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लाइव: संसद मानसून सत्र का 12वां दिन | राम मंदिर चंदा विवाद पर दोनों सदनों में हंगामा, लोकसभा 2 बजे तक स्थगित — 4 अगस्त 2026लाइव
4 अग॰ 2026, 12:33 pm (45 दिन पहले)· 0

लाइव: संसद मानसून सत्र का 12वां दिन | राम मंदिर चंदा विवाद पर दोनों सदनों में हंगामा, लोकसभा 2 बजे तक स्थगित — 4 अगस्त 2026

संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन दोनों सदनों ने अहम विधेयक पारित किए। लोकसभा ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को हरी झंडी दी, जबकि राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित किया। दोनों सदन बुधवार को सुबह 11 बजे पुनः बैठेंगे।

संसद के मानसून सत्र का बारहवां दिन काफी हंगामेदार रहा, जहां दोनों सदनों में विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। एक तरफ विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर दान में हुई कथित गड़बड़ी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाया, वहीं दूसरी तरफ दलबदल विरोधी कानून में बदलाव की नई मांग भी उठाई गई। इन लगातार व्यवधानों के बीच संसदीय कामकाज भी आगे बढ़ाया गया, जिसके तहत लोकसभा ने जहां ध्वनि मत से वित्तीय विधेयक पास किया, वहीं राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण विधायी संशोधन को अपनी मंजूरी दी।

दलबदल विरोधी कानून में बड़े बदलाव के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव

संसदीय कार्यवाही के आरंभ में ही राजनीतिक दलबदल का विषय प्रमुखता से सामने आया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने निचले सदन में एक औपचारिक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस जमा किया। उन्होंने मांग की कि सदन के नियमित सूचीबद्ध कामकाज, जिसमें प्रश्नकाल और शून्यकाल शामिल हैं, को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाना चाहिए। तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र सौंपकर आग्रह किया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा विचारधारामुक्त सामूहिक दलबदल को रोकने के लिए एक नया और अधिक प्रभावी दलबदल विरोधी ढांचा तैयार करने पर तुरंत विचार-विमर्श कराया जाए।

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अपने इस नोटिस में कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था में मौजूद खामियों के कारण बिना किसी वैचारिक मतभिन्नता के सामूहिक रूप से दल बदलने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने रेखांकित किया कि नए कानून का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो अवसरवादी दलबदल पर पूरी तरह अंकुश लगाए, परंतु साथ ही संसद तथा विभिन्न राज्य विधानमंडलों के भीतर जनप्रतिनिधियों को रचनात्मक असहमति व्यक्त करने की लोकतांत्रिक आजादी भी प्रदान करे।

संसद परिसर में एनडीए नेताओं की 'मंगल मिलन' बैठक

सदन की औपचारिक बैठक से पूर्व संसद परिसर में सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीतिक हलचल देखने को मिली। संसद ग्रंथालय भवन में स्थित जीएमसी बालयोगी सभागार में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल हुए।

गठबंधन के भीतर समन्वय स्थापित करने और विधायी प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में अन्य सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बैठक शुरू होने से पहले नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय संसद पुस्तकालय भवन पहुंचे और एनडीए के नेताओं के साथ विचार-विमर्श में भाग लिया।

विपक्ष की नारेबाजी के कारण निचले सदन में कामकाज बाधित

लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में व्यक्तिगत उपस्थिति और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देने की मांग करते हुए हंगामा प्रारंभ कर दिया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल के समीप आ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगाने लगे।

सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि नारेबाजी बंद न होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

राम मंदिर चंदा विवाद पर उच्च सदन में तीखी बहस

राज्यसभा में भी स्थिति भिन्न नहीं रही। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। खरगे द्वारा यह विषय उठाते ही सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने खड़े होकर इसका कड़ा विरोध किया और विपक्ष के दावों को खारिज कर दिया।

सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जहां विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर दान में हेराफेरी के आरोपों पर नारेबाजी की, वहीं सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्ष पर भगवान राम के प्रति अनादर प्रदर्शित करने का आरोप लगाया। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की जिद की, जिसके कारण उच्च सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए मुल्तवी करना पड़ा।

दोपहर बाद राज्यसभा की दोबारा स्थगन और विपक्षी नेताओं की मांगें

दोपहर 12 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही पुनः शुरू हुई, तो पीठ ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया। परंतु विपक्षी सदस्यों का विरोध कम नहीं हुआ। वे गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर बयान देने की मांग पर अड़े रहे। लगातार जारी नारेबाजी के कारण 4 अगस्त की इस बैठक को दूसरी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सदन के बाहर और भीतर विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "हम केवल दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहे हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति को राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय आरोपों तथा छात्रों पर हो रहे अत्याचारों जैसे विषयों पर व्यापक बहस की अनुमति देनी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। खरगे ने यह भी मांग की कि राम मंदिर दान चोरी के गंभीर आरोपों पर स्वयं प्रधानमंत्री को सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

इसी क्रम में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े हालिया घटनाक्रम अत्यंत संवेदनशील हैं और केंद्रीय गृह मंत्री को इस पर संसद के पटल पर आधिकारिक बयान देना चाहिए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार चंदे की चोरी और छात्र वर्ग से जुड़े वास्तविक प्रश्नों पर चर्चा कराने से जानबूझकर भाग रही है।

लोकसभा में विनियोग विधेयक पारित और दिनभर के लिए स्थगन

दोपहर 2 बजे जब लोकसभा की बैठक फिर से शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। इस भारी हंगामे के बीच ही सदन के पटल पर आवश्यक सरकारी दस्तावेज और विधायी पत्र प्रस्तुत किए गए।

शोरगुल के वातावरण के बीच ही निचले सदन ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से अपनी मंजूरी दे दी। इस वित्तीय विधेयक के पारित होने के तुरंत बाद, विपक्षी दलों के अनवरत प्रदर्शन को देखते हुए पीठ ने लोकसभा की कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। अब निचले सदन की अगली बैठक बुधवार सुबह 11 बजे होगी।

राज्यसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पर चर्चा

दूसरी तरफ, उच्च सदन में दोपहर 2 बजे के बाद जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा प्रारंभ हुई, जिसे लोकसभा पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस नए कानून के विभिन्न प्रावधानों को विस्तार से समझाया।

नित्यानंद राय ने बताया कि 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृति प्राप्त यह विधेयक मूल जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जिसे 2023 में भी संशोधित किया गया था) की धारा 13(3) में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तुत करता है। इस विधायी कदम का मुख्य ध्येय दो वर्ष से अधिक की अत्यधिक देरी से कराए जाने वाले पंजीकरणों की जांच प्रक्रिया को बेहद कड़ा और पारदर्शी बनाना है।

विलंबित पंजीकरण के नए कानूनी नियम और न्यायिक मजिस्ट्रेट का अधिकार

प्रस्तावित विधेयक के तहत विलंबित जन्म या मृत्यु पंजीकरण की श्रेणियों को स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है। मौजूदा 1969/2023 कानून के अंतर्गत, यदि घटना के एक वर्ष बाद पंजीकरण की सूचना दी जाती थी, तो संबंधित जिलाधिकारी (DM), उपमंडलाधिकारी (SDM) अथवा कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होती थी।

नए कानून में व्यवस्था की गई है कि एक वर्ष से दो वर्ष के बीच के विलंबित मामलों में पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी, जहां संबंधित क्षेत्र के DM, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट ही अनुमति देने के लिए अधिकृत होंगे। परंतु, दो वर्ष से अधिक की अवधि बीत जाने के बाद किए जाने वाले आवेदनों के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। अब ऐसे अत्यधिक विलंबित मामलों में पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश के बाद ही संभव हो सकेगा। इसके माध्यम से लंबे समय से अटके पंजीकरणों की प्रशासनिक शक्ति को कार्यपालिका से हटाकर सीधे न्यायपालिका के सुपुर्द कर दिया गया है।

