सरकारी क्षेत्र के बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बनाई गई प्रोत्साहन योजना यानी PLI स्कीम को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। कर्मचारी संगठनों की तरफ से मौजूदा ढांचे पर फिर से विचार करने की मांग उठने के बाद सरकार ने 2025-26 के लिए इस योजना को लागू करने का इरादा टाल दिया है।
वित्त मंत्री और डेलिगेशन के बीच क्या हुई बात
वित्त मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी बयान में बताया गया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय मजदूर संघ यानी BMS की अगुवाई में पहुंचे सरकारी बैंक कर्मचारियों के एक डेलिगेशन के साथ बैठक की। इस मुलाकात में डेलिगेशन ने बैंकिंग सेक्टर और कर्मचारियों से जुड़ी कई परेशानियां वित्त मंत्री के सामने रखीं।
डेलिगेशन ने उठाई कौन सी मांगें
बयान के मुताबिक कर्मचारी प्रतिनिधियों ने एक्स-ग्रेशिया राशि के भुगतान, रिटायर हो चुके कर्मचारियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधाओं और सरकारी बैंक कर्मचारियों पर लागू मौजूदा प्रोत्साहन ढांचे में संशोधन जैसी कई मांगें रखीं। गौर करने वाली बात ये है कि यह पूरा घटनाक्रम एक देशव्यापी बैंक हड़ताल के ठीक पहले सामने आया है, और इसी हड़ताल की सूची में PLI योजना का मसला भी शामिल है।
नवंबर 2024 में आई योजना, अब अमल टला
मंत्रालय ने साफ किया कि कर्मचारी संगठनों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए 19 नवंबर 2024 को अधिसूचित हुई इस योजना को 2025-26 के वित्त वर्ष के लिए फिलहाल लागू न करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को चल रही द्विपक्षीय समझौता और संयुक्त नोट वार्ता के दौरान अलग से उठाया जाएगा। साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया कि बैंक कर्मचारियों, ग्राहकों और पूरे बैंकिंग तंत्र के हित को ध्यान में रखते हुए बातचीत और आपसी समझ के जरिए ही समाधान निकाला जाएगा।
11 सितंबर की हड़ताल क्यों बुलाई गई
दरअसल बैंक कर्मचारी संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU ने पिछले महीने ही 11 सितंबर को देशभर में हड़ताल पर उतरने का ऐलान किया था। इस हड़ताल के पीछे कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगों में हफ्ते में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना में बदलाव, और पेंशन से जुड़े लंबे समय से लटके मसलों को सुलझाना शामिल है।
अफसरों के लिए PLI पर क्यों है नाराजगी
बैंक यूनियनों की सबसे बड़ी आपत्ति खासतौर पर स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए तय की गई PLI योजना को लेकर है। यूनियनों का तर्क है कि यह भारतीय बैंक संघ यानी IBA के साथ पहले हुई सहमति के अनुरूप नहीं है। उस सहमति के मुताबिक PLI का पूरा ढांचा संबंधित बैंक के समग्र प्रदर्शन से जुड़ा होना चाहिए था और स्केल-7 तक के सभी कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए यह एकसमान रहना था।
कितनी रकम तक मिल सकता है PLI
सरकार की मौजूदा योजना के हिसाब से स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों की बेसिक सैलरी के बराबर PLI मिलने का प्रावधान है। इसके उलट स्केल-3 तक के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अधिकतम सीमा सिर्फ 15 दिनों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते के बराबर रखी गई है। यही असमानता यूनियनों की नाराजगी की बड़ी वजह बनी हुई है।



















