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महाभारत कालीन बूढ़ी गंगा नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी, उत्तर प्रदेश सरकार ने चार जिलों में वैज्ञानिक सीमांकन के दिए निर्देशउत्तर प्रदेश
18 सित॰ 2026, 4:22 pm (17 मिनट पहले)· 1

महाभारत कालीन बूढ़ी गंगा नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी, उत्तर प्रदेश सरकार ने चार जिलों में वैज्ञानिक सीमांकन के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने बूढ़ी गंगा नदी को दोबारा जीवित करने के लिए चार जिलों में इसके बाढ़ क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन करने का आदेश दिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के बाद उठाए गए इस कदम से महाभारत कालीन इस ऐतिहासिक नदी के संरक्षण को कानूनी मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मेरठ से करीब 45 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर में बहने वाली प्राचीन बूढ़ी गंगा नदी को नया जीवन देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन करने और इसके लिए अधिसूचना जारी करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। 100 साल के रिटर्न पीरियड (बाढ़ के इतिहास) के आधार पर तैयार होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य बूढ़ी गंगा की लुप्त होती धारा को एक बार फिर से अविरल और निरंतर बनाना है।

चार जिलों की सीमाओं में होगा नदी का वैज्ञानिक सीमांकन

बूढ़ी गंगा के पुनरुद्धार का यह बड़ा अभियान उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख जिलों मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा और हापुड़ की सीमाओं के भीतर चलाया जाएगा। शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती लंबे समय से इस नदी को बचाने के प्रयासों में जुटे हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव कुलदीप श्रीवास्तव द्वारा जारी किए गए नए शासनादेश के तहत बूढ़ी गंगा के बाढ़ क्षेत्र को अक्षांश और देशांतर के वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर अलग-अलग रीच (हिस्सों) में बांटा जाएगा। इस वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन होने के बाद नदी के बहाव क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने की उम्मीदें बहुत मजबूत हो गई हैं।

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महाभारत काल से जुड़ा है बूढ़ी गंगा का इतिहास

बूढ़ी गंगा का महत्व केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा ऐतिहासिक और धार्मिक इतिहास भी है। विभिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक ग्रंथों में इस बात का स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि महाभारत काल के दौरान यह नदी मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध शुक्रताल तीर्थ के पास से बहती थी। वहां से आगे बढ़कर यह मेरठ और अमरोहा से गुजरते हुए हापुड़ के गढ़ गंगा क्षेत्र में जाकर गंगा नदी में मिल जाती थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत कालीन हस्तिनापुर के भव्य मंदिरों के सामने ही बूढ़ी गंगा की तेज धारा बहा करती थी, जिसमें पांचों पांडव और अन्य लोग पूजा-अर्चना करने से पहले स्नान किया करते थे। आज भी हस्तिनापुर के कुछ चुनिंदा हिस्सों में इस नदी की पतली और अविरल धारा बहती हुई देखी जा सकती है।

कानूनी संरक्षण और NGT का महत्वपूर्ण फैसला

इस ऐतिहासिक नदी को बचाने की मुहिम को उस समय बड़ी कानूनी ताकत मिली, जब 5 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सामने एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष कई पुराने और ऐतिहासिक सरकारी दस्तावेज पेश किए गए। इन सबूतों के आधार पर NGT ने साफ तौर पर माना कि बूढ़ी गंगा असल में गंगा नदी की ही एक मुख्य सहायक नदी है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी हमेशा से इसे एक जीवित नदी के रूप में ही दर्ज किया गया है। NGT के इस ऐतिहासिक फैसले ने नदी तंत्र और उसके आसपास के पूरे बाढ़ क्षेत्र को कानूनी रूप से संरक्षित करने का मार्ग साफ कर दिया है।

100 साल के रिटर्न पीरियड का क्या है महत्व?

नदी के संरक्षण के लिए 100 साल के रिटर्न पीरियड के आधार पर बाढ़ मैदान को अधिसूचित करना बेहद जरूरी कदम माना जाता है। इसका मतलब यह है कि पिछले एक सदी के दौरान नदी में आई बाढ़ के अधिकतम स्तर का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित करने के बाद वहां किसी भी तरह के अवैध निर्माण, अतिक्रमण या व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है। इससे नदी के प्राकृतिक चक्र और जल भंडारण क्षमता को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इस वैज्ञानिक कदम से न केवल नदी का अस्तित्व बचेगा, बल्कि भविष्य में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी स्थानीय प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश सरकार के नए आदेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य बूढ़ी गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन और अधिसूचना जारी करके नदी की अविरल धारा को पुनर्जीवित करना है।
बूढ़ी गंगा का सीमांकन उत्तर प्रदेश के किन जिलों में किया जाएगा?
यह सीमांकन मुख्य रूप से चार जिलों मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा और हापुड़ की सीमाओं के भीतर किया जाएगा।
बूढ़ी गंगा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है?
यह महाभारत कालीन नदी है, जिसके बारे में मान्यता है कि हस्तिनापुर के मंदिरों के सामने इसके जल में पांचों पांडव पूजा से पहले स्नान करते थे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस नदी को लेकर क्या महत्वपूर्ण फैसला दिया था?
NGT ने 5 अगस्त 2024 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर बूढ़ी गंगा, मुख्य गंगा नदी की ही एक सहायक नदी है।
बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन किस आधार पर किया जाएगा?
नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन अक्षांश और देशांतर के आधार पर इसे विभिन्न रीच (हिस्सों) में बांटकर किया जाएगा।
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