संसद के मानसून सत्र का बारहवां दिन काफी हंगामेदार रहा, जहां दोनों सदनों में विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। एक तरफ विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर दान में हुई कथित गड़बड़ी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाया, वहीं दूसरी तरफ दलबदल विरोधी कानून में बदलाव की नई मांग भी उठाई गई। इन लगातार व्यवधानों के बीच संसदीय कामकाज भी आगे बढ़ाया गया, जिसके तहत लोकसभा ने जहां ध्वनि मत से वित्तीय विधेयक पास किया, वहीं राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण विधायी संशोधन को अपनी मंजूरी दी।
दलबदल विरोधी कानून में बड़े बदलाव के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव
संसदीय कार्यवाही के आरंभ में ही राजनीतिक दलबदल का विषय प्रमुखता से सामने आया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने निचले सदन में एक औपचारिक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस जमा किया। उन्होंने मांग की कि सदन के नियमित सूचीबद्ध कामकाज, जिसमें प्रश्नकाल और शून्यकाल शामिल हैं, को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाना चाहिए। तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र सौंपकर आग्रह किया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा विचारधारामुक्त सामूहिक दलबदल को रोकने के लिए एक नया और अधिक प्रभावी दलबदल विरोधी ढांचा तैयार करने पर तुरंत विचार-विमर्श कराया जाए।
अपने इस नोटिस में कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था में मौजूद खामियों के कारण बिना किसी वैचारिक मतभिन्नता के सामूहिक रूप से दल बदलने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने रेखांकित किया कि नए कानून का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो अवसरवादी दलबदल पर पूरी तरह अंकुश लगाए, परंतु साथ ही संसद तथा विभिन्न राज्य विधानमंडलों के भीतर जनप्रतिनिधियों को रचनात्मक असहमति व्यक्त करने की लोकतांत्रिक आजादी भी प्रदान करे।
संसद परिसर में एनडीए नेताओं की 'मंगल मिलन' बैठक
सदन की औपचारिक बैठक से पूर्व संसद परिसर में सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीतिक हलचल देखने को मिली। संसद ग्रंथालय भवन में स्थित जीएमसी बालयोगी सभागार में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल हुए।
गठबंधन के भीतर समन्वय स्थापित करने और विधायी प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में अन्य सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बैठक शुरू होने से पहले नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय संसद पुस्तकालय भवन पहुंचे और एनडीए के नेताओं के साथ विचार-विमर्श में भाग लिया।
विपक्ष की नारेबाजी के कारण निचले सदन में कामकाज बाधित
लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में व्यक्तिगत उपस्थिति और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देने की मांग करते हुए हंगामा प्रारंभ कर दिया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल के समीप आ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगाने लगे।
सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि नारेबाजी बंद न होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
राम मंदिर चंदा विवाद पर उच्च सदन में तीखी बहस
राज्यसभा में भी स्थिति भिन्न नहीं रही। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। खरगे द्वारा यह विषय उठाते ही सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने खड़े होकर इसका कड़ा विरोध किया और विपक्ष के दावों को खारिज कर दिया।
सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जहां विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर दान में हेराफेरी के आरोपों पर नारेबाजी की, वहीं सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्ष पर भगवान राम के प्रति अनादर प्रदर्शित करने का आरोप लगाया। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की जिद की, जिसके कारण उच्च सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए मुल्तवी करना पड़ा।
दोपहर बाद राज्यसभा की दोबारा स्थगन और विपक्षी नेताओं की मांगें
दोपहर 12 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही पुनः शुरू हुई, तो पीठ ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया। परंतु विपक्षी सदस्यों का विरोध कम नहीं हुआ। वे गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर बयान देने की मांग पर अड़े रहे। लगातार जारी नारेबाजी के कारण 4 अगस्त की इस बैठक को दूसरी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
सदन के बाहर और भीतर विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "हम केवल दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहे हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति को राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय आरोपों तथा छात्रों पर हो रहे अत्याचारों जैसे विषयों पर व्यापक बहस की अनुमति देनी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। खरगे ने यह भी मांग की कि राम मंदिर दान चोरी के गंभीर आरोपों पर स्वयं प्रधानमंत्री को सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इसी क्रम में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े हालिया घटनाक्रम अत्यंत संवेदनशील हैं और केंद्रीय गृह मंत्री को इस पर संसद के पटल पर आधिकारिक बयान देना चाहिए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार चंदे की चोरी और छात्र वर्ग से जुड़े वास्तविक प्रश्नों पर चर्चा कराने से जानबूझकर भाग रही है।
लोकसभा में विनियोग विधेयक पारित और दिनभर के लिए स्थगन
दोपहर 2 बजे जब लोकसभा की बैठक फिर से शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। इस भारी हंगामे के बीच ही सदन के पटल पर आवश्यक सरकारी दस्तावेज और विधायी पत्र प्रस्तुत किए गए।
शोरगुल के वातावरण के बीच ही निचले सदन ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से अपनी मंजूरी दे दी। इस वित्तीय विधेयक के पारित होने के तुरंत बाद, विपक्षी दलों के अनवरत प्रदर्शन को देखते हुए पीठ ने लोकसभा की कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। अब निचले सदन की अगली बैठक बुधवार सुबह 11 बजे होगी।
राज्यसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पर चर्चा
दूसरी तरफ, उच्च सदन में दोपहर 2 बजे के बाद जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा प्रारंभ हुई, जिसे लोकसभा पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस नए कानून के विभिन्न प्रावधानों को विस्तार से समझाया।
नित्यानंद राय ने बताया कि 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृति प्राप्त यह विधेयक मूल जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जिसे 2023 में भी संशोधित किया गया था) की धारा 13(3) में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तुत करता है। इस विधायी कदम का मुख्य ध्येय दो वर्ष से अधिक की अत्यधिक देरी से कराए जाने वाले पंजीकरणों की जांच प्रक्रिया को बेहद कड़ा और पारदर्शी बनाना है।
विलंबित पंजीकरण के नए कानूनी नियम और न्यायिक मजिस्ट्रेट का अधिकार
प्रस्तावित विधेयक के तहत विलंबित जन्म या मृत्यु पंजीकरण की श्रेणियों को स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है। मौजूदा 1969/2023 कानून के अंतर्गत, यदि घटना के एक वर्ष बाद पंजीकरण की सूचना दी जाती थी, तो संबंधित जिलाधिकारी (DM), उपमंडलाधिकारी (SDM) अथवा कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होती थी।
नए कानून में व्यवस्था की गई है कि एक वर्ष से दो वर्ष के बीच के विलंबित मामलों में पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी, जहां संबंधित क्षेत्र के DM, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट ही अनुमति देने के लिए अधिकृत होंगे। परंतु, दो वर्ष से अधिक की अवधि बीत जाने के बाद किए जाने वाले आवेदनों के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। अब ऐसे अत्यधिक विलंबित मामलों में पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश के बाद ही संभव हो सकेगा। इसके माध्यम से लंबे समय से अटके पंजीकरणों की प्रशासनिक शक्ति को कार्यपालिका से हटाकर सीधे न्यायपालिका के सुपुर्द कर दिया गया है।
राज्यसभा ने लंबी बहस और विपक्षी हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसके साथ ही इस विधेयक को संसद की पूर्ण स्वीकृति मिल गई।



















