किसी भी पार्टी, समारोह या ऑफिस के काम से लौटने के बाद सुंदर और आकर्षक दिखने के लिए लगाया गया मेकअप हटाना उतना ही आवश्यक है जितना कि उसे लगाना। व्यस्तता या अत्यधिक थकान के कारण कई लोग रात को बिना मेकअप हटाए ही सो जाते हैं, जो कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर भूल साबित हो सकती है। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, चेहरे पर घंटों तक सौंदर्य प्रसाधन, पसीना, प्रदूषण और धूल टिके रहने से त्वचा के रोमछिद्र पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। इस स्थिति के कारण चेहरे पर मुंहासे उभरने लगते हैं, त्वचा का रूखापन बढ़ने लगता है, जलन महसूस होती है, लालिमा छा जाती है और चेहरा पूरी तरह बेजान नजर आने लगता है। इन समस्याओं से बचने के लिए एक अनुशासित और सही स्किन केयर रूटीन का पालन करना अनिवार्य है।
मेकअप हटाने की सही शुरुआत और तकनीक
सौंदर्य प्रसाधनों को हटाने की प्रक्रिया हमेशा सही क्लीनिंग के साथ शुरू होनी चाहिए। खासतौर पर वाटरप्रूफ मस्कारा, लंबे वक्त तक टिकने वाले लिपस्टिक शेड्स और फुल कवरेज फाउंडेशन को केवल साधारण फेसवॉश की मदद से पूरी तरह साफ नहीं किया जा सकता। इस तरह के जिद्दी प्रोडक्ट्स को हटाने के लिए किसी अच्छे मेकअप रिमूवर या ऑयल बेस्ड क्लींजर का उपयोग करना उचित रहता है। त्वचा को साफ करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चेहरे को जोर-जोर से बिल्कुल न रगड़ें, क्योंकि ऐसा करने से त्वचा पर अनावश्यक खिंचाव पैदा होता है और जलन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
आंखों के आसपास का हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए वहां का मेकअप हटाते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। एक कॉटन पैड पर मेकअप रिमूवर की कुछ बूंदें डालकर उसे कुछ सेकंड के लिए पलकों और आंखों पर हल्का सा टिका कर रखें और फिर धीरे-धीरे साफ करें। इस तकनीक से आंखों का मेकअप बिना किसी परेशानी के आसानी से निकल जाता है और आंखों के इर्द-गिर्द मौजूद नाजुक त्वचा को भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है।
डबल क्लीजिंग और टोनर का महत्व
प्रारंभिक सफाई के बाद डबल क्लीजिंग की प्रक्रिया अपनाना त्वचा की गहराई से सफाई के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इस चरण में सबसे पहले ऑयल बेस्ड क्लींजर की सहायता से चेहरे पर जमा मेकअप और अशुद्धियों को बाहर निकाला जाता है। इसके पश्चात पानी आधारित फेस क्लींजर का उपयोग करके त्वचा को एक बार फिर से धोया जाता है ताकि सौंदर्य प्रसाधनों के सूक्ष्म कण और अतिरिक्त तेल का नामोनिशान भी चेहरे पर न बचे।
त्वचा की आंतरिक नमी और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए क्लीजिंग के बाद टोनर का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है। टोनर त्वचा को सुकून देने और उसकी खोई हुई नमी को वापस लाने का काम करता है। चूँकि हर व्यक्ति की त्वचा की प्रकृति अलग-अलग होती है, इसलिए हमेशा अपनी स्किन टाइप के अनुकूल ही टोनर का चयन करना चाहिए। उदाहरण के लिए, हायलूरोनिक एसिड त्वचा को भरपूर हाइड्रेशन प्रदान करता है, जबकि एलोवेरा और ग्लिसरीन जैसे तत्व त्वचा को शांत रखते हैं और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद करते हैं।
मॉइस्चराइजर और समग्र सुरक्षा परत
दैनिक देखभाल के इस पूरे क्रम का सबसे अहम हिस्सा मॉइस्चराइजर लगाना है। कई लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि यदि उनकी त्वचा तैलीय है तो उन्हें मॉइस्चराइजर की कोई आवश्यकता नहीं है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। तैलीय त्वचा वाले लोग हल्के जेल बेस्ड मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि शुष्क त्वचा वाले व्यक्तियों को अधिक हाइड्रेटिंग और क्रीम बेस्ड विकल्पों की जरूरत होती है। सही प्रकार का मॉइस्चराइजर त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।



















