घड़साना में पंचायत मुख्यालय बदलने के प्रस्ताव पर फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने दी वोटिंग न करने की चेतावनीआरबीआई की व्यस्त नौकरी के बीच 5 घंटे की पढ़ाई, कुरुक्षेत्र के राहुल सैनी ने एचसीएस में हासिल की 7वीं रैंकराजस्थान में देवास परियोजना के तीसरे और चौथे चरण से उदयपुर को हर साल मिलेगा 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानीआर्थिक राशिफल 9 अक्टूबर 2026: जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का धन, व्यापार और निवेश का पूरा लेखा-जोखाउदयपुर के आर्टिस्ट हर्षवर्धन सिंह ने तरबूज पर तराशी नाना पाटेकर की तस्वीरलाइव: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विवाद बढ़ा, विपक्षी गठबंधन का राष्ट्रपति भवन की ओर कूच संभवमकर राशिफल 9 अक्टूबर: वित्तीय मामलों में जल्दबाजी से बचें और उलझनों को नए नजरिए से सुलझाएंगोदावरी धाम में दीवारों पर उकेरा गया सुंदरकांड, कोटा में बना अनूठा मानस मंदिरमीन राशिफल 9 अक्टूबर: केतु से सीखें संतुलन साधना और बजट पर रखें पैनी नजरसाप्ताहिक राशिफल 11 से 17 अक्टूबर 2026: इन 6 राशियों के लिए खुलेंगे धन के मार्ग और खुशियों के द्वार
गोदावरी धाम में दीवारों पर उकेरा गया सुंदरकांड, कोटा में बना अनूठा मानस मंदिरराजस्थान
9 अक्तू॰ 2026, 8:11 am (2 घंटे पहले)· 1

गोदावरी धाम में दीवारों पर उकेरा गया सुंदरकांड, कोटा में बना अनूठा मानस मंदिर

कोटा के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में मानस मंदिर स्थापित किया गया है, जिसकी दीवारों पर पूरा सुंदरकांड लिखा गया है।

धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए सामान्य तौर पर भक्त पोथियों और किताबों का रुख करते हैं, मगर राजस्थान के कोटा शहर में श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिल रहा है। यहां के विख्यात गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में नवनिर्मित मानस मंदिर तैयार किया गया है, जहां भक्तों को पाठ करने के लिए पुस्तक खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस विशेष भवन की चारों दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड को बड़े ही व्यवस्थित रूप से अंकित किया गया है, ताकि सामने खड़े होकर ही पूरा पाठ आसानी से संपन्न किया जा सके। इसके साथ ही मंदिर परिसर में गोस्वामी तुलसीदास जी और महर्षि वेदव्यास की भव्य प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित की गई हैं, जिससे इस स्थान की गरिमा और बढ़ गई है। यहां निरंतर चलने वाले अखंड रामायण पाठ का क्रम भी लंबे समय से श्रद्धापूर्वक जारी है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद के बाद हुआ परिसर का विस्तार

गोदावरी धाम के व्यवस्थापक शैलेंद्र भार्गव ने इस निर्माण की पृष्ठभूमि साझा करते हुए स्पष्ट किया कि हनुमान जी महाराज की प्रतिमा स्थापना के आरंभिक दिनों से ही यहां अखंड रामायण पाठ की परंपरा शुरू कर दी गई थी। शुरुआती दौर में यह धार्मिक आयोजन केवल पावन नवरात्र और श्रावण मास के विशेष अवसरों तक ही सीमित रहता था। जैसे-जैसे समय बीता, दैनिक आरती और नियमित रामायण पाठ में सम्मिलित होने वाले भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखा जाने लगा। पहले से निर्धारित किया गया पाठ कक्ष श्रद्धालुओं की उपस्थिति के लिहाज से छोटा पड़ने लगा था। इसी स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने उस कक्ष का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया और उसे एक भव्य मानस मंदिर का स्वरूप प्रदान किया। विस्तार के साथ ही वहां महर्षि वेदव्यास और गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन प्रतिमाएं स्थापित की गईं और पूरे सुंदरकांड को दीवार पर लिखवाया गया।

