गर्मियों के मौसम में तेज धूप और यूवी किरणों से त्वचा का बचाव करने के लिए सनस्क्रीन को एक आवश्यक स्किन केयर प्रोडक्ट माना जाता है। हालांकि, अनेक लोग नियमित रूप से चेहरे, हाथों और गर्दन पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने के बाद भी त्वचा के काले पड़ने या टैनिंग की शिकायत करते हैं। अक्सर लोग इसके लिए सनस्क्रीन की गुणवत्ता को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन वास्तव में इसकी मुख्य वजह सनस्क्रीन लगाने की गलत तकनीक, बहुत कम मात्रा में प्रोडक्ट का उपयोग और समय पर उसे दोबारा न लगाना हो सकती है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, सही सनस्क्रीन का चयन करने के साथ-साथ उसे सही विधि से लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
केवल SPF देखकर सनस्क्रीन न खरीदें
सनस्क्रीन की खरीदारी करते समय केवल उसके पैक पर लिखा SPF नंबर देखना पर्याप्त नहीं होता है। त्वचा विशेषज्ञों और अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के सुझावों के अनुसार, हमेशा SPF 30 या उससे अधिक क्षमता वाला, ब्रॉड-स्पेक्ट्रम और वॉटर-रेसिस्टेंट सनस्क्रीन चुनना ज्यादा प्रभावकारी रहता है। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन त्वचा को सूर्य की UVA और UVB दोनों प्रकार की हानिकारक किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है।
जिन लोगों की त्वचा पर पिग्मेंटेशन या डार्क स्पॉट्स की समस्या जल्दी उभर आती है, उनके लिए टिंटेड सनस्क्रीन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। विशेष रूप से आयरन ऑक्साइड युक्त टिंटेड सनस्क्रीन सूर्य की दृश्यमान किरणों के प्रभाव से त्वचा की रंगत को गहरा होने से अतिरिक्त सुरक्षा देने में मदद करता है।
कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाना है बड़ी चूक
अधिकांश लोग सनस्क्रीन की कुछ बूंदें या बहुत थोड़ी सी मात्रा चेहरे पर लगाकर यह मान लेते हैं कि उनकी त्वचा पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। यह एक बड़ी गलतफहमी है, क्योंकि सही सुरक्षा कवच के लिए पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन का उपयोग करना अनिवार्य है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मानकों के अनुसार, केवल चेहरे की सुरक्षा के लिए कम से कम लगभग 1 चम्मच सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। इसी प्रकार, शरीर के अन्य सभी खुले हिस्सों पर भी पर्याप्त मात्रा में क्रीम या लोशन लगाना चाहिए ताकि त्वचा ढकी रहे।
बाहर निकलने का सही समय और री-एप्लीकेशन
घर से बाहर निकलने के ठीक पहले सनस्क्रीन लगाने की आदत भी टैनिंग का कारण बन सकती है। सनस्क्रीन को बाहर धूप में जाने से लगभग 15 मिनट पहले लगाना चाहिए। इस 15 मिनट के समय में सनस्क्रीन त्वचा में अवशोषित होकर एक प्रभावी सुरक्षात्मक परत तैयार कर लेता है।
यदि आपको लंबे समय तक धूप में रहना पड़ता है, तो सुबह एक बार लगाया गया सनस्क्रीन पूरे दिन के लिए काफी नहीं होता। बाहर रहने की स्थिति में हर दो घंटे के अंतराल पर दोबारा सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, यदि आप स्विमिंग कर रहे हैं या आपको अत्यधिक पसीना आ रहा है, तो दो घंटे से पहले भी सनस्क्रीन दोबारा लगाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
केवल सनस्क्रीन पर न रहें निर्भर
टैनिंग और सनबर्न से बचने के लिए केवल सनस्क्रीन के भरोसे रहना पूर्ण सुरक्षा नहीं देता। तेज धूप में रहने की अवधि को कम करना और संभव होने पर छायादार स्थानों का उपयोग करना समझदारी है। दिन में विशेष रूप से सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे के बीच सूर्य की किरणें सबसे अधिक तीव्र और हानिकारक होती हैं। इस दौरान सुरक्षा के लिए पूरी आस्तीन वाले हल्के सूती कपड़े, चौड़ी किनारी वाली टोपी और UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेज का इस्तेमाल करना त्वचा के लिए बेहद लाभदायक होता है।



















