घर के किसी कोने में लगा मनी प्लांट सिर्फ हरियाली ही नहीं देता, कई लोग इसे अच्छे और सकारात्मक माहौल के लिए भी पसंद करते हैं. इसकी चमकदार हरी पत्तियां इनडोर सजावट का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं. लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब कुछ महीनों बाद पौधे की रफ्तार थम जाती है. नई पत्तियां निकलनी कम हो जाती हैं, पुरानी पत्तियां पीली दिखने लगती हैं और बेल पहले जैसी तेजी से नहीं बढ़ती. ऐसे में अक्सर लोग बाजार से महंगी खाद और केमिकल वाले प्रोडक्ट उठा लाते हैं, जबकि इसका सस्ता और आसान हल आपकी रसोई में ही रखा है.
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स की मानें तो चाय पत्ती से बना एक खास लिक्विड फर्टिलाइजर मनी प्लांट को वह जरूरी पोषण दे सकता है, जिसकी कमी से उसकी ग्रोथ रुक जाती है. सही तरीके से दिया जाए तो यह घोल पौधे को नई जान देने में बेहद कारगर साबित होता है.
चाय पत्ती मनी प्लांट के लिए फायदेमंद क्यों है
चाय पत्ती में ऐसे तत्व होते हैं जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद नाइट्रोजन हरी पत्तियों के विकास में अहम भूमिका निभाती है. जब चाय पत्ती को सही प्रक्रिया से तैयार करके पौधे में डाला जाता है तो जड़ों को अतिरिक्त पोषण मिलता है और पौधा ज्यादा स्वस्थ व मजबूत बनता है. एक बात ध्यान रखने वाली है कि चाय पत्ती को सीधे मिट्टी में डालने के बजाय सही तरीके से तैयार करके इस्तेमाल करना ज्यादा असरदार माना जाता है, क्योंकि इससे पोषक तत्व पौधे तक बेहतर ढंग से पहुंचते हैं.
पानी और चाय पत्ती का सही अनुपात
सबसे पहले एक साफ बर्तन में एक लीटर साफ पानी लें. इसमें एक बड़ी चम्मच ताजी चाय पत्ती मिलाएं. यहां इस्तेमाल हो चुकी चाय पत्ती के बजाय नई चाय पत्ती ही डालें, क्योंकि इससे पानी में पोषक तत्व ज्यादा घुलते हैं और पौधे को बेहतर फायदा मिलता है.
अब इस मिश्रण को गैस पर रखकर उबालें. जैसे ही अच्छा उबाल आ जाए, आंच धीमी करके इसे 2 से 3 मिनट तक पकने दें. इस दौरान चाय पत्ती के कई तत्व पानी में घुल जाते हैं और यही पानी आगे चलकर एक नेचुरल लिक्विड फर्टिलाइजर बन जाता है, जिसे जड़ें आसानी से सोख लेती हैं.
उबालने के बाद गैस बंद कर दें और घोल को पूरी तरह ठंडा होने दें. गरम घोल कभी भी सीधे पौधे में न डालें, वरना जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. जब पानी सामान्य तापमान पर आ जाए तो उसे छन्नी से छान लें. बची हुई चाय पत्ती को चाहें तो कंपोस्ट में मिला दें, इससे किचन वेस्ट का भी सही इस्तेमाल हो जाएगा.
उबला हुआ घोल काफी गाढ़ा होता है, इसलिए इसे सीधे गमले में डालना ठीक नहीं. एक लीटर तैयार घोल में एक लीटर सादा पानी और मिला लें. इससे मिश्रण हल्का हो जाता है, मिट्टी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और पौधे को संतुलित मात्रा में पोषण मिलता है.
महीने में सिर्फ एक बार ही डालें
तैयार लिक्विड फर्टिलाइजर डालने से पहले गमले की मिट्टी को हल्का ढीला कर लें, ताकि घोल आसानी से जड़ों तक पहुंच सके. इस उपाय को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें. महीने में एक बार इसका इस्तेमाल काफी माना जाता है, क्योंकि ज्यादा मात्रा डालने से मिट्टी का संतुलन बिगड़ सकता है.
सिर्फ खाद से काम नहीं चलेगा
तेजी से ग्रोथ के लिए केवल खाद देना काफी नहीं, पौधे को सही माहौल भी चाहिए. मनी प्लांट को ऐसी जगह रखें जहां अच्छी और तेज, लेकिन अप्रत्यक्ष रोशनी आती हो. खिड़की के पास या बालकनी का ऐसा कोना सबसे अच्छा रहता है जहां भरपूर रोशनी पहुंचती हो, लेकिन सीधी तेज धूप से पौधे को बचाकर रखें. ज्यादा धूप पड़ने पर पत्तियां पीली या भूरी पड़ने लगती हैं.
समय-समय पर पीली और सूखी पत्तियां हटाते रहें और गमले में पानी जमा न होने दें. हफ्ते में एक बार पत्तियों को साफ कपड़े से पोंछें. बेल को सहारा देने के लिए मॉस स्टिक या रस्सी का इस्तेमाल करें. हर कुछ महीनों में मिट्टी की ऊपरी परत बदलते रहें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो मनी प्लांट दोबारा घनी और हरी पत्तियों से भर जाएगा.













