जामनगर के महाराजा पर आ आया था सिमी ग्रेवाल का दिल, जानिए क्यों नहीं मुकाम तक पहुंच पाई वह शाही प्रेम कहानीबेंगलुरु में भारत और वेस्टइंडीज के बीच <a href="https://www.indiatv.in/sports/cricket/ind-vs-wi-5th-t20i-bengaluru-match-can-be-called-off-weather-forecast-rain-threat-chinnaswamy-stadium-2026-10-16-1249171">5वें टी20 मैच</a> में मौसम बन सकता है चुनौतीधार्मिक आस्था और काम को अलग रखें: एकता कपूर के बयान पर बोलीं पूनम पांडे, इमरान खान को दी देश के मामलों से दूर रहने की सलाहरणबीर कपूर ने 'रामायण' के इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च में कन्नड़ बोलकर जीता दिल, यश को लेकर कही यह बातअजय देवगन के जुहू बंगले पर बीएमसी ने की बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माण को किया गया जमींदोजसिमी ग्रेवाल की अनकही दास्तान: जामनगर के पूर्व शासक संग गहरा लगाव और जीवन के अनूठे मोड़घर पर बनाएं होटल जैसे खिले-खिले चावल, पानी में मिलाएं बस यह एक चीजमुंबई इंडियंस के नए हेड कोच की तलाश तेज, माइकल हसी और एरोन फिंच समेत पांच दिग्गजों के नाम सबसे आगेकाव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर की शादी तय, जानिए इनकी शानदार पढ़ाई और कुल संपत्तिनई नवेली रिव्यू (2026): यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी को लेकर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
मुर्गी पालन में बेहतर मुनाफे के लिए शेड निर्माण और आवास प्रबंधन के जरूरी नियमजीवनशैली
18 अक्तू॰ 2026, 5:58 pm (2 घंटे पहले)· 0

मुर्गी पालन में बेहतर मुनाफे के लिए शेड निर्माण और आवास प्रबंधन के जरूरी नियम

मुर्गी पालन में चूजों के सही विकास और बीमारियों से बचाव के लिए शेड की दिशा, हवा का आवागमन और जगह का प्रबंधन बेहद अहम भूमिका निभाता है।

व्यावसायिक स्तर पर मुर्गी पालन शुरू करने वाले अधिकांश पशुपालक केवल अच्छी नस्ल के चयन और महंगे दाने पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि मुर्गियों के स्वस्थ रहने और तेजी से वजन बढ़ाने में उनके आवास की बनावट सबसे निर्णायक कारक साबित होती है। यदि शेड के भीतर ताजी हवा का समुचित संचार न हो, जमीन पर अत्यधिक नमी जमा रहे या सीमित जगह में क्षमता से अधिक पक्षियों को भर दिया जाए, तो मुर्गियों का सामान्य विकास बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके अलावा फार्म में गंदगी और उमस रहने से कई तरह के संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए सफल पोल्ट्री फार्मिंग के लिए बुनियादी निर्माण के समय से ही हर तकनीकी पहलू पर गंभीरता से काम करना जरूरी है।

शेड की सही दिशा और बनावट का निर्धारण

गोंडा में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, मुर्गी फार्म तैयार करते समय उसके ढाँचे की दिशा और माप पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शेड का लंबा हिस्सा हमेशा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर रखना चाहिए, जिससे दिन के समय सीधी और तेज धूप सीधे पक्षियों के संपर्क में न आए। शेड की चौड़ाई लगभग 35 फीट तय की जानी चाहिए, क्योंकि इतनी चौड़ाई रखने से क्रॉस वेंटिलेशन यानी हवा का आर-पार आवागमन प्राकृतिक रूप से सबसे अच्छा बना रहता है। वहीं शेड की कुल लंबाई इस बात पर निर्भर करेगी कि फार्म में कुल कितने पक्षियों को पालने की योजना है और निर्माण के लिए कितनी जमीन उपलब्ध है।