राज्यसभा ने लंबी बहस और विपक्षी हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसके साथ ही इस विधेयक को संसद की पूर्ण स्वीकृति मिल गई।

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  1. राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया

    राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में भी पारित हो चुका था।
  2. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान समझाए

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 पर अपनी बात रखी। श्री राय ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को और कड़ा बनाना चाहता है। इसके अंतर्गत घटना के दो वर्ष बाद किए जाने वाले किसी भी पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य कर दिया जाएगा। 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद पेश यह विधेयक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में फेरबदल का प्रस्ताव करता है, जिसका लक्ष्य विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को और सख्त करना है। वर्तमान कानून के तहत यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक की देरी से दी जाती है, तो पंजीकरण दर्ज होने से पहले जिलाधिकारी (DM), उपमंडलाधिकारी (SDM) या किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट की स्वीकृति लेना जरूरी होता है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, एक वर्ष से दो वर्ष के बीच विलंबित पंजीकरण के मामलों में मौजूदा व्यवस्था काफी हद तक बनी रहेगी। इस श्रेणी के आवेदकों को पहले की तरह DM, SDM या जन्म अथवा मृत्यु स्थल के अधिकार क्षेत्र वाले कार्यकारी मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी। लेकिन दो वर्ष से अधिक की देरी से किए जाने वाले पंजीकरण पर काफी कड़ी शर्तें लागू होंगी। ऐसे मामलों में अनुमति केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही मिलेगी — यानी बेहद विलंबित पंजीकरण का अधिकार कार्यपालिका से न्यायपालिका के पास स्थानांतरित हो जाएगा।
  3. राज्यसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू

    विपक्षी सांसदों की निरंतर नारेबाजी के बीच उच्च सदन ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर बहस शुरू कर दी है। यह विधेयक लोकसभा द्वारा पहले ही पास किया जा चुका है। इस नए विधेयक का उद्देश्य दो वर्ष से अधिक की देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अधिक कड़ा बनाना है, जिसके लिए अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता होगी।
  4. लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

    विपक्षी दलों के जोरदार विरोध प्रदर्शन के कारण लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई है। निचले सदन की बैठक अब बुधवार को सुबह 11 बजे पुनः शुरू होगी।
  5. लोकसभा ने ध्वनि मत से पारित किया विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026

    विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने ध्वनि मत से विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी।
  6. लोकसभा की कार्यवाही पुनः प्रारंभ

    लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर से शुरू हो गई है। सदन के पटल पर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
  7. हम केवल दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहे हैं: मल्लिकार्जुन खड़गे

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे चाहते हैं कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति दोनों सदनों में चर्चा कराने की अनुमति दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बार बहस शुरू होने पर सभी तथ्य सामने आ जाएंगे। विपक्षी दल चाहे राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़ा मामला हो या छात्रों के खिलाफ अन्याय व अत्याचार, इन सभी पर बहस की मांग कर रहे हैं।
  8. छात्र मुद्दे पर संसद में गृह मंत्री के बयान की मांग: कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा

    कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मंगलवार (4 अगस्त) को मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री छात्रों से जुड़े हालिया मुद्दों पर संसद में अपना बयान दें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर चर्चा कराने से बच रही है। खेड़ा ने कहा कि देश की भावी पीढ़ियों के साथ हो रहे घटनाक्रमों पर गृह मंत्री का सदन में आकर बयान देना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि चंदे की चोरी हो या युवाओं के भविष्य का नुकसान, दोनों ही गंभीर मुद्दे हैं और यदि सरकार सदन चलाना चाहती है तो उसे इन पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
  9. राम मंदिर चंदे में हेराफेरी पर प्रधानमंत्री दें जवाब: मल्लिकार्जुन खरगे

