त्वचा को खूबसूरत, चमकदार और युवा बनाए रखने के लिए लोग अक्सर तमाम तरह के सौंदर्य उत्पादों और घरेलू उपायों पर बड़ा खर्च करते हैं। हालांकि, क्या यह बात किसी को मालूम है कि योग के माध्यम से भी चेहरे की मांसपेशियों को स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है? प्राचीन भारतीय योग परंपरा में शरीर के हर हिस्से को तंदुरुस्त रखने के लिए कई सूक्ष्म अभ्यासों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक बेहद असरदार अभ्यास कपोल शक्ति विकासक क्रिया है, जिसे मुख्य रूप से चेहरे के व्यायाम के तौर पर पहचाना जाता है।
संस्कृत भाषा में कपोल शब्द का अर्थ गाल होता है और शक्ति विकासक का मतलब ताकत बढ़ाने वाला होता है। इस विशेष क्रिया के दौरान चेहरे की अंदरूनी मांसपेशियों को सक्रिय करने और उन पर नियंत्रण पाने पर पूरा जोर दिया जाता है। इस योग का लगातार अभ्यास करने से चेहरे के विभिन्न हिस्सों में रक्त संचार बेहतर हो सकता है और मांसपेशियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। आइए इस अनोखी योग क्रिया से जुड़ी सभी जरूरी बातों और इसके अभ्यास के वक्त ध्यान रखी जाने वाली महत्वपूर्ण सावधानियों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कपोल शक्ति विकासक योग मुख्य रूप से गालों तथा चेहरे के अन्य हिस्सों की मांसपेशियों को गतिशीलता प्रदान करने वाली एक सूक्ष्म प्रक्रिया है। इसे फेशियल योग का ही एक अहम हिस्सा माना जाता है, जो आजकल काफी चलन में है। इस क्रिया को करते समय चेहरे की मांसपेशियों के मूवमेंट के साथ-साथ सांस लेने के तौर-तरीकों पर भी खास ध्यान देना जरूरी होता है। योग की कुछ खास विधियों में गर्दन को एक निश्चित स्थिति में रखना भी शामिल होता है, इसलिए इसे अपनी मर्जी से करने के बजाय किसी अनुभवी योग गुरु से उचित तरीका सीखकर करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
इस संपूर्ण क्रिया के दौरान गालों और चेहरे के अन्य अंगों की मांसपेशियों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इन हिस्सों में खिंचाव और लचीलापन बना रहता है। नियमित अभ्यास से चेहरे पर उम्र के प्रभाव और झुर्रियां कम नजर आने लगती हैं। इसके अलावा, इस योग सत्र के दौरान श्वास और शारीरिक गतिविधियों पर मन केंद्रित करने से मानसिक शांति और आराम का अनुभव भी होता है, जो तनाव को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।
कपोल शक्ति विकासक क्रिया करते समय क्या सावधानियां रखें
इस योग अभ्यास को करते वक्त किसी भी तरह की जल्दबाजी करने से बचना चाहिए और अपनी गर्दन पर आवश्यकता से अधिक दबाव बिल्कुल नहीं डालना चाहिए। यदि इस क्रिया को करते समय सिर घूमने लगे, सांस लेने में कोई दिक्कत महसूस हो या फिर गर्दन के हिस्से में किसी प्रकार का दर्द उठने लगे, तो अभ्यास को फौरन रोक देना चाहिए। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारियां, गर्दन में दर्द या वर्टिगो की समस्या है, उन्हें इस योग को करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। गर्दन को अपनी मर्जी से ज्यादा झुकाने या सांस को लंबे समय तक रोकने जैसी तकनीकों को खुद से आजमाने से बचें और हमेशा किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में ही इसका अभ्यास करें।





















