आगरा में मकान बनवाने की सोच रहे लोगों के सामने अक्सर यह असमंजस रहता है कि दीवारों की चिनाई के लिए पारंपरिक लाल ईंट का इस्तेमाल किया जाए या फिर आधुनिक सफेद AAC ब्लॉक को चुना जाए। भवन निर्माण के क्षेत्र में पिछले 16 वर्षों से सक्रिय एबी कंस्ट्रक्शन से जुड़े सिविल इंजीनियर अजय भदौरिया ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनका कहना है कि किसी भी भवन की मजबूती और दीर्घायु इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी संरचना और डिजाइन के अनुकूल सामग्री का सही चयन किया गया है या नहीं। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले किसी पेशेवर इंजीनियर से परामर्श करना हमेशा समझदारी का कदम माना जाता है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की संरचनात्मक समस्या का सामना न करना पड़े।
वजन और दीवारों के लिहाज से अंतर
लाल ईंट और AAC ब्लॉक के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके वजन और आकार का होता है। सफेद AAC ब्लॉक पारंपरिक लाल ईंट की तुलना में काफी हल्के होते हैं और आकार में भी बड़े आते हैं। इस विशेषता के कारण मिस्त्रियों के लिए दीवारों की चिनाई का काम तेजी से करना संभव हो जाता है, जिससे समय की भी बचत होती है। अजय भदौरिया के अनुसार, AAC ब्लॉक के हल्के होने की वजह से इनका उपयोग मुख्य रूप से मकान की अंदरूनी दीवारों में किया जाना चाहिए। भवन की ऊपरी मंजिलों पर अंदरूनी दीवारों के निर्माण में इनका प्रयोग करने से इमारत के कुल वजन पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव काफी हद तक कम हो जाता है। इसके विपरीत, बाहरी दीवारों की मजबूती को सर्वोपरि रखते हुए लाल ईंट का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प माना गया है।
कीमत और मजबूती का समीकरण
सामग्री की कीमतों की बात करें तो सफेद AAC ब्लॉक की लागत लाल ईंट की तुलना में अधिक होती है, जो कई बार आम बजट को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा मजबूती के स्तर पर भी दोनों में भिन्नता पाई जाती है। इंजीनियर का स्पष्ट मत है कि लाल ईंट की तुलना में AAC ब्लॉक कुछ मामलों में जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। यदि इन्हें गलत स्थान पर या गलत तकनीकी तरीकों से दीवार में लगा दिया जाए, तो मकान को नुकसान पहुंच सकता है। यही कारण है कि इनका प्रयोग करते समय पूरी तरह से सावधानी बरतने और केवल इंजीनियर के दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जाता है। हर मंजिल की जरूरत और डिजाइन के हिसाब से तय किया जाना चाहिए कि किस हिस्से में किस सामग्री का उपयोग किया जाना उचित रहेगा।
निर्माण प्रक्रिया और सामग्री की बनावट
इन दोनों सामग्रियों को तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह से एक-दूसरे से जुदा होती है। पारंपरिक लाल ईंट को मुख्य रूप से उपजाऊ मिट्टी से तैयार किया जाता है और फिर उसे ईंट भट्टों में बहुत तेज तापमान पर पकाकर मजबूत बनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, सफेद AAC ब्लॉक का निर्माण करने के लिए सीमेंट, चंबल की रेत, चूना और एल्युमिनियम पाउडर जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। इन सभी घटकों को एक निश्चित और निर्धारित अनुपात में आपस में मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एल्युमिनियम पाउडर रासायनिक प्रतिक्रिया करता है, जिससे मिश्रण में गैस के छोटे-छोटे बुलबुले बनने लगते हैं और ब्लॉक के भीतर अत्यंत सूक्ष्म छिद्र विकसित हो जाते हैं। इसी अनूठी निर्माण प्रक्रिया के कारण AAC ब्लॉक पारंपरिक लाल ईंट की अपेक्षा इतने हल्के और हवादार बन पाते हैं।
सीलन से बचाव और अन्य जरूरी उपाय
केवल सही ईंट या ब्लॉक चुन लेने भर से मकान पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता है। भवन के भीतर सीलन की समस्या को रोकने और दीवारें मजबूत बनाए रखने के लिए केवल सामग्री का चयन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निर्माण के दौरान उचित वॉटरप्रूफिंग तकनीक का इस्तेमाल करना, उच्च गुणवत्ता वाला प्लास्टर करवाना और बारिश तथा घरेलू पानी के निकास के लिए सटीक ड्रेनेज व्यवस्था तैयार करना भी उतना ही अनिवार्य है। भवन की मूल संरचना, उसका नक्शा और इंजीनियर की तकनीकी सलाह को ध्यान में रखकर ही निर्माण सामग्री का अंतिम चयन करना चाहिए ताकि मकान लंबे समय तक सुरक्षित और सुंदर बना रहे।




















