वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर और कनाडाई डॉलर के बीच कारोबारी मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। 6 अगस्त के बाद के अपने ताजा उच्चतम स्तर को छूने के बाद यह मुद्रा जोड़ी फिलहाल एक मजबूत तकनीकी दायरे में सांस लेती दिख रही है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में निचले स्तरों से सुधार देखने को मिला है, जिसने कनाडाई मुद्रा यानी लूनी को कुछ सहारा दिया है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर की अंतर्निहित मजबूती इस जोड़ी को नीचे फिसलने से रोक रही है। पिछले दो हफ्तों से जारी तेजी के रुख को तकनीकी संकेतकों का समर्थन जरूर मिल रहा है, लेकिन उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी साफ महसूस किया जा सकता है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह मुद्रा जोड़ी फिलहाल 1.40 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.40 से 0.37 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.35 से 1.42 के बीच बना हुआ है।
कच्चे तेल की चाल और कनाडाई केंद्रीय बैंक का सख्त रुख
कमोडिटी से जुड़ी मुद्रा होने के कारण कनाडाई डॉलर का सीधा नाता कच्चे तेल की चाल से रहता है। हालिया सत्रों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों ने लगातार चार दिनों की गिरावट के सिलसिले पर विराम लगाते हुए लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर से हल्की वापसी दर्ज की है। इस रिकवरी ने लूनी को जमीनी स्तर पर टिकने की ताकत दी है। इसके साथ ही बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर टिफ मैकलेम की ओर से सामने आए नीतिगत बयानों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। गवर्नर ने सख्त मौद्रिक रुख की ओर इशारा करते हुए आगाह किया है कि यदि ऊर्जा की बढ़ती लागत और व्यापारिक अनिश्चितताओं का असर व्यापक महंगाई पर पड़ता है, तो केंद्रीय बैंक को लगातार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सहारा लेना पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख ने कनाडाई डॉलर के पक्ष में माहौल बनाया है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इस जोड़ी के लिए ऊपर की राह में एक स्वाभाविक रुकावट साबित हो रहा है।
तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण और अहम सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर
चार्ट पर नजर डालें तो खरीदारों का पलड़ा अब भी भारी नजर आता है, हालांकि कुछ संकेतक सतर्क रहने की चेतावनी दे रहे हैं। स्थिर एमएसीडी हिस्टोग्राम यह दर्शाता है कि बाजार पर खरीदारों का नियंत्रण बरकरार है, जिसमें एमएसीडी 0.00 बनाम सिग्नल -0.00 पर सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि 14 अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 65 से 66 के करीब पहुंच चुका है, जो यह संकेत देता है कि भाव अब खिंचाव वाले दायरे में दाखिल हो रहा है। इसके अलावा फास्ट स्टोकेस्टिक 99 और सिग्नल 93 के साथ ओवरबॉट संकेत दे रहा है, जबकि एडीएक्स 24 के स्तर पर एक सीमित दायरे का रुझान दिखा रहा है। औसत ट्रू रेंज यानी एटीआर 0.01 पर है, जिसे रोजाना के स्टॉप लॉस बफर के तौर पर परखा जा सकता है। मूविंग एवरेज की बात करें तो 20, 50 और 200 दिनों के ईएमए 1.39 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 1.39 और 200-दिवसीय एसएमए 1.38 पर है, जो एक मजबूत गोल्डन क्रॉस के साथ लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करते हैं। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 1.37 से 1.40 के बीच है और मौजूदा कीमत ऊपरी बैंड से ऊपर बनी हुई है।
ऊपर की ओर किसी भी ताजा तेजी को सबसे पहले 1.4052 पर स्थित 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के कड़े अवरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस बाधा को पार करने के बाद अगला अहम स्तर 1.4138 पर मौजूद 78.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट होगा, जो हालिया चक्र के उच्चतम स्तर 1.4248 से पहले तेजी के विस्तार की रक्षा करेगा। वहीं गिरावट की स्थिति में सबसे पहला सहारा 1.3953 पर स्थित 100-दिवसीय एसएमए पर मिलेगा। इसके बाद 1.3992 और 1.3932 के आसपास फाइबोनैचि आधारित मजबूत मांग क्षेत्र मौजूद है। यदि बिकवाली का दबाव गहराता है, तो नीचे की ओर 1.3857 और 1.3736 के संरचनात्मक स्तर सामने आएंगे, जहां समग्र तेजी के ढांचे को बनाए रखने के लिए खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। पिवट स्तर 1.40 पर है, जबकि आर1 और आर2 दोनों 1.41 पर रेजिस्टेंस तथा एस1 और एस2 1.40 पर सपोर्ट पेश कर रहे हैं।
ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर यूएस डॉलर का प्रभुत्व
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक रूप से लेन-देन में इस्तेमाल की जाती है। वर्ष 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालती है, जिसका दैनिक लेन-देन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर सोने पर आधारित था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के खत्म होने के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त कर दिया गया।
फेडरल रिजर्व की नीतियां: ब्याज दरें, क्यूई और क्यूटी का असर
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा एकल कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेड के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को पाने के लिए उसका प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर बहुत बढ़ जाती है, तो फेड दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर पर दबाव आता है।
असाधारण या गंभीर परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का रास्ता भी अपनाता है। क्यूई एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक वित्तीय तंत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ाता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे को कर्ज देने का भरोसा खत्म हो जाता है और केवल दरों में कटौती पर्याप्त नहीं होती। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेड ने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था, जिसके तहत वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदे गए थे। क्यूई से आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी कहा जाता है, जिसमें फेड बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन को दोबारा निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया आम तौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
वैश्विक बाजारों की व्यापक तस्वीर: येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, सोना और बिटकॉइन
वैश्विक करेंसी और कमोडिटी बाजार में अन्य परिसंपत्तियों की चाल भी व्यापक धारणा को स्पष्ट करती है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी ने मंगलवार को एशियाई सत्र में 0.7100 के ऊपर खरीदारी दर्ज की। इसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों से बल मिला। हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व के आक्रामक नजरिए ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा, जिससे इस जोड़ी की तेजी सीमित रही। बाजार अब इस सप्ताह होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर नजरें गड़ाए हुए है।
उधर यूएस डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी एशियाई सत्र में मामूली बढ़त के साथ 157.50 के करीब कारोबार करती दिखी। बैंक ऑफ़ जापान द्वारा सरकारी हस्तक्षेप की आशंका ने जापानी येन की गिरावट को कुछ हद तक थामे रखा। बैंक ऑफ जापान ने नीति सामान्यीकरण के तहत अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। हालांकि इस कदम के बावजूद फेड के सख्त रुख और भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर मजबूत बना रहा। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह यूरोपीय सत्र में 4,315 डॉलर के दायरे में आ गया, जो तीन दिन का निचला स्तर है। फेड की सख्त नीति के कारण बिना ब्याज वाली पीली धातु से पूंजी बाहर निकलती दिखी। वहीं डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 6.7 प्रतिशत उछलने के बाद मंगलवार को 85,500 डॉलर के नीचे कंसोलिडेशन में रहा। हाजिर बिटकॉइन ईटीएफ में सोमवार को करीब 1 बिलियन डॉलर का निवेश आया और स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी जोड़े, जिससे संस्थागत मांग मजबूत बनी हुई है।

















