राजस्थान के सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में हुए सभापति चुनाव में एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यहां निर्दलीय पार्षद के रूप में चुनी गईं अंजू भिंडा ने सभापति पद के कड़े मुकाबले में जीत हासिल कर ली है। कुल 55 पार्षदों वाले सदन में उन्होंने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 30 मत प्राप्त किए, जबकि उनके सामने मैदान में उतरीं कांग्रेस की प्रत्याशी को 25 वोट मिले। इस परिणाम के साथ ही नगर परिषद के शीर्ष पद पर भिंडा परिवार की पकड़ और मजबूत हो गई है।
टिकट कटने के बाद निर्दलीय उतरीं, फिर बनीं पार्टी का चेहरा
अंजू भिंडा की यह जीत इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें पार्षद पद का टिकट नहीं दिया था। पार्टी से निराशा मिलने के बाद भी उन्होंने पीछे हटने के बजाय स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया और शानदार जीत हासिल की। पार्षद बनने के बाद समीकरण तेजी से बदले और बीजेपी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सभापति पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया, जिसके बाद वे मुकाबला जीतने में सफल रहीं।
ससुर और पति के बाद अब बहू संभालेगी शहर की बागडोर
फतेहपुर की स्थानीय राजनीति में भिंडा परिवार का वर्चस्व दशकों पुराना रहा है। अंजू भिंडा पूर्व पालिका अध्यक्ष मधुसूदन भिंडा की पत्नी हैं। इससे पहले उनके ससुर बनवारी लाल भिंडा भी न केवल फतेहपुर के पालिका अध्यक्ष रहे थे, बल्कि वे इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए विधायक भी बने थे। परिवार के राजनीतिक रसूख का दायरा यहीं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मधुसूदन भिंडा के भतीजे की पत्नी ललित भी पूर्व में फतेहपुर की पालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं। अब इस पद पर अंजू भिंडा के काबिज होने से स्थानीय सत्ता की कमान एक ही घराने में बनी हुई है।





