ये भी पढ़ें

अहमदाबाद और बनारस के धार्मिक केंद्रों से मिली प्रेरणा

इस अनूठी रचना का विचार अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे अन्य विख्यात धार्मिक स्थलों की प्रेरणा रही है। शैलेंद्र भार्गव के अनुसार, दीवारों पर पवित्र ग्रंथों को उकेरने का विचार बनारस और अहमदाबाद स्थित प्रमुख आस्था केंद्रों से प्रेरित है। बनारस के मानस मंदिर में दीवारों पर समूची रामचरितमानस अंकित की गई है, जबकि अहमदाबाद के एक प्रसिद्ध धाम में श्रीमद्भागवत कथा के श्लोकों को भित्ति पर स्थान दिया गया है। इन्हीं परंपराओं को ध्यान में रखते हुए गोदावरी धाम में पूरे सुंदरकांड को दीवारों पर भव्यता से संजोया गया। उन्होंने रामचरितमानस के उस गहरे आध्यात्मिक संदेश का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि कलियुग में योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत या जटिल पूजा-पाठ के बजाय केवल प्रभु राम का स्मरण, उनके गुणों का गान और संतों के मुख से उनकी कथाओं का श्रवण ही सबसे सुगम साधन माना गया है।

जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का पावन उद्देश्य

शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि कलियुग के प्रभाव के बीच प्रभु श्रीराम का नाम जपना, उनका गुणगान करना और उनकी महिमा को सुनना ही मानव कल्याण का सीधा मार्ग है। भागदौड़ भरी दिनचर्या के चलते कई श्रद्धालु अपने घरों में समय निकालकर पाठ करने में असमर्थ रहते हैं, या किसी वजह से स्वयं ग्रंथ नहीं पढ़ पाते। ऐसे सभी लोगों के लिए यह मानस मंदिर एक सुलभ केंद्र बन चुका है, जहां वे आकर शांत चित्त से कुछ समय अखंड रामायण का श्रवण कर सकते हैं। मंदिर प्रबंधन का मुख्य ध्येय यही है कि रामचरितमानस केवल पन्नों तक सिमटकर न रहे, बल्कि उसके आदर्श और संदेश जन-जन के आचरण में उतरें। यदि कोई भी भक्त सुंदरकांड की कुछ चुनिंदा चौपाइयों का भी सच्चे हृदय से पाठ करता है और उनके मर्म को समझता है, तो उसके जीवन को एक सकारात्मक दिशा मिल सकती है। वर्तमान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां हनुमान चालीसा, रामायण और सुंदरकांड का पाठ करने पहुंचते हैं और आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

सवाल-जवाब

कोटा के किस मंदिर में सुंदरकांड को दीवारों पर लिखा गया है?
कोटा के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर परिसर में स्थित मानस मंदिर की दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड अंकित किया गया है।
मानस मंदिर में किन महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं?
इस मंदिर परिसर में महर्षि वेदव्यास और गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन प्रतिमाएं प्रतिष्ठित की गई हैं।
दीवारों पर सुंदरकांड अंकित करने की प्रेरणा कहां से मिली?
इसकी प्रेरणा बनारस के मानस मंदिर, जहां दीवारों पर रामायण अंकित है, और अहमदाबाद के धाम से मिली, जहां भागवत कथा दीवारों पर लिखी गई है।
गोदावरी धाम में पहले अखंड रामायण का आयोजन कब होता था?
शुरुआती दौर में यहां अखंड रामायण का आयोजन केवल नवरात्र और सावन के पावन महीनों के दौरान ही किया जाता था।
मानस मंदिर का विस्तार करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आरती और रामायण पाठ में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई थी, जिसके कारण पहले से बना हुआ पाठ कक्ष छोटा पड़ने लगा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

कोटा के इस मंदिर में दीवार पर सुंदरकांड देखकर मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गए जब दादाजी के साथ बैठकर ऐसे ही चौपाइयां पढ़ा करते थे। अब बिना किताब खोले पाठ करना कितना आसान हो गया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन जी, दादाजी के साथ बिताए वे दिन वाकई अनमोल होते हैं। दीवारों पर लिखे सुंदरकांड से अब मंदिर में पाठ करना और भी सरल हो गया है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp