अयोध्या में पुराने मकानों के साथ यह आम समस्या है कि वक्त बीतने के साथ उनकी छतें कमजोर होने लगती हैं। कई बार लेंटर में दरारें उभर आती हैं, प्लास्टर उखड़ने लगता है और छत के भीतर पड़ी सरिया बाहर झांकने लगती है। ऐसी स्थिति देखकर मकान मालिकों के मन में यह डर बैठ जाता है कि अब पूरी छत को तोड़कर दोबारा बनवाना ही एकमात्र उपाय बचा है। अगर आपके आवास की छत पर भी इसी तरह सरिया नजर आने लगी है, तो घबराने के बजाय यह समझना जरूरी है कि ऐसी हालत में क्या कदम उठाए जाने चाहिए और क्या बिना पूरी छत गिराए इसका कोई स्थायी समाधान मुमकिन है।
बिना दोबारा लेंटर डाले कैसे हो सकती है मरम्मत?
राजमिस्त्री के मुताबिक, कुछ चुनिंदा मामलों में पुरानी छत के ऊपर ही एक अतिरिक्त कंक्रीट की परत चढ़ाकर उसकी मरम्मत का काम पूरा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जीरा गिट्टी, एक मजबूत सरिया का जाल और कंक्रीट के मिश्रण का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने 9×9 इंच के अंतराल वाले जाल में 10 एमएम की सरिया का इस्तेमाल करने और उसके बाद ऊपर से ढलाई करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा छत पर एक सही ढलान तैयार करना भी जरूरी होता है ताकि बारिश का पानी वहां रुके नहीं और आसानी से बाहर निकल जाए। हालांकि यह पैंतरा हर पुरानी इमारत के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। पुरानी छत के ऊपर नई ढलाई करने से उसका वजन काफी बढ़ जाता है, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले किसी अनुभवी सिविल इंजीनियर से लेंटर की कुल मजबूती और मकान की भार सहन करने की क्षमता की विधिवत जांच करवा लेनी चाहिए। सिर्फ ऊपर से नई परत बिछा देने से अंदर की कमजोर सरिया या खराब हो चुके कंक्रीट की बुनियादी समस्या हल नहीं हो जाती।
कितने रुपये में हो जाएगी छत की मरम्मत?
राजमिस्त्री के अनुसार, लगभग 1000 वर्ग फीट क्षेत्रफल वाली छत पर सरिया का जाल बिछाकर और एक नई परत डलवाकर मरम्मत करवाने का अनुमानित खर्च करीब 45,000 रुपये तक आ सकता है। हालांकि यह सिर्फ एक आकलन है और किसी भी बाजार का अंतिम व पक्का भाव नहीं है। असल खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि काम में सरिया की कितनी मात्रा लगती है, सीमेंट, गिट्टी, बालू, मजदूरी की दरें क्या हैं, छत की वर्तमान स्थिति कैसी है और वाटरप्रूफिंग की कितनी जरूरत है। यदि छत की सरिया में पहले से ही जंग लग चुकी है या कंक्रीट का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर रहा है, तो इस मरम्मत का बजट बढ़ भी सकता है। इसलिए काम शुरू कराने से पहले बाजार में सामग्री और मजदूरी का अलग-अलग हिसाब लगा लेना समझदारी होगी।
सीलन और पानी टपकने से कैसे मिलेगी राहत?
छत से पानी टपकने या दीवारों पर सीलन आने की समस्या सामने आने पर केवल सामान्य सीमेंट की एक परत चढ़ा देना काफी नहीं होता है। सबसे पहले पानी के रिसाव की असली जड़ का पता लगाना आवश्यक है। जरूरत पड़ने पर खराब और जर्जर कंक्रीट को हटाया जाता है और सरिया पर लगी जंग को अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद सरिया पर उपयुक्त जंगरोधी उपचार किया जाता है और मरम्मत के लिए निर्धारित सही ग्रेड की सामग्री का ही प्रयोग किया जाता है। इन सब चरणों के बाद छत पर एक उचित वाटरप्रूफिंग सिस्टम स्थापित किया जा सकता है। राजमिस्त्री ने वाटरप्रूफ सीमेंट के प्रयोग की भी सलाह दी है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल वाटरप्रूफ सीमेंट या किसी भी तरह की कोटिंग से हर प्रकार की सीलन हमेशा के लिए खत्म होने की कोई पक्की गारंटी नहीं होती। सही और पुख्ता समाधान के लिए रिसाव के स्रोत की पहचान करना बेहद जरूरी है।
सरिया दिखने लगे तो न करें लापरवाही
छत में सरिया का नजर आना केवल प्लास्टर के खराब होने भर का संकेत नहीं है, बल्कि यह अंदरूनी कंक्रीट के टूटने और सरिया के भीतर तक जंग खाने की चेतावनी भी हो सकता है। यदि आपकी छत से कंक्रीट के टुकड़े लगातार नीचे गिर रहे हैं, सरिया बहुत बुरी तरह जंग की चपेट में आ चुकी है, लेंटर बीच से झुकता हुआ प्रतीत हो रहा है या उसमें चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं, तो बिना देर किए छत के उस नीचे वाले हिस्से को तुरंत खाली कर दें और किसी विशेषज्ञ से इसकी तत्काल जांच करवाएं। इसलिए पुराने मकान की छत की मरम्मत के मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी दिखाने के बजाय पहले उसकी संरचनात्मक मजबूती की जांच कराना अनिवार्य है। सही तकनीक और समय रहते की गई मरम्मत से कई बार पूरी छत को दोबारा बनवाने के भारी खर्च से बचा जा सकता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में मकान की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।






















