मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया है। वहीं दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से इस विरोध मार्च में शामिल न होने की अपील की है।
लाइवलाइव: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विवाद बढ़ा, विपक्षी गठबंधन का राष्ट्रपति भवन की ओर कूच संभव — 9 अक्तूबर 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया है। वहीं दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से इस विरोध मार्च में शामिल न होने की अपील की है।
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राजस्थान के अलवर में सीजेपी नेता को पुलिस ने 'हिरासत में लिया', 100 किमी घुमाकर छोड़ा
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि राजस्थान पुलिस ने गुरुवार (8 अक्टूबर) की रात अलवर जिले में स्थित उसके संगठन सह-प्रभारी दीपक बालियान के घर से उन्हें जबरन उठा लिया। पार्टी का आरोप है कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। श्री बालियान के परिजनों के अनुसार, पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे और बताया कि स्थानीय थाना प्रभारी ने उन्हें तलब किया है। परिवार का कहना है कि श्री बालियान ने पुलिस की इस कार्रवाई को सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीम करना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस दल वहां से चला गया। आरोप है कि पुलिस बाद में फिर लौटी और उनसे उस वीडियो को हटाने का दबाव बनाने लगी। परिजनों के मुताबिक, जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। X पर साझा किए गए एक संदेश में पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने बताया कि श्री बालियान को करीब 100 किलोमीटर दूर ले जाया गया और फिर उनके आवास पर वापस छोड़ दिया गया। - पीटीआईबंगाल और छत्तीसगढ़ से 7,000 सीआरपीएफ जवान वापस बुलाए गए, दिल्ली में तैनाती
5 और 6 अक्टूबर को जारी दो आधिकारिक पत्राचार के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 10 अक्टूबर को आहूत प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कम से कम 70 कंपनियां, जिनमें करीब 7,000 जवान शामिल हैं, राष्ट्रीय राजधानी भेजी जा रही हैं। ये जवान फिलहाल पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में तैनात थे। सीजेपी के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के मद्देनजर छत्तीसगढ़ और बंगाल से बुलाए गए 7,000 सीआरपीएफ कर्मियों को दिल्ली में तैनात किया जा रहा है; कड़े सुरक्षा उपायों और आधुनिक दंगा-रोधी उपकरणों के साथ पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से स्थानांतरित किए गए 1,500 सीआरपीएफ जवानों को भी राष्ट्रीय राजधानी में लगाया गया है।प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जेड प्लस सुरक्षा बढ़ाई गई
मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। नई मोती बाग कॉलोनी स्थित उनके दिल्ली आवास के बाहर, चुनाव आयोग के दफ्तर में तथा उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जेड प्लस सुरक्षा बढ़ाई गई; प्रस्तावित प्रदर्शनों और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए दिल्ली में केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती के साथ उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली में 9 और 10 अक्टूबर को शराब की दुकानें बंद रहेंगी
दिल्ली प्रशासन ने मौजूदा माहौल को देखते हुए और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के उद्देश्य से 9 तथा 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में शराब के सभी ठेके बंद रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश गुरुवार (8 अक्टूबर 2026) को जारी किया गया। आबकारी विभाग द्वारा निकाले गए परिपत्र के अनुसार, मदिरा दुकानों को बंद रखने का यह फैसला दिल्ली पुलिस से मिले सुरक्षा इनपुट्स के आधार पर एहतियाती कदम के तौर पर लिया गया है, ताकि सार्वजनिक शांति भंग न हो। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब विपक्षी दल कथित "वोट चोरी" के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं और उनका विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी सिलसिले में कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर व्यापक प्रदर्शन का आह्वान किया है। - पीटीआई10 अक्टूबर के प्रदर्शन के आह्वान और पुलिस की चेतावनियों के बीच असमंजस में नागरिक
दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत रोक लगाने की घोषणा लाउडस्पीकर से की जा रही है, साथ ही अधिकारियों द्वारा स्वयंसेवकों से संपर्क साधने और स्थानीय निवासियों के साथ बैठकें करने का सिलसिला जारी है। दूसरी ओर, युवा संगठन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से प्रभावित लोगों को जोड़ने के लिए घर-घर दस्तक दे रहे हैं। इस दोहरे दबाव के चलते आम नागरिक यह तय करने में उलझे हैं कि वे 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर अभियान को रोकने की मांग को लेकर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल हों या नहीं। पुलिस की पाबंदियों और युवा संगठनों द्वारा हाशिए पर मौजूद मतदाताओं को लामबंद करने के प्रयासों के बीच लोग अपने कदम को लेकर पशोपेश में हैं।
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