घर की बालकनी या बगीचे को सुंदर बनाने के लिए लोग कई तरह के फूल लगाते हैं, लेकिन जब एक ही पौधे पर दो अलग-अलग रंगों के गुलाब खिलते हैं, तो वह आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यदि आप भी एक ही गमले के भीतर लाल और सफेद दोनों तरह के गुलाब खिलाना चाहते हैं, तो इसके लिए ग्राफ्टिंग और बडिंग की तकनीक सबसे कारगर साबित होती है। सही मौसम, उचित मिट्टी का अनुपात और संतुलित पोषण के साथ इस प्रक्रिया को अपनाकर मनचाहा परिणाम पाया जा सकता है।
ग्राफ्टिंग और बडिंग के जरिए दो रंगों के फूल तैयार करने का तरीका
राकेश राजवाड़े के अनुसार, एक ही पौधे से दो रंगों के फूल प्राप्त करने के लिए सबसे पहले एक मजबूत और अच्छी तरह विकसित जड़ों वाले रूट स्टॉक का चयन करना पड़ता है। इसके बाद जिस रंग के फूल चाहिए, उन पौधों से स्वस्थ और परिपक्व कलियां चुनी जाती हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि चुनी गई कली पूरी तरह विकसित हो, लेकिन वह फूल के रूप में खिली न हो।
लाल और सफेद गुलाब के मूल पौधों से साफ और धारदार चाकू की मदद से अलग-अलग कलियां निकाली जाती हैं। इसके बाद मुख्य रूट स्टॉक की दो अलग-अलग टहनियों की छाल पर T आकार का चीरा लगाया जाता है। निकाली गई कलियों को इस कटे हुए हिस्से के अंदर बहुत सावधानी से बैठाया जाता है। कली को सही जगह पर बैठाने के बाद उसे विशेष टेप से अच्छी तरह बांध दिया जाता है, जिससे बाहरी हवा या फंगस का असर न हो।
बडिंग के लिए अनुकूल समय और मौसम का महत्व
गुलाब के पौधे में बडिंग करने के लिए साल के कुछ खास महीने सबसे बेहतर माने जाते हैं। राकेश राजवाड़े के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर का समय बडिंग कार्य के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। यदि किसी कारणवश यह समय छूट जाता है, तो फरवरी और मार्च के महीनों में भी यह प्रक्रिया दोबारा की जा सकती है।
सितंबर के अंत या अक्टूबर के समय बडिंग करने पर नवंबर तक नई कली या बड निकलना शुरू हो जाती है। इसके बाद पौधे में शाखाएं विकसित होकर फूलों के आने की प्रक्रिया गति पकड़ लेती है। सामान्य परिस्थितियों में कली बांधने के लगभग एक महीने के भीतर नई कोपलें और बड दिखाई देने लगती हैं।
प्रक्रिया के बाद पौधे की देखभाल और रखरखाव
बडिंग का काम पूरा होने के बाद पौधे को बेहद सतर्कता के साथ रखना चाहिए। पौधे को ऐसी जगह पर स्थापित करना जरूरी है जहां सीधी तेज बारिश या गमले में अतिरिक्त पानी न भरे। मिट्टी के भीतर नमी का संतुलन बना रहना आवश्यक है, लेकिन गमले में पानी ठहरना या जमा होना पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है। नियमित और संतुलित सिंचाई इस दौरान सबसे अहम भूमिका निभाती है।
गुलाब की प्रमुख किस्में और उनकी विशेषताएं
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, गुलाब के पौधों को मुख्य रूप से तीन लोकप्रिय श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इनमें मिनिएचर, टी हाइब्रिड और फ्लोरीबंडा शामिल हैं। प्रत्येक किस्म की अपनी विशिष्ट पहचान होती है।
मिनिएचर गुलाब की किस्म में छोटे आकार के बहुत सारे फूल खिलते हैं। दूसरी तरफ, टी हाइब्रिड किस्म की खूबी यह होती है कि इसके एक तने पर सामान्यतः एक बड़ा और आकर्षक फूल देखने को मिलता है। फ्लोरीबंडा किस्म की बात करें तो इसमें फूलों के पूरे गुच्छे एक साथ खिलते हैं, जो पौधे को बेहद घना और सुंदर रूप देते हैं।
गमले का चुनाव और मिट्टी का आदर्श मिश्रण
गुलाब के बेहतर विकास के लिए गमले का आकार सही होना चाहिए। इसके लिए 12 से 16 इंच या उससे बड़े आकार का गमला सबसे अच्छा माना जाता है। यदि गमला छोटा होगा, तो जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी और पौधे का विकास रुक सकता है।
पौधे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए मिट्टी का सटीक मिश्रण तैयार करना चाहिए। विशेषज्ञ के अनुसार, मिश्रण में 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत अच्छी तरह से सड़ी हुई कंपोस्ट, 10 प्रतिशत बालू या रेती, 15 प्रतिशत कोकोपीट या धान की भूसी (राइस हस्क), और 5 प्रतिशत नीमखली व बोनमील का अनुपात रखना चाहिए। बालू मिट्टी में जल निकासी और हवा की आवाजाही को बनाए रखती है, जबकि कोकोपीट या धान की भूसी नमी को संरक्षित रखती है। यह संतुलित मिश्रण पौधे की जड़ों को मजबूती और आवश्यक पोषण देता है।
संतुलित खाद और पोषण प्रबंधन
पौधे की तेज और हरी-भरी वृद्धि के लिए संतुलित खाद देना आवश्यक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, NPK 19:19:19 का प्रयोग बेहद हल्की मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही बोनमील, नीमखली और पूरी तरह सड़ी हुई जैविक खाद का इस्तेमाल पौधे के लिए फायदेमंद रहता है। पौधे को जरूरत से अधिक खाद देने के बजाय उसकी आवश्यकता को समझकर ही खाद डालनी चाहिए।



















