अपने बगीचे या गमले में लगे मोगरे के पौधे को देखकर हर कोई चाहता है कि वह पूरे मौसम सफेद और अत्यंत सुगंधित फूलों से भरा रहे। कई बार देखने में आता है कि पौधा बहुत हरा-भरा दिखाई देता है, लेकिन उसमें फूल बहुत कम आते हैं या कलियां बनती ही नहीं हैं। पौधे की ऐसी स्थिति के पीछे सही देखभाल न होना, धूप की कमी या गलत पोषक तत्वों का मिलना मुख्य कारण होता है। रायबरेली जिले के एसबीवीपी इंटर कॉलेज में गार्डनिंग का काम देख रहे अनिल कुमार के अनुसार, यदि पौधे की देखरेख से जुड़े कुछ बुनियादी नियमों का पालन किया जाए, तो आपका मोगरा पूरे सीजन ढेरों फूलों से लदा रहेगा।
मोगरे के पौधे के लिए धूप और सही स्थान का चुनाव
मोगरे के पौधे के बेहतर विकास और अच्छी पुष्पन प्रक्रिया के लिए धूप सबसे प्राथमिक आवश्यकता है। इस पौधे को नियमित रूप से कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना बेहद जरूरी माना जाता है। यदि गमले को किसी ऐसी जगह पर रखा गया है जहां छांव रहती है, तो पौधे में पत्तियां और शाखाएं तो तेजी से बढ़ेंगी, मगर उसमें कलियां और फूल काफी कम संख्या में आएंगे। इसलिए पौधे या गमले को हमेशा ऐसे खुले स्थान पर रखें जहां दिनभर पर्याप्त और सीधी धूप आती रहे।
सही समय पर छंटाई और प्रूनिंग का महत्व
मोगरे में नई कलियां और फूल तभी अधिक मात्रा में आते हैं जब पौधे की समय-समय पर छंटाई की जाती है। पुरानी, सूखी और कमजोर पड़ चुकी टहनियों को काट देना चाहिए, क्योंकि इससे पौधे से नई और मजबूत शाखाएं निकलती हैं। इन्हीं नई शाखाओं पर ज्यादा कलियां बनती हैं। जब फूल खिलकर खत्म हो जाएं, तो हल्की प्रूनिंग कर देनी चाहिए। ऐसा करने से अगली फ्लश यानी अगले चक्र में पौधे पर पहले से भी अधिक संख्या में कलियां और सफेद फूल देखने को मिलते हैं।
संतुलित खाद और पोषक तत्वों का प्रबंधन
पौधे को फूलों से भरने के लिए सही पोषण देना अत्यंत आवश्यक है। महीने में एक बार मोगरे के पौधे में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट या घर में तैयार की गई जैविक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, केले के छिलकों से तैयार खाद या बोनमील की सीमित मात्रा का उपयोग पौधे के लिए बहुत लाभकारी साबित होता है। केले के छिलके और बोनमील से पौधे को पर्याप्त पोटाश और फॉस्फोरस मिलता है, जो फूलों और कलियों को बनने में मुख्य रूप से मदद करते हैं।
नाइट्रोजन वाली खाद के अत्यधिक उपयोग से बचें
खाद का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि नाइट्रोजन युक्त खाद का अत्यधिक इस्तेमाल न हो। नाइट्रोजन का बहुत अधिक प्रयोग करने से पौधे में केवल पत्तियों की बढ़वार होती है और फूलों का आना कम हो जाता है। इसलिए हमेशा संतुलित खाद का ही चुनाव करें ताकि पत्तियां और फूल दोनों सही अनुपात में विकसित हो सकें।
मौसम के अनुसार सिंचाई और जल निकासी की व्यवस्था
मोगरे में पानी देने का तरीका मौसम के हिसाब से तय किया जाना चाहिए। गर्मियों के दौरान जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूख जाए, तभी पौधे की सिंचाई करें। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गमले या मिट्टी में पानी जमा न होने पाए। गमले में पानी रुकने से जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा धीरे-धीरे कमजोर होकर सूख सकता है। वहीं, बारिश या बरसात के मौसम में जल निकासी की सुचारु व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल जाए।
कीटों और फफूंद से सुरक्षा के उपाय
पौधे को सेहतमंद बनाए रखने और फूलों की संख्या बढ़ाने के लिए उसे कीटों व फफूंद से बचाना जरूरी है। यदि मोगरे की पत्तियों पर कीड़े या फफूंद दिखाई दें, तो तुरंत नीम के तेल के घोल या किसी अन्य जैविक कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए। नियमित और सही समय पर देखभाल करने से पौधा स्वस्थ बना रहता है और उसमें पूरे सीजन सफेद, सुगंधित फूलों की भरमार बनी रहती है, जिससे घर और आंगन की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।



















