे से बाहर निकाल लें।
उपयोग के फायदे, सीमाएं और सुरक्षा सावधानियां
एलोवेरा प्राकृतिक रूप से त्वचा को ठंडक और गहराई से नमी प्रदान करने वाले गुणों के लिए पहचाना जाता है। इस साबुन के इस्तेमाल से त्वचा साफ होने के साथ-साथ मुलायम और तरोताजा बनी रहती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी त्वचा साधारण नहाने के साबुन से अत्यधिक शुष्क हो जाती है। इसके बावजूद, इस घरेलू साबुन को एक्जिमा, गंभीर मुंहासे, त्वचा के पुराने दाग-धब्बों या किसी चिकित्सीय चर्म रोग की दवा या स्थायी उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। त्वचा की सफाई करते समय साबुन महज कुछ पलों के लिए संपर्क में आता है और फिर पानी से बह जाता है, इसलिए इसके चमत्कारी परिणामों की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। घर पर तैयार किसी भी उत्पाद को पूरे शरीर या चेहरे पर लगाने से पहले हाथ या कलाई के छोटे से हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें। यदि किसी भी प्रकार की खुजली, लाली या जलन महसूस हो, तो इसका उपयोग तुरंत रोक देना चाहिए। चूंकि ताजे पौधे के अर्क में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसमें व्यावसायिक उत्पादों जैसे रासायनिक परिरक्षक नहीं होते। परिणामस्वरूप, इस साबुन की शेल्फ लाइफ बाजारू साबुनों जितनी लंबी नहीं होती। बेहतर यही है कि इसे हमेशा छोटे बैच में बनाएं, तैयार साबुन को नमी से दूर सूखी जगह पर रखें और नियमित रूप से ताजा बनाकर उपयोग करें।


