ये भी पढ़ें

शेड की बनावट ऐसी होनी चाहिए जिससे अंदर का माहौल पूरी तरह हवादार रहे और किसी भी हाल में अतिरिक्त गर्मी अथवा हानिकारक गैसें जमा न हो सकें। यदि शेड के भीतर ताजी हवा का निरंतर प्रवाह बना रहता है, तो पक्षियों को सांस लेने में कठिनाई नहीं होती और वे बदलते मौसम के दबाव को आसानी से सहन कर लेते हैं। दीवारों और जालीदार हिस्सों को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए कि बाहरी तेज हवा या बारिश की बौछारें अंदर की नमी न बढ़ाएं, लेकिन शुद्ध हवा का प्रवाह अनवरत जारी रहे।

चूजों की उम्र और वजन के अनुसार जगह का प्रबंधन

मुर्गियों को शेड के फर्श पर कितनी खाली जगह मिलनी चाहिए, यह पूरी तरह उनकी बढ़ती उम्र और शारीरिक वजन पर आधारित होता है। डॉ. राकेश कुमार तिवारी का कहना है कि विशेष रूप से ब्रॉयलर चूजों के मामले में जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, उन्हें चलने-फिरने और पंख फैलाने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है। यदि चूजों को शुरुआत से ही अत्यधिक भीड़ में रखा जाए, तो वे तनावग्रस्त हो जाते हैं और पर्याप्त दाना-पानी ग्रहण नहीं कर पाते। उम्र के प्रत्येक पड़ाव पर प्रति वर्ग फुट पक्षियों की संख्या को वैज्ञानिक तरीके से कम करते जाना चाहिए

  • शुरुआती पहला सप्ताह: इस चरण में प्रति एक वर्ग फुट स्थान पर चार नन्हे चूजों को आसानी से रखा जा सकता है।
  • दूसरा सप्ताह: चूजों का आकार बढ़ने पर जगह की उपलब्धता बढ़ाते हुए एक वर्ग फुट में तीन चूजे रखने का नियम अपनाना चाहिए।
  • तीसरा सप्ताह: इस उम्र तक आते-आते शारीरिक वृद्धि तेज हो जाती है, इसलिए प्रति एक वर्ग फुट क्षेत्र में केवल दो चूजों को ही रखना उचित माना जाता है।
  • एक से डेढ़ किलोग्राम वजन होने पर: जब ब्रॉयलर मुर्गियों का वजन एक किलोग्राम से डेढ़ किलोग्राम के दायरे में पहुँच जाए, तब प्रत्येक एक वर्ग फुट स्थान में सिर्फ एक ही मुर्गी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

स्थान का यह मानक आवंटन मुर्गियों को सक्रिय रहने और अपना वजन संतुलित रूप से बढ़ाने में पूरी मदद करता है। फार्म संचालक को पक्षियों की कुल संख्या तय करते समय स्थानीय मौसम, बाहरी तापमान और शेड के भीतर मौजूद प्राकृतिक हवा के दबाव का भी निरंतर आकलन करना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर घनत्व में थोड़ा बदलाव किया जा सके।

शेड की नियमित स्वच्छता और नमी से बचाव

मुर्गियों को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए शेड के भीतर स्वच्छता का दैनिक स्तर बनाए रखना बेहद अनिवार्य है। फर्श पर बिछाई जाने वाली सामग्री यानी बिछावन में यदि मुर्गियों की बीट या पानी गिरने के कारण सीलन बनी रहती है, तो वह बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का मुख्य केंद्र बन जाती है। इस प्रकार की अस्वास्थ्यकर स्थितियों से पक्षियों के पैरों में घाव, श्वसन संबंधी जटिलताएँ और दस्त की समस्या शुरू हो सकती है। इसलिए फार्मर को चाहिए कि वे फर्श के गीले बिछावन को तुरंत हटाकर उसकी जगह सूखा और स्वच्छ बिछावन बिछाएं।

इसके अलावा पानी पीने के लिए रखे गए बर्तनों और फीडर के आसपास विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि पक्षियों की हलचल से अक्सर वहाँ पानी छलक जाता है। यदि पानी के बर्तनों के इर्द-गिर्द कीचड़ या सीलन जमा होगी, तो पूरा वातावरण दूषित हो जाएगा। शेड में वेंटिलेशन का स्तर ऐसा बना रहे कि फर्श की हल्की नमी भी प्राकृतिक रूप से सूखती रहे। पर्याप्त जगह और व्यवस्थित वायु संचार मिलकर फार्म के अंदर हानिकारक अमोनिया गैस और अत्यधिक उमस को बनने से रोकते हैं, जिससे मुर्गियाँ पूरी तरह चुस्त और निरोगी बनी रहती हैं।

