घर के खुले हिस्से या बालकनी को जीवंत रूप देने के लिए ठंड का मौसम सबसे अनुकूल माना जाता है। पारंपरिक गुलाब के अतिरिक्त यदि आप अपने परिसर को नया आकर्षण देना चाहते हैं, तो डहेलिया और पिटूनिया के चटक रंग बेहतरीन विकल्प साबित होते हैं। बैंगनी, सफेद, पीले, लाल, नारंगी और गुलाबी आभा बिखेरने वाले ये फूल किसी भी साधारण जगह को बेहद खास और सजीला बना देते हैं। थोड़ी सी व्यवस्थित देखरेख से इन पौधों पर अनगिनत कलियां खिलती हैं, जिससे पूरा आंगन शानदार दिखाई पड़ता है।
डहेलिया के घने और बड़े फूल लाते हैं भव्यता
डहेलिया अपनी बहुस्तरीय पंखुड़ियों और विशाल आकार की वजह से बागवानी प्रेमियों के बीच अत्यधिक सराहा जाता है। इसमें कई मोहक रंग जैसे पीला, गुलाबी, लाल, संतरी, श्वेत और जामुनी रूप देखने को मिलते हैं। इस पौधे को रोपने के लिए भुरभुरी और सुगम जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करनी चाहिए, ताकि जड़ों में ठहराव न बने। यदि आप इसे गमले में सजा रहे हैं, तो पौधे की बढ़त को देखते हुए बड़े आकार का पात्र इस्तेमाल करना जरूरी है। इसकी कुछ लम्बी प्रजातियों को गिरने से बचाने के लिए बांस या लकड़ी की खपच्ची का सहारा देना पड़ता है। इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि गमला उसी स्थान पर रखा जाए जहां सुबह की खुली धूप पूरी तरह पहुंचती हो।
हैंगिंग बास्केट और रेलिंग के लिए पिटूनिया की उपयोगिता
पिटूनिया उन फूलों में गिना जाता है जो बालकनी की रेलिंग और लटकती टोकरियों में बहुत तेजी से फैलते हैं। इनके फूलों में एक से बढ़कर एक रंग और सुंदर धारियां देखने को मिलती हैं, जो दूर से ही ध्यान खींचती हैं। इसे लगाने के लिए पोषक तत्वों से युक्त, हल्की और जल न रोकने वाली मिट्टी सबसे मुफीद मानी जाती है। अधिक नमी से पिटूनिया की जड़ें जल्दी गलने लगती हैं, इसलिए जल भराव से हमेशा सतर्क रहना पड़ता है। गमले की मिट्टी की ऊपरी परत हल्की सूखने पर ही पानी देना चाहिए और धूप की पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करनी चाहिए।
रोपाई का सही समय और मौसम की भूमिका
मौसम में हल्की ठंडक घुलने के साथ ही इन पौधों की रोपाई की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। विभिन्न भौगोलिक इलाकों के तापमान और स्थानीय आबोहवा के आधार पर इनके रोपण की अवधि में मामूली अंतर आ सकता है। विशेषज्ञ अरुण सेठी का कहना है कि इन प्रजातियों की अच्छी वृद्धि तथा निरंतर फूल हासिल करने के लिए समयबद्ध रख-रखाव बेहद आवश्यक है। किसी भी नर्सरी से पौध लाते समय स्थानीय मौसम के अनुकूल किस्म की पड़ताल कर लेना फायदेमंद साबित होता है।
सीडलिंग तैयार करने और पोषण के सामान्य नियम
यदि कोई व्यक्ति स्वयं इन पौधों को उगाने का अनुभव लेना चाहता है, तो पैकेटबंद उच्च कोटि के बीजों की मदद से अंकुरण की शुरुआत की जा सकती है। जब बीज से नन्हे अंकुर निकल आएं, तब उन्हें धूप वाली सुरक्षित जगह पर रखकर थोड़ा बड़ा होने दिया जाता है। पर्याप्त बड़े हो जाने पर इन्हें स्थायी गमलों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जो लोग बागवानी की दुनिया में एकदम नए कदम रख रहे हैं, उनके लिए सीधे तैयार पौध खरीदकर लगाना अधिक सुरक्षित और सरल रहता है। निरंतर खिलने के लिए पौधों पर मुरझाए फूलों और पीली पड़ी पत्तियों की छंटाई करते रहना चाहिए, ताकि नई कलियों को ऊर्जा मिलती रहे।


















