रसोई में सब्जी की करी बनानी हो या फिर शाम के नाश्ते के लिए कुरकुरे पकौड़े तैयार करने हों, आलू काटते समय अक्सर एक आम परेशानी सामने आती है। जैसे ही आलू के छिलके उतारकर उन्हें टुकड़ों में काटकर थोड़ी देर के लिए खुला छोड़ा जाता है, उनकी कटी हुई सतह सफेद से बदलकर पहले हल्की भूरी और फिर काली पड़ने लगती है। कई बार लोग यह मान बैठते हैं कि आलू अंदर से खराब हो चुके हैं और उन्हें फेंकने का विचार करने लगते हैं, मगर असलियत में हर बार ऐसा नहीं होता है। जब आलू कटता है, तो उसके भीतर मौजूद प्राकृतिक रासायनिक यौगिक सीधे तौर पर खुली हवा के संपर्क में आ जाते हैं। हवा में मौजूद ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया होते ही उनमें ऑक्सीडेशन यानी ऑक्सीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसकी वजह से उनका प्राकृतिक रंग बदलने लगता है। रसोई में मौजूद कुछ बेहद आसान और घरेलू उपायों की मदद से कटे हुए आलुओं को घंटों तक बिना रंग बदले बिल्कुल ताजा बनाए रखा जा सकता है।
नींबू और ठंडे पानी का असरदार मेल
कटे हुए आलुओं को काला होने से बचाने के लिए सबसे आसान और कारगर उपाय है नींबू के रस और ठंडे पानी का इस्तेमाल। इसके लिए एक गहरे और बड़े कटोरे में साफ ठंडा पानी भरें और उसमें कटे हुए आलू के टुकड़े डाल दें। इसके बाद उसी पानी में एक या दो नींबू का ताजा रस अच्छी तरह निचोड़कर मिला दें। नींबू के रस में स्वाभाविक रूप से सिट्रिक एसिड मौजूद होता है, जो ऑक्सीडेशन की रासायनिक प्रक्रिया को काफी धीमा करने का काम करता है। इसके साथ ही पानी आलू की कटी सतह और बाहरी हवा के बीच एक मजबूत ढाल बन जाता है। सतह पर सीधी हवा न लगने की वजह से आलू के टुकड़े जल्दी भूरे या काले नहीं पड़ते और उनका रंग प्राकृतिक बना रहता है।
इस आसान तरीके से करें आलू स्टोर
इस घरेलू तरीके को आजमाने के लिए सबसे पहले आलुओं के छिलके उतार लें और अपनी रेसिपी या जरूरत के अनुसार उन्हें मनपसंद आकार में काट लें। इसके तुरंत बाद एक बड़े बर्तन या कटोरे में पर्याप्त मात्रा में ठंडा पानी लें। अब इसमें कटे हुए आलू डालें और साथ में एक से दो नींबू का रस निचोड़ दें। यहां इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि आलू के सभी टुकड़े पानी के अंदर पूरी तरह से डूबे होने चाहिए, ताकि कोई भी कोना हवा के संपर्क में खुला न रहे। पकाने से ठीक पहले तक आलुओं को इसी घोल में डूबा रहने दें। जब भी आपको सब्जी या पकौड़े पकाने हों, आलुओं को पानी से बाहर निकालें और साधारण साफ पानी से एक बार धोकर बेझिझक इस्तेमाल कर लें।
बिना नींबू के भी सुरक्षित रहेंगे टुकड़े
यदि कभी रसोई में नींबू उपलब्ध न हो, तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आप कटे हुए आलुओं को केवल पर्याप्त ठंडे पानी में पूरी तरह डुबोकर भी रख सकते हैं। सादे ठंडे पानी की परत भी आलुओं का हवा से सीधा संपर्क तोड़ देती है, जिससे रंग बदलने की रफ्तार काफी हद तक मंद पड़ जाती है। अगर आपको इन कटे हुए आलुओं को कुछ घंटों से ज्यादा देर तक सुरक्षित रखना है, तो उस पानी से भरे कटोरे या कंटेनर को उठाकर सीधे फ्रिज के अंदर रख दें। ठंडे तापमान और पानी के आवरण से आलू लंबे समय तक पूरी तरह फ्रेश और साफ बने रहेंगे।
पहचानें कि आलू खाने लायक है या नहीं
आलू की सतह का रंग बदलना या हल्का भूरा पड़ना ज्यादातर मामलों में सिर्फ ऑक्सीडेशन का सामान्य परिणाम होता है और इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि आलू अंदर से सड़ चुका है। यह सामान्य रासायनिक बदलाव है जो खाने की गुणवत्ता को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके बावजूद इस्तेमाल से पहले आलुओं की जांच जरूर करनी चाहिए। अगर आलू के टुकड़े छूने में जरूरत से ज्यादा नरम, पिलपिले या चिपचिपे महसूस होने लगें, या फिर उनमें से किसी किस्म की अजीब दुर्गंध और सड़ने के लक्षण नजर आएं, तो ऐसे आलुओं का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और उन्हें तुरंत फेंक देना ही सुरक्षित रहता है।













