अक्टूबर के महीने में सरसों और चने की बुवाई के साथ ही बागवानी प्रेमियों के लिए घर पर टमाटर के पौधे लगाने का सबसे बेहतरीन समय शुरू हो जाता है। अगर आप भी ताजी सब्जियां उगाने के शौकीन हैं, तो अपनी छत या बालकनी में गमलों के जरिए टमाटर की बंपर फसल तैयार कर सकते हैं। सही देखभाल करने पर बुवाई के महज 40 से 55 दिनों के भीतर ही पौधों में फल नजर आने लगते हैं, जिससे दिसंबर और जनवरी के दौरान आपको पूरी तरह ऑर्गेनिक टमाटर मिलने शुरू हो जाएंगे। टमाटर सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, पोटेशियम, फाइबर और लाइकोपीन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। लाल और रसीले टमाटरों की बंपर पैदावार हासिल करने के लिए कुछ चुनिंदा बागवानी टिप्स का पालन करना बहुत जरूरी होता है। यदि आपके पास बाजार से खरीदा हुआ बड़ा गमला या ग्रो बैग उपलब्ध नहीं है, तो आप घर में रखी किसी पुरानी बाल्टी या वेस्ट कंटेनर का इस्तेमाल करके भी आसानी से टमाटर का पौधा उगा सकते हैं।
टमाटर की फसल के लिए सही मौसम और मिट्टी का चुनाव
सालभर में टमाटर की खेती तीन अलग-अलग बार की जाती है, लेकिन इसमें सबसे उत्तम समय अक्टूबर और नवंबर का महीना माना जाता है क्योंकि ठंड के मौसम में टमाटर की फसल बहुत अच्छी तरह पककर तैयार होती है। घर की छत या बालकनी में इसे उगाना काफी सरल है और इसके लिए आप ग्रो बैग, पुरानी प्लास्टिक की बोतलों या बाल्टियों का उपयोग कर सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि बर्तन या गमला कम से कम 12 से 14 इंच गहरा होना चाहिए। पौधे की शुरुआत करने के लिए अच्छी क्वालिटी के बीजों का चयन करें और मिट्टी तैयार करते समय 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी लें। इसके साथ ही 40 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिला लें और मिश्रण में थोड़ी सी सरसों खली, नीम खली, जरा सा चूना और हल्दी पाउडर भी शामिल कर लें। इन सभी चीजों को आपस में अच्छी तरह मिला लें और यह सुनिश्चित करें कि आपके गमले में पानी निकलने के लिए पर्याप्त ड्रेनेज होल जरूर बना हो।
पौध तैयार करने और ट्रांसप्लांट करने की पूरी प्रक्रिया
आप चाहें तो छोटे पेपर कप का इस्तेमाल करके भी पौध तैयार कर सकते हैं, जिसमें कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद का मिश्रण भरा जा सकता है। कप के निचले हिस्से में छेद अवश्य कर लें ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके, या फिर सीधे सीडलिंग ट्रे का उपयोग भी किया जा सकता है। टमाटर के बीजों को गमले या ग्रो बैग की मिट्टी में छिड़क दें और उन्हें मिट्टी की एक बहुत हल्की परत से ढककर हल्का सा पानी दे दें। यदि आप बीज से पौधे नहीं उगाना चाहते हैं, तो किसी नर्सरी से सीधे 20 दिन पुराने स्वस्थ पौधे लाकर भी गमलों में लगा सकते हैं। बीज लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि गमले को शुरुआती दो से तीन दिनों तक केवल हल्की धूप में ही रखा जाए। नन्हे पौधों को पोषण देने के लिए प्याज के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है और जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं, तो उन्हें ऐसी जगह पर रखें जहां रोजाना 8 से 10 घंटे की भरपूर धूप मिल सके। जब पौधे करीब 4 से 5 इंच के हो जाएं या उनमें चार से पांच पत्तियां निकल आएं, तब उन्हें स्थायी रूप से बड़े गमलों में ट्रांसफर कर देना चाहिए।
गमले में टमाटर के पौधों को लगाते समय उनके बीच लगभग चार से पांच इंच की उचित दूरी जरूर रखनी चाहिए। एक बड़े आकार के गमले या ग्रो बैग में अधिकतम तीन या चार पौधे ही लगाए जाने चाहिए ताकि उन्हें फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। पौधों की नियमित देखभाल करते रहें और जरूरत से ज्यादा पानी देने से हमेशा बचें। जब गमले की ऊपरी मिट्टी पूरी तरह सूखी हुई दिखाई दे, तभी उसमें दोबारा पानी डालें। इसके अलावा हर 10 दिन के अंतराल पर मिट्टी में थोड़ी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाते रहें, जिससे पौधे की ग्रोथ तेजी से होने लगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टमाटर का तना प्राकृतिक रूप से बहुत मजबूत नहीं होता है, इसलिए जैसे-जैसे पौधा लंबाई में बढ़े, उसे लकड़ी का सहारा देना आवश्यक है। यह सपोर्ट देने का काम पौधों में फूल आने से ठीक पहले या बुवाई के 20 से 25 दिन बाद कर देना चाहिए। टमाटर के पौधे को घना बनाना भी पैदावार बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी कदम है। शुरुआती चरण में पौधे के निचले हिस्सों से कुछ अतिरिक्त शाखाएं निकलने लगती हैं जिन्हें सकर्स कहा जाता है। मिट्टी के पास से निकलने वाले इन अवांछित सकर्स को समय-समय पर हटाते रहें, जिससे पौधा घना हो जाता है। पौधा जितना अधिक घना होगा, उसमें उतने ही ज्यादा फूल आएंगे और जितने अधिक फूल आएंगे, पैदावार भी उतनी ही शानदार होगी।
जड़ों की देखभाल, रूट फिलिंग और कीटों से सुरक्षा
टमाटर के पौधे से अधिकतम फल प्राप्त करने के लिए उसकी जड़ों को भरपूर पोषण मिलना बहुत आवश्यक है। इसके लिए गमले की मिट्टी की हल्की सी गुड़ाई करें और फिर जड़ों के पास कैल्शियम पाउडर तथा वर्मीकम्पोस्ट डाल दें। यदि आपके पास कैल्शियम पाउडर उपलब्ध नहीं है, तो इसकी जगह साधारण चूने का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पोषक तत्व डालने के बाद उसे मिट्टी से अच्छी तरह ढक दें, लेकिन ध्यान रखें कि रूट फिलिंग करने के तुरंत बाद पौधों में पानी नहीं डालना है। इसके ठीक पूरे आठ दिन बाद पानी दें या फिर गमले की मिट्टी सूखने की स्थिति में ही पानी डालें। इसके अलावा आप चाहें तो प्रोम फर्टिलाइजर का उपयोग भी कर सकते हैं। आमतौर पर टमाटर के पौधों पर कीटों का हमला कम ही होता है, लेकिन यदि किसी प्रकार के कीट नजर आएं तो तुरंत नीम के तेल का स्प्रे कर देना चाहिए। पौधे लगाने से लेकर टमाटर पूरी तरह पककर तैयार होने तक लगभग 100 दिन यानी पूरे तीन महीने का समय लगता है, जिसके बाद आपको ताजे और लाल टमाटर मिलने लगते हैं।


















