घर के इंटीरियर को खूबसूरत और व्यवस्थित बनाने में फर्नीचर की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। इसी चाहत में लोग बाजार से नए-नए डिजाइन के सोफा, पलंग और टेबल खरीदने के लिए मोटी रकम खर्च करते हैं। इसके बावजूद कई बार ग्राहक सही लकड़ी का चुनाव न कर पाने की वजह से ठगी के शिकार हो जाते हैं। कुछ ही समय में फर्नीचर की चमक फीकी पड़ जाती है या उसमें खराबी आने लगती है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पछतावा भी होता है। इस तरह की असुविधा से बचने के लिए फर्नीचर बनवाते समय हमेशा मजबूत, चमकदार और टिकाऊ लकड़ी का ही चयन करना चाहिए। इसके अलावा, लकड़ी खरीदकर अपनी उपस्थिति में काम करवाना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
कारोबारी अमलेश कुमार की 40 साल पुरानी पारिवारिक विरासत
बिहार के जहानाबाद जिले अंतर्गत आने वाले घोसी प्रखंड के रहने वाले अमलेश कुमार लंबे समय से फर्नीचर के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वे अपने परिवार की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। अमलेश कुमार अपनी इस फर्नीचर दुकान को अपने दादा जी द्वारा दिया गया एक अनमोल तोहफा मानकर संभाल रहे हैं। उनकी यह दुकान पिछले 40 सालों से लगातार संचालित हो रही है, जबकि अमलेश खुद पिछले 12 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रियता से काम कर रहे हैं। लंबे अनुभव के आधार पर वे ग्राहकों को सलाह देते हैं कि तैयार फर्नीचर खरीदने के बजाय अपनी आंखों के सामने रहकर काम करवाना चाहिए, क्योंकि बाजार में अक्सर लोग गलत लकड़ी की पहचान न कर पाने के कारण धोखे का शिकार हो जाते हैं। इससे उनका पैसा और समय दोनों बर्बाद होता है।
शीशम की लकड़ी की मजबूती और पहचान के नियम
अनुभवी कारीगरों और व्यापारियों के अनुसार, जब भी टिकाऊ फर्नीचर की बात आती है तो शीशम और सागवान को ही सर्वोत्तम माना जाता है। इनमें से शीशम की लकड़ी अपनी अत्यधिक मजबूती और कठोरता के लिए जानी जाती है। शीशम से तैयार किया गया फर्नीचर वर्षों तक खराब नहीं होता और भारी वजन आसानी से सह लेता है। बाजार में शीशम की लकड़ी तीन अलग-अलग श्रेणियों या प्रकारों में उपलब्ध होती है। उत्तम श्रेणी के शीशम की मुख्य पहचान यह है कि वह देखने में स्पष्ट रूप से लाल रंग की होती है। यदि लकड़ी का रंग लाल है, तो वह उच्च गुणवत्ता वाला शीशम माना जाता है और उससे बना सामान काफी टिकाऊ होता है।
सागवान की बनावट, लचीलापन और अनोखी चमक
सागवान की लकड़ी अपनी प्राकृतिक चमक और लचीलेपन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। सागवान की लकड़ी में लाल और पीले रंग का एक सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। जब सागवान से बने फर्नीचर पर फिनिशिंग और पॉलिश की जाती है, तो इसकी चमक अन्य सभी लकड़ियों की तुलना में बहुत अधिक निखर कर आती है। इसकी यही खासियत इसे प्रीमियम लुक देती है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने घरों के लिए सागवान या शीशम की लकड़ी से बने फर्नीचर को ही पहली प्राथमिकता देते हैं। बाजार में इन दोनों लकड़ियों की मांग लगातार तेज बनी रहती है, जिसके कारण इनकी कीमतें भी अन्य सामान्य लकड़ियों के मुकाबले अधिक होती हैं।
प्रति घन फीट दरें और पूरे फर्नीचर सेट का कुल खर्च
बाजार में उपलब्ध लकड़ियों की कीमतों की बात करें तो शीशम की लकड़ी लगभग ₹2200 प्रति घन फीट की दर से मिलती है। वहीं अच्छी गुणवत्ता वाली सागवान की लकड़ी ₹3200 प्रति घन फीट से लेकर ₹3600 प्रति घन फीट तक के भाव में बिकती है। यदि कोई ग्राहक अपने घर के लिए एक पूरा सेट तैयार करवाता है, जिसमें एक दीवान पलंग, एक सोफा सेट और एक ड्रेसिंग टेबल शामिल हो, तो उसका कुल बजट लकड़ी के प्रकार पर निर्भर करता है। सागवान की लकड़ी से तैयार इस पूरे सेट की बाजार में अनुमानित कीमत करीब ₹80,000 आती है। वहीं यदि यही पूरा सेट शीशम की लकड़ी से बनवाया जाए, तो इसका खर्च लगभग ₹70,000 तक बैठता है। अपनी देखरेख में सही लकड़ी चुनकर काम कराने से फर्नीचर लंबे समय तक नया जैसा बना रहता है।



















