सिनेमा जगत के प्रख्यात अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के समाचार के बाद कला, राजनीति और समाज के विभिन्न तबकों में गहरा शोक छा गया है। देश भर के प्रशंसक अपने-अपने तरीके से इस दिग्गज कलाकार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। अपनी प्रभावशाली अदाकारी और बेबाक संवाद अदायगी के दम पर करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले इस फनकार को राजस्थान के उदयपुर में एक बेहद अनोखे अंदाज में याद किया गया। उदयपुर के प्रतिभाशाली कलाकार हर्षवर्धन सिंह ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए तरबूज पर नाना पाटेकर का जीवंत चेहरा तराश कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
बारीक नक्काशी में लगे 5 से 6 घंटे
हर्षवर्धन सिंह ने फल पर नक्काशी करने की अपनी विशिष्ट कला का इस्तेमाल करते हुए एक ताजे तरबूज को कैनवास बनाया। उन्होंने तरबूज के बाहरी हिस्से पर बेहद धैर्य और सूक्ष्मता से काम करते हुए नाना पाटेकर के चेहरे के भावों को साकार रूप दिया। इस पूरे कलात्मक काम को पूरा करने में उन्हें लगातार 5 से 6 घंटे तक मेहनत करनी पड़ी। जब यह कलाकृति बनकर तैयार हुई, तो उसमें अभिनेता के चेहरे की बनावट और भाव इतने स्पष्ट उभरे कि देखने वाले कलाकार के हुनर और अभिनेता के प्रति उनके आदर भाव दोनों को सहज ही महसूस कर सकते हैं।
बचपन से ही रहे हैं पसंदीदा अभिनेता
इस कलाकृति को बनाने के पीछे की प्रेरणा का जिक्र करते हुए हर्षवर्धन ने बताया कि नाना पाटेकर हमेशा से उनके सबसे प्रिय अभिनेताओं की सूची में शीर्ष पर रहे हैं। वह बचपन के दिनों से ही नाना की फिल्में देखते हुए बड़े हुए हैं। हर्षवर्धन के अनुसार, नाना पाटेकर के अभिनय की सादगी, उनकी संवाद अदायगी की गहराई और किरदारों में दिखने वाली सच्ची भावनाएं उन्हें हमेशा गहराई से प्रभावित करती रही हैं। यही कारण था कि जब अभिनेता के निधन की खबर सामने आई, तो वह भीतर से काफी भावुक हो गए और उन्होंने अपनी कला के जरिए इस दर्द और सम्मान को अभिव्यक्त करने का फैसला किया।
गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक बेजोड़ सफर
नाना पाटेकर के लंबे और सफल फिल्मी सफर को याद करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि उन्होंने हर जॉनर में अपनी अलग पहचान बनाई। चाहे ‘क्रांतिवीर’ जैसी सामाजिक और गंभीर फिल्म में उनका उग्र और प्रभावशाली रूप रहा हो, या फिर ‘वेलकम’ फिल्म में डॉन उदय शेट्टी का हास्य से भरपूर किरदार, उन्होंने हर रोल को अमर बना दिया। संजीदा भूमिकाओं से लेकर कॉमिक टाइमिंग तक, उनका अभिनय हमेशा बाकी कलाकारों से अलग नजर आया। हर्षवर्धन का मानना है कि नाना पाटेकर जैसे अद्वितीय कलाकार सदियों में कभी कभार ही जन्म लेते हैं। उनके चले जाने से फिल्म जगत और उनके अनगिनत प्रशंसकों को कभी न भरने वाला नुकसान हुआ है।
कला के जरिए अमर रहने का संदेश
हर्षवर्धन के अनुसार, वह नाना पाटेकर को केवल परदे पर काम करने वाले एक साधारण अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे फनकार के रूप में देखते हैं जिन्होंने अपनी कला से जनमानस के दिल में अमिट छाप छोड़ी। इसी वजह से वह उन्हें एक पारंपरिक श्रद्धांजलि देने के बजाय कुछ हटकर सम्मान देना चाहते थे। तरबूज पर उकेरी गई यह तस्वीर उनके गहरे आदर और आत्मिक जुड़ाव का माध्यम बनी। उदयपुर के इस कलाकार की यह रचना दिखाती है कि भले ही कोई महान कलाकार इस दुनिया को अलविदा कह जाए, लेकिन उसकी विरासत, किरदार और यादें आने वाली पीढ़ियों के बीच हमेशा जीवित रहती हैं।





