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार (4 अगस्त) को सदन में कहा कि राम मंदिर दान में चोरी के बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं और इस विषय पर प्रधानमंत्री को स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए।
  10. गृह मंत्री के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन, राज्यसभा दोबारा 2 बजे तक स्थगित

    गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे को देखते हुए मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा की कार्यवाही दूसरी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए मुल्तवी कर दी गई।
  11. हंगामे के बीच दोबारा शुरू हुई राज्यसभा की कार्यवाही

    विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के बीच राज्यसभा की कार्यवाही फिर से शुरू की गई। सदन में प्रश्नकाल के साथ काम शुरू करने का प्रयास किया गया।
  12. राम मंदिर चंदे पर एनडीए और विपक्ष में तकरार, राज्यसभा 12 बजे तक स्थगित

    राम मंदिर दान चोरी मुद्दे को लेकर एनडीए और विपक्षी सांसदों के बीच जोरदार बहस और विरोध के कारण मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक रोकनी पड़ी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर भगवान राम का अनादर करने का आरोप लगाया और माफी की मांग की।
  13. शून्यकाल के दौरान विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर दान चोरी मुद्दे पर की नारेबाजी

    राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर चंदे में हुई कथित चोरी को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
  14. मल्लिकार्जुन खरगे के सवालों पर राज्यसभा में एनडीए सांसदों का हंगामा

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राज्यसभा में राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा उठाए जाने के तुरंत बाद सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने पुरजोर विरोध जताया।
  15. गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग, लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक रुकी

    सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद, विपक्षी सांसदों द्वारा गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग को लेकर किए गए हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
  16. संसद भवन में एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक, पीएम मोदी रहे मौजूद

    मंगलवार को संसद परिसर में एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गठबंधन के अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। संसद ग्रंथालय भवन के जीएमसी बालयोगी सभागार में आयोजित इस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी उपस्थित रहे। इससे पहले, नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय एनडीए संसदीय दल की इस साप्ताहिक बैठक में शामिल होने के लिए संसद पुस्तकालय भवन पहुंचे।
  17. दलबदल रोकने के लिए नए कानून की मांग, मनीष तिवारी ने लोकसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल सहित सूचीबद्ध कामकाज रोककर अवसरवादी सामूहिक दलबदल को रोकने वाले एक नए दलबदल विरोधी कानून की जरूरत पर चर्चा कराने के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। लोकसभा महासचिव को भेजे अपने पत्र में तिवारी ने स्पष्ट किया कि वह लोक महत्व के एक अति आवश्यक विषय पर चर्चा कराने हेतु सदन की कार्यवाही रोकने की मांग कर रहे हैं। नोटिस में कहा गया कि सदन को नियमित काम स्थगित कर एक ऐसे नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर विचार करना चाहिए जो किसी वास्तविक वैचारिक भिन्नता के बिना होने वाले सामूहिक राजनीतिक दलबदल पर रोक लगाए, साथ ही संसद और विधानमंडलों में रचनात्मक असहमति के लिए जगह भी दे।

सवाल-जवाब

मानसून सत्र के 12वें दिन संसद में हंगामा क्यों हुआ?
राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों, गृह मंत्री के बयान की मांग और दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच भारी हंगामा हुआ।
राज्यसभा में कौन सा महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया?
राज्यसभा ने ध्वनि मत से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 को पारित किया, जिसे लोकसभा पहले ही पास कर चुकी थी।
जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक 2026 के मुख्य नियम क्या हैं?
2 वर्ष से अधिक की देरी से जन्म या मृत्यु पंजीकरण कराने पर अब केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही अनुमति मिलेगी।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने क्या मांग की थी?
मनीष तिवारी ने अवसरवादी दलबदल रोकने और नए दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया था।
1 से 2 वर्ष के विलंबित पंजीकरण के लिए किसकी अनुमति की आवश्यकता होगी?
1 से 2 वर्ष के बीच विलंबित पंजीकरण के लिए पहले की तरह जिलाधिकारी (DM), उपमंडलाधिकारी (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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