चूजों के शुरुआती विकास के लिए तापमान और पोषण

पोल्ट्री फार्मिंग के शुरुआती चरण में चूजों की ब्रूडिंग यानी उन्हें उचित गर्माहट देना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। डॉ. राकेश कुमार तिवारी के मुताबिक, जीवन के पहले सप्ताह में चूजों के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने की अपनी प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए इस दौरान शेड का तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखना अत्यंत जरूरी होता है। इसके बाद जैसे-जैसे चूजों की उम्र बढ़ती है और उनके शरीर पर पंख आने लगते हैं, कमरे का तापमान धीरे-धीरे घटाया जाना चाहिए।

कृत्रिम रोशनी और गर्माहट के साथ-साथ चूजों को हर समय शुद्ध व ताजा पेयजल और पोषण से भरपूर संतुलित आहार मिलना चाहिए। शेड के अंदर रोशनी की उचित व्यवस्था होने से चूजे समय पर दाना चुगते हैं और उनका विकास बिना रुके तेजी से होता है। जब चूजों को उनकी शारीरिक जरूरत के अनुसार निर्धारित तापमान, पर्याप्त चलने-फिरने की जगह, खुली ताजी हवा और स्वच्छ खानपान मिलता है, तो उनकी मृत्यु दर नगण्य रह जाती है और वे तय समय सीमा में अपेक्षित वजन हासिल कर लेते हैं।

सवाल-जवाब

मुर्गी फार्म के शेड की दिशा किस ओर होनी चाहिए?
मुर्गी फार्म के शेड का लंबा हिस्सा हमेशा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए ताकि सीधी धूप से बचाव हो सके और हवा का आवागमन सही रहे।
पोल्ट्री शेड की चौड़ाई कितनी रखना सबसे बेहतर माना जाता है?
पोल्ट्री शेड की चौड़ाई करीब 35 फीट रखी जानी चाहिए, जिससे शेड के भीतर प्राकृतिक रूप से हवा का आर-पार प्रवाह बना रहे।
शुरुआती पहले सप्ताह में एक वर्ग फुट जगह में कितने चूजे रखे जा सकते हैं?
पहले सप्ताह के दौरान प्रति एक वर्ग फुट जगह में चार चूजों को रखने की व्यवस्था की जा सकती है।
ब्रॉयलर मुर्गियों का वजन एक से डेढ़ किलोग्राम होने पर कितनी जगह देनी चाहिए?
वजन एक से डेढ़ किलोग्राम तक पहुँचने पर प्रति वर्ग फुट जगह में केवल एक मुर्गी रखने का नियम अपनाना चाहिए।
पहले सप्ताह में चूजों के लिए कितना तापमान आवश्यक होता है?
जीवन के पहले सप्ताह में नन्हे चूजों के उचित विकास के लिए करीब 32 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान बनाए रखना जरूरी होता है।
शेड के फर्श पर गीला बिछावन रहने से क्या नुकसान हो सकता है?
गीले बिछावन और फर्श की सीलन से शेड में हानिकारक बैक्टीरिया और अमोनिया गैस बढ़ती है, जिससे मुर्गियों की सेहत खराब हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·23 मिनट पहले

शेड की चौड़ाई 35 फीट रखने वाला नियम बढ़िया लगा, हवा का हिसाब एकदम सेट बैठता है।

Meera Joshi@meera-joshi·47 मिनट पहले

मुर्गियों को भी तनाव से बचाने के लिए इतनी प्लानिंग चाहिए होती है, यह आज ही पता चला। क्या ज्यादा गर्मी में ये नियम थोड़े बदल जाते हैं?

Nyra Kaif@nyra-kaif·47 मिनट पहले

मीरा, तुम्हारी बात सही है, पर क्या सर्दियों में भी यही साइज रखना पड़ता है या बदलाव करना होता है?

Neha Verma@neha-verma·1 घंटे पहले

पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गियों की सेहत के लिए शेड की सही बनावट और हवा का ख्याल रखना वाकई बहुत जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही से पूरा धंधा बैठ सकता है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·1 घंटे पहले

नेहा जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या डॉक्टर साहब ने यह भी बताया है कि अगर गर्मी बहुत बढ़ जाए, तो वेंटिलेशन के अलावा और क्या करना चाहिए?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp