सनातन परंपरा में त्रयोदशी तिथि का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है, लेकिन जब यह तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आज यानी 8 सितंबर 2026 को मंगलवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे हो चुकी है और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे होगा।
प्रदोष काल का महत्व और पूजन का समय
इस व्रत में प्रदोष काल के दौरान महादेव की आराधना करना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मध्य भारत के भोपाल जैसे क्षेत्रों में शाम के वक्त पूजा का प्रदोष काल लगभग शाम 6:40 से रात्रि 9 बजे के बीच तय किया गया है, हालांकि यह समय हर स्थान पर वहां के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है। संध्या बेला का यह समय देवाधिदेव को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
मंगलवार के प्रदोष व्रत की महिमा
सप्ताह के इस वार का सीधा संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, इसलिए मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बहुत अधिक फलदायी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भौम प्रदोष का व्रत रखने से जीवन के तमाम संकटों, मानसिक तनाव और हर प्रकार की बाधाओं से शीघ्र मुक्ति मिलती है। इस दिन साधक शिवलिंग पर जल और दूध की धारा अर्पित करते हैं। इसके पश्चात बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और मौसमी फल अर्पित करके भगवान शिव का ध्यान किया जाता है। सच्ची श्रद्धा के साथ की गई यह आराधना भोलेनाथ को शीघ्र प्रसन्न करती है।
पूजन की पूरी विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के ही पूजा घर में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से आराधना करें। यदि संभव हो तो संध्याकाल में प्रदोष के समय नजदीकी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक जरूर करें। सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें और उसके बाद दूध, दही, शहद तथा घी से अभिषेक करें। इसके बाद फिर से स्वच्छ जल चढ़ाकर बेलपत्र, अक्षत, फूल और फल समर्पित करें। भगवान को चंदन का तिलक लगाएं और दीप प्रज्वलित करें। पूजन के दौरान शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। अंत में आरती करके अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
मंत्र जाप और दान का महत्व
भौम प्रदोष के पावन अवसर पर शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना बेहद सरल और कल्याणकारी माना जाता है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस मंत्र का 108 बार जाप किया जाना चाहिए। पूजन संपन्न होने के बाद प्रसाद का वितरण करें और अपनी क्षमता के मुताबिक किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्त्र का दान अवश्य दें।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए। पूरे दिन मन में भगवान शिव का स्मरण बनाए रखें और किसी भी प्रकार के क्रोध, वाद-विवाद तथा नकारात्मक विचारों से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि यही इस व्रत की मूल भावना है। सबसे अहम बात यह है कि पूजा-पाठ में दिखावे की जगह पर आपकी अटूट श्रद्धा होनी चाहिए। यदि किसी कारणवश मंदिर जाना संभव न हो पाए, तो घर पर ही साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए शिवलिंग या महादेव की तस्वीर के समक्ष पूरी विधि के साथ आराधना की जा सकती है।


















