धूप में ज्यादा वक्त बिताने के बाद चेहरे या शरीर की रंगत का गहरा होना एक बहुत आम बात है। बहुत से लोग यह मान बैठते हैं कि त्वचा पर दिखने वाला कालापन एक जैसा ही होता है और टैनिंग तथा पिग्मेंटेशन में कोई फर्क नहीं है। हालांकि ये दोनों स्थितियां एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं। दोनों का सीधा संबंध मेलेनिन से जरूर होता है, जो हमारी त्वचा को उसका प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाला पिगमेंट है, लेकिन इनके पैदा होने की वजह, त्वचा पर उभरने का तरीका और ठीक होने में लगने वाला समय पूरी तरह से भिन्न होता है।
टैनिंग और पिग्मेंटेशन में फर्क समझना क्यों है जरूरी
अपनी स्किन की सही समस्या को पहचानना इसलिए बेहद आवश्यक है क्योंकि दोनों का इलाज एक तरीके से नहीं किया जा सकता है। अक्सर लोग बिना असल वजह जाने किसी भी घरेलू नुस्खे या स्किन क्रीम का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, जिससे फायदा होने के बजाय परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। यदि आपकी त्वचा पर भी धूप के संपर्क में आने के बाद कालापन, जिद्दी दाग-धब्बे या असमान रंगत दिखाई दे रही है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह टैनिंग है या फिर पिग्मेंटेशन।
टैनिंग क्या है और यह त्वचा को कैसे प्रभावित करती है
टैनिंग असल में हमारी त्वचा की तरफ से खुद को बचाने की एक प्राकृतिक परत होती है। जब सूरज की तेज पराबैंगनी किरणें यानी यूवी किरणें सीधे हमारी स्किन पर पड़ती हैं, तो शरीर नुकसान से बचाने के लिए मेलेनिन का उत्पादन बढ़ा देता है। इसके प्रभाव से चेहरे, हाथों, गर्दन और बाहों जैसे खुले अंगों का रंग गहरा या भूरा नजर आने लगता है। टैनिंग कुछ ही घंटों या कुछ दिनों के भीतर विकसित हो सकती है। राहत की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में धूप से उचित बचाव करने पर यह धीरे-धीरे अपने आप कम होने लगती है और त्वचा फिर से अपने मूल रंग में वापस आ जाती है।
पिग्मेंटेशन के कारण और उसके लक्षण
दूसरी तरफ, पिग्मेंटेशन टैनिंग से एक बिल्कुल अलग समस्या है जिसमें त्वचा के कुछ विशेष हिस्सों में मेलेनिन अत्यधिक मात्रा में इकट्ठा हो जाता है। इसकी वजह से चेहरे या शरीर पर गहरे काले या भूरे रंग के धब्बे, पैच या रंगत में असमानता दिखने लगती है। पिग्मेंटेशन की समस्या केवल धूप के कारण ही पैदा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, चेहरे के मुंहासे, त्वचा में सूजन, किसी प्रकार की चोट, जलन या कुछ खास दवाओं का साइड इफेक्ट भी मुख्य वजह बन सकता है। यही मुख्य कारण है कि पिग्मेंटेशन अक्सर लंबे समय तक बना रहता है और इसके खात्मे के लिए विशेष देखभाल और उपचार की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि केवल देखकर हमेशा सही नतीजे पर पहुंचना मुश्किल होता है, इसलिए अगर त्वचा का रंग लंबे समय तक असामान्य बना रहे तो किसी स्किन विशेषज्ञ से परामर्श करना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए
टैनिंग तो समय बीतने के साथ स्वतः कम हो जाती है, लेकिन पिग्मेंटेशन को ठीक करने के लिए उसके मूल कारण का इलाज करना अनिवार्य होता है। यही वजह है कि बिना किसी पेशेवर सलाह के लगातार नए-नए घरेलू नुस्खे या क्रीम आजमाने से बचना चाहिए। इसके बावजूद, चाहे आपकी समस्या टैनिंग की हो या फिर पिग्मेंटेशन की, दोनों ही स्थितियों में अच्छी गुणवत्ता वाली सनस्क्रीन का नियमित रूप से इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक है ताकि स्किन को आगे के नुकसान से बचाया जा सके।



















