जैसे-जैसे पूरे देश में मानसून का मौसम जोर पकड़ता है, यह भीषण गर्मी से तो बड़ी राहत दिलाता है, लेकिन वातावरण में अचानक होने वाले इस बदलाव का सीधा असर हमारे आसपास के पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है। इंसानों की तरह ही, पालतू जानवरों को भी इस मौसम में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हवा में बढ़ती नमी, जलभराव और लगातार होने वाली बारिश के कारण पालतू जानवरों के रहन-सहन और खान-पान के तरीकों में तुरंत बदलाव करना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर मौसम के हिसाब से उनकी देखभाल में कोताही बरती जाए, तो इसका उनके स्वास्थ्य पर बेहद बुरा और कभी-कभी जानलेवा प्रभाव पड़ सकता है। आज के समय में कुत्तों को पालने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। अब यह शौक सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी लोग बड़ी संख्या में पालतू कुत्ते अपने घरों में रख रहे हैं। ऐसे में मानसून के दौरान उनकी सही देखभाल की जानकारी होना हर कुत्ता पालने वाले के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
बरसात के मौसम में कुत्तों को होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के तरीकों को समझने के लिए, बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले एक अनुभवी डॉग लवर अर्जुन कुमार के सुझाव बहुत काम आते हैं। अर्जुन कुमार पिछले आठ सालों से कुत्तों की देखभाल और उनके कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। उनका यह प्रेम सिर्फ अपने घर के पालतू कुत्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने इलाके के सड़क पर रहने वाले कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) की भी पूरी लगन से सेवा करते हैं। सड़क पर रहने वाले कुत्तों को नियमित रूप से खाना खिलाना, रात के अंधेरे में सड़क हादसों से बचाने के लिए उनके गले में रेडियम वाले कॉलर पहनाना और उनके इलाज का ध्यान रखना अर्जुन की दिनचर्या का हिस्सा है। इतने सालों के जमीनी अनुभव के कारण उन्हें कुत्तों के व्यवहार और मौसम के अनुसार उन्हें होने वाली बीमारियों की गहरी समझ है।
टिक्स और टिक फीवर का जानलेवा खतरा
अर्जुन कुमार बताते हैं कि मानसून के आते ही कुत्तों के लिए सबसे बड़ा और गंभीर खतरा टिक्स यानी कीड़ों का होता है। बारिश के कारण पैदा होने वाली नमी और सीलन इन परजीवियों को तेजी से पनपने का मौका देती है। बदलते मौसम में अगर कुत्ता पालने वाले थोड़ी सी भी लापरवाही करते हैं, तो उनके पालतू जानवर को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ये टिक्स कुत्तों के शरीर के बालों में छिपकर उनकी त्वचा से चिपक जाते हैं और लगातार उनका खून चूसते रहते हैं। इस कारण एक स्वस्थ कुत्ता भी बहुत जल्दी कमजोर और सुस्त हो जाता है।
यह समस्या सिर्फ खून चूसने और कमजोरी तक सीमित नहीं है। अर्जुन के मुताबिक, कई बार शरीर में टिक्स लगने के कारण कुत्तों को खतरनाक टिक फीवर हो जाता है। यह एक ऐसी जानलेवा बीमारी है, जिसका समय पर इलाज न होने पर कुत्ते की मौत तक हो सकती है। बरसात के दिनों में टिक्स की समस्या इतनी आम हो जाती है कि अर्जुन के पास भी लोगों की तरफ से इस बीमारी को लेकर लगातार कई शिकायतें आती हैं। शरीर में कीड़े लगने से कुत्तों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी गिर जाती है, इसलिए सही समय पर बचाव के कदम उठाना ही उन्हें सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय है।
बचाव के जरूरी उपाय और साफ-सफाई
इस जानलेवा बीमारी से कुत्तों को बचाने के लिए साफ-सफाई और उन्हें सूखा रखना सबसे अहम है। अर्जुन सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में अपने कुत्तों को हमेशा सूखी और सुरक्षित जगह पर ही रखें। उन्हें गलती से भी गीली जगह, कीचड़ या सीलन भरे फर्श पर न बैठने दें। नमी के कारण ही कीड़े और फंगस सबसे ज्यादा हमला करते हैं, इसलिए कुत्ते के शरीर और उसके बिस्तर को पूरी तरह से सूखा रखना सबसे पहला नियम है।
इसके अलावा, रोजमर्रा की दिनचर्या में भी कुछ बदलाव करने होते हैं। जब आप अपने कुत्ते को बाहर घुमाने या टहलाने ले जाते हैं, तो उनके पैरों में कीचड़ और बारिश का गंदा पानी लगना स्वाभाविक है। बाहर से वापस घर लाने के बाद, सबसे पहले उनके पैरों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। धोने के तुरंत बाद एक सूखे और साफ कपड़े की मदद से उनके पंजों और उंगलियों के बीच की जगह को अच्छी तरह से पोंछकर सुखा लें। अगर आप अपने कुत्ते को नहलाते भी हैं, तो इस बात का खास ख्याल रखें कि नहाने के बाद उसके शरीर पर बिल्कुल भी नमी न बचे और वह पूरी तरह से सूख जाए।
रहने की जगह के साथ-साथ खान-पान की स्वच्छता भी मानसून में दोगुनी महत्वपूर्ण हो जाती है। नमी वाले मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं, इसलिए कुत्तों को खाना और पानी हमेशा बिल्कुल साफ-सुथरे बर्तनों में ही देना चाहिए। हर बार खाना देने से पहले बर्तनों को अच्छी तरह धो लें। इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखकर पालतू जानवरों को बरसात की जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है और उन्हें एक स्वस्थ व खुशहाल जिंदगी दी जा सकती है।




















