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थाणे में इंजीनियरिंग कॉलेज में सीट न मिलने से टूटा छात्र, 95.7 प्रतिशत अंकों के बावजूद उठाया आत्मघाती कदममहाराष्ट्र
8 सित॰ 2026, 7:40 am (1 घंटे पहले)· 2

थाणे में इंजीनियरिंग कॉलेज में सीट न मिलने से टूटा छात्र, 95.7 प्रतिशत अंकों के बावजूद उठाया आत्मघाती कदम

थाणे में 12वीं में 95.7 प्रतिशत अंक लाने वाले एक नाबालिग छात्र ने मनचाहे इंजीनियरिंग संस्थान में सीट न मिलने से निराश होकर आत्महत्या कर ली।

महाराष्ट्र के थाणे जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां पसंदीदा इंजीनियरिंग संस्थान में दाखिला न मिलने से टूटे एक नाबालिग छात्र ने अपनी जान दे दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस छात्र ने 12वीं की साइंस परीक्षा में 95.7 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, फिर भी वह मनचाहे कॉलेज में सीट पक्की नहीं कर सका।

कौन था यह छात्र

पुलिस ने सोमवार को इस घटना का खुलासा किया। बताया गया कि मृतक छात्र नाबालिग था और थाणे के घोड़बंदर रोड पर स्थित हीरानंदानी एस्टेट परिसर में अपने परिवार के साथ रहता था। पुलिस के मुताबिक 12वीं पास करने के बाद वह इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिबपुर से पढ़ाई करने का सपना देख रहा था। वहां वह बीएस-एमएस की डबल डिग्री हासिल करना चाहता था, जो एक प्रतिष्ठित पांच साल का इंटीग्रेटेड कोर्स माना जाता है।

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एडमिशन की दौड़ में क्यों पिछड़ गया छात्र

दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा में शानदार 12वीं के अंकों के बावजूद छात्र को केवल 10,474वीं रैंक मिली। इतनी रैंक पर उसे उस विशेष संस्थान में सीट नहीं मिल सकी, जिसका सपना उसने संजोया था। पुलिस के अनुसार यही नाकामी उसे भीतर तक तोड़ गई और वह लगातार निराशा में डूबता चला गया। परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है, क्योंकि 95.7 प्रतिशत जैसे शानदार नंबर लाने वाला छात्र सिर्फ रैंक के फासले की वजह से इतना हताश हो गया।

जांच अभी जारी

पुलिस ने फिलहाल इतनी ही जानकारी सार्वजनिक की है और मामले में आगे की जांच जारी बताई जा रही है। घटना से जुड़े और तथ्य सामने आने पर स्थिति और साफ हो सकेगी। इलाके में इस हादसे को लेकर हड़कंप मचा हुआ है और लोग एडमिशन की होड़ में बच्चों पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।

मदद के लिए हेल्पलाइन मौजूद

अगर किसी को मानसिक तनाव या निराशा महसूस हो रही हो, तो प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाताओं से बात करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 या 1800-891-4416 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा TISS Icall के नंबर 022-25521111 पर सोमवार से शनिवार, सुबह 8 बजे से रात 10 बजे के बीच भी सहायता ली जा सकती है। अगर आप या आपका कोई परिचित ऐसे किसी तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जरूर संपर्क करें।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
महाराष्ट्र के थाणे जिले में, छात्र घोड़बंदर रोड स्थित हीरानंदानी एस्टेट में रहता था।
छात्र ने 12वीं में कितने अंक हासिल किए थे?
उसने साइंस स्ट्रीम में 95.7 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
छात्र कहां एडमिशन लेना चाहता था?
वह इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिबपुर में बीएस-एमएस डबल डिग्री कोर्स में दाखिला लेना चाहता था।
उसे एडमिशन क्यों नहीं मिल पाया?
प्रवेश परीक्षा में उसे केवल 10,474वीं रैंक मिली, जिससे उस संस्थान में सीट पक्की नहीं हो सकी।
घटना की जानकारी कब सामने आई?
पुलिस ने सोमवार को इस घटना की जानकारी दी।
अगर किसी को मानसिक तनाव महसूस हो तो कहां संपर्क करें?
टोल-फ्री हेल्पलाइन 14416 या 1800-891-4416 पर, या सोमवार से शनिवार सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक TISS Icall नंबर 022-25521111 पर संपर्क किया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·4 मिनट पहले

यह दुखद घटना केवल एक परिवार का व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि हमारी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था और प्रवेश परीक्षाओं की प्रणाली पर एक गंभीर सवालिया निशान है। जब 95.7 प्रतिशत अंक लाने वाला मेधावी छात्र भी सिर्फ एक रैंक के फासले से मानसिक दबाव का शिकार हो जाता है, तो यह स्पष्ट है कि हमारी प्रणाली अंकों के पीछे की प्रतिभा को परखने में विफल हो रही है और छात्रों पर अत्यधिक मानसिक बोझ डाल रही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 मिनट पहले

यह मामला सिर्फ़ एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि हमारी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की संवेदनहीनता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पिसती युवा पीढ़ी की गहरी त्रासदी है। एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि जब तक हमारी व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को अनिवार्य नहीं किया जाता और अंकों की अंधी दौड़ के खिलाफ प्रशासनिक व सामाजिक स्तर पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक हम ऐसे बहुमूल्य जीवन खोते रहेंगे। पुलिस की चल रही जाँच में यह देखना अहम होगा कि क्या इस दबाव के पीछे किसी प्रकार का बाहरी या संस्थागत तनाव भी था।

